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कोलकाता नगर निगम चुनाव 2026: बंगाल फतह के बाद कोलकाता फतह की तैयारी में भाजपा
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सार
कोलकाता नगर निगम के क्षेत्र में बंगाल विधानसभा की 11 विधानसभा सीटें आती हैं। भाजपा चार पर जीती है और शेष सीटों पर भारी टक्कर दी है। कोलकाता नगर निगम के 144 वार्डों पर यदि नजर दौड़ाएं तो 101 वार्डों में भाजपा को बढ़त हासिल हुई है। दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस 43 सीटों पर सिमटकर रह गई है।
बंगाल, भाजपा की जीत के बाद खुशियां
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
बंगाल फतह करने के बाद कोलकाता फतह करने के लिए भाजपा चुनावी तैयारियों में अभी से ही उतर चुकी है। जबकि, डायमंड हार्बर संसदीय सीट के अंतर्गत फाल्टा विधानसभा सीट पर 21 मई को पुनर्मतदान और 24 मई को मतगणना होगी। इस चुनाव के छह महीने बाद ही कोलकाता नगर निगम का चुनाव होगा।
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बावजूद इसके भाजपा अभी से ही चुनावी मोड में आ गई है। वजह यह है कि कोलकाता में जो बस्तियां और कॉलोनियां कभी तृणमूल कांग्रेस का अभेद्य दुर्ग मानी जाती थीं, बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उस अभेद्य दुर्ग को भेद दिया है।
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मेयर फिरहाद हकीम के कई मेयर परिषद के सदस्य और बोरो चेयरमैन अपने ही वार्डों में वार्डों में तीन से पांच हजार मतों के अंतर से पिछड़ गए हैं। मार्के की बात तो यह है कि खिदिरपुर, राजाबाजार, तिलजला और कसबा जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों को छोड़कर हर इलाके में कमल चुनाव चिन्ह पर भारी मतदान हुआ है।
कोलकाता नगर निगम के क्षेत्र में बंगाल विधानसभा की 11 विधानसभा सीटें आती हैं। भाजपा चार पर जीती है और शेष सीटों पर भारी टक्कर दी है। कोलकाता नगर निगम के 144 वार्डों पर यदि नजर दौड़ाएं तो 101 वार्डों में भाजपा को बढ़त हासिल हुई है। दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस 43 सीटों पर सिमटकर रह गई है।
मेयर फिरहाद हकीम, डिप्टी मेयर अतिन घोष और मेयर परिषद के सदस्य देबाशीष कुमार तीनों ही विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार थे। ममता सरकार में मंत्री और मेयर फिरहाद हकीम, मुस्लिम बहुल कोलकाता पोर्ट विधानसभा सीट से चुनाव तो जीत गए, लेकिन डिप्टी मेयर अतिन घोष, काशीपुर बेलगछिया विधानसभा सीट से और मेयर परिषद के सदस्य देबाशीष कुमार रासबिहारी विधानसभा सीट से चुनाव हार गए।
पिछले चुनाव का हाल
एक नजर कोलकाता नगर निगम के पिछले चुनाव पर डालते हैं। पांच साल पहले 19 दिसंबर 2021 को चुनाव हुआ था। तृणमूल कांग्रेस को 134 सीटों पर जीत मिली थी जो कि पिछले चुनाव के मुकाबले 20 अधिक थी। भाजपा को तीन सीटें आईं थीं जो कि पिछले चुनाव के मुकाबले चार कम थीं। कांग्रेस दो, सीपीएम-सीपीआई एक-एक और निर्दलीय तीन सीटें जीते थे।
बहरहाल, तृणमूल कांग्रेस के लिए यह विधानसभा चुनाव काफी महंगा साबित रहा। वजह, पार्षदों पर भ्रष्टाचार के आरोपों ने तृणमूल कांग्रेस की स्थिति को और विकट बना दिया। भ्रष्टाचार, सिंडिकेट राज और कट मनी की संस्कृति ने आम जनता को पूरी तरह नाराज किया है। ऐसे में जिन पार्षदों के लिए यह स्थिति आई है, उन्हीं लोगों को अब कोलकाता नगर निगम में स्वयं कीमत चुकानी पड़ सकती है।
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