AI समय: कहीं आप एआई का लिखा तो नहीं पढ़ रहे
एआई से लिखी गई सामग्री खुद से प्रकाशित ई-बुक्स के अलावा अब पारंपरिक रूप से प्रकाशित उपन्यासों में भी दिख रही है। क्या कोई उपन्यासकार एआई से कहानी में मोड़ सुझाने, कोई दूसरा अंत बताने या किसी ड्राफ्ट को बेहतर बनाने के लिए कह सकता है, और फिर भी उसे अपना मौलिक काम बता सकता है? किस मोड़ पर आकर कोई काम ‘इन्सानी’ नहीं रह जाता?
विस्तार
इस साल की शुरुआत में, पैनग्राम (एक एआई डिटेक्शन प्रोग्राम) के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी मैक्स स्पेरो ने शाय गर्ल के बारे में किए जा रहे दावों के बारे में सुना, तो पूरे पाठ को जांचने का फैसला किया। पता चला कि यह उपन्यास 78 प्रतिशत एआई द्वारा तैयार किया गया था। द टाइम्स ने इसके कुछ अंशों का विश्लेषण करने के लिए कई एआई डिटेक्शन टूल्स का इस्तेमाल किया और पाया कि उनमें एआई द्वारा लिखे गए टेक्स्ट की कुछ खास विशेषताएं बार-बार देखने को मिलीं-जैसे तर्क में कमियां और नाटकीय विशेषणों का अत्यधिक इस्तेमाल। जब इस उपन्यास के पाठकों ने व्यापक रूप से इसके एआई द्वारा लिखे जाने की ऑनलाइन शिकायतें कीं, तब भी प्रकाशक चुप रहा। शाय गर्ल की लेखिका मिया बैलार्ड ने भी एआई के इस्तेमाल से इन्कार किया, पर उनका कहना था कि जिस व्यक्ति को उन्होंने उपन्यास के स्व-प्रकाशित संस्करण को संपादित करने का काम सौंपा था, उसने एआई का इस्तेमाल किया था। इन आरोपों के बारे में पूछे जाने पर प्रकाशक हैचेट की प्रवक्ता ने बताया कि एक लंबी और गहन समीक्षा के बाद इसका प्रकाशन रद्द करने का फैसला लिया गया।
लगता है कि शाय गर्ल किसी बड़े प्रकाशक का पहला ऐसा व्यावसायिक उपन्यास है, जिसे एआई के इस्तेमाल से लिखने के सबूत मिलने पर वापस ले लिया गया है। इसे रद्द करना इस बात का संकेत है कि एआई से लिखी गई सामग्री न सिर्फ उन सस्ती, खुद से प्रकाशित ई-बुक्स में दिख रही है, जिनसे अमेजन भरा पड़ा है, बल्कि यह पारंपरिक रूप से प्रकाशित उपन्यासों में भी अपनी जगह बना रहा है। यह चौंकाने वाली बात है कि शाय गर्ल संपादन प्रक्रिया में इतनी आगे तक पहुंच गई और एआई के उपयोग से जुड़े दावों की जांच होने से पहले ही ब्रिटेन में रिलीज भी कर दी गई। यह संकेत है कि किताबों की दुनिया में बहुत से लोग एआई के बढ़ते प्रभाव से निपटने के लिए कितने कम तैयार हैं। यह किताबों की दुनिया के लिए एक अनिश्चित नए दौर की शुरुआत का भी संकेत देता है, क्योंकि संपादक और पाठक, दोनों ही यह सोचकर असमंजस में हैं कि वे जो गद्य पढ़ रहे हैं, वह किसी इन्सान ने लिखा है या मशीन ने।
कुछ प्रकाशकों को चिंता है कि एआई के दखल को रोकने के लिए ज्यादा कुछ नहीं किया जा सकता, खासकर तब, जब यह तकनीक तेजी से और ज्यादा उन्नत होती जा रही है। ग्रोव अटलांटिक के प्रकाशक मॉर्गन एंट्रेकिन ने कहा, ‘यह साहित्यिक चोरी जैसा ही है। आप लेखक की मर्जी पर निर्भर होते हैं। हमें अपने साझेदारों पर भरोसा रखना होगा।’ कुछ लोगों का मानना है कि यह तकनीक तेजी से फैल रही है और स्व-प्रकाशित किताबों को उठाकर उन्हें पारंपरिक प्रकाशकों के जरिये दोबारा जारी करने का चलन भी बढ़ रहा है।
यह अंदाजा लगाना लगभग नामुमकिन है कि एआई द्वारा लिखी गई कितनी सामग्री प्रकाशित हो रही है, पर इसके सबूत हैं कि इस तकनीक की वजह से किताबों की संख्या में जबर्दस्त बढ़ोतरी हुई है। किताब उद्योग से जुड़े आंकड़े इकट्ठा करने वाली संस्था बॉकर के अनुसार, पिछले साल 35 लाख से ज्यादा किताबें स्व-प्रकाशित हुईं, जो 2024 के 25 लाख के आंकड़े से कहीं ज्यादा है। पारंपरिक प्रकाशकों ने पिछले साल 6,42,000 से ज्यादा किताबें प्रकाशित कीं। लेखकों द्वारा एआई के इस्तेमाल को विनियमित करने में एक दिक्कत यह है कि ज्यादातर कॉरपोरेट पब्लिशिंग हाउस इसे पूरी तरह से प्रतिबंधित नहीं करना चाहते। संपादक यह समझते हैं कि लेखक एआई का इस्तेमाल लिखने के अलावा भी कई अलग-अलग तरीकों से करते हैं। क्या कोई उपन्यासकार एआई से कहानी में मोड़ सुझाने, कोई दूसरा अंत बताने या किसी ड्राफ्ट को बेहतर बनाने के लिए कह सकता है, और फिर भी उसे अपना मौलिक काम बता सकता है? किस मोड़ पर आकर कोई काम ‘इन्सानी’ नहीं रह जाता?
आथर्स गिल्ड की मुख्य कार्यकारी मैरी रासेनबर्गर का कहना है कि यह एक असली समस्या है, और हमें कुछ सुरक्षा उपाय तो खोजने ही होंगे। लेखकों और पाठकों के बीच एआई की मदद से लेखन अब भी बेहद विवादास्पद बना हुआ है। कुछ लोगों को चिंता है कि एआई को लेकर अस्पष्टता और साहित्यिक जगत में इस एआई से जुड़े कलंक के कारण लेखकों द्वारा इसके बारे में खुलकर बात न करने की संभावना बढ़ जाती है।
डिस्क्रिप्ट एआई
डिस्क्रिप्ट एआई एक आधुनिक और बेहद स्मार्ट ऑडियो-वीडियो एडिटिंग प्लेटफॉर्म है, जो पारंपरिक एडिटिंग की जटिलताओं को खत्म करके पूरी प्रक्रिया को सरल और सहज बना देता है। यह उपयोगकर्ता की ऑडियो या वीडियो फाइल को अपने आप टेक्स्ट में बदल देता है। इसके बाद उन्हें भारी-भरकम टूल्स से जूझने की जरूरत नहीं होती। अगर वे टेक्स्ट का कोई हिस्सा हटाते, जोड़ते या इधर-उधर करते हैं, तो वही बदलाव सीधे फाइल में भी दिखने लगता है। इसी कारण, डिस्क्रिप्ट एआई कंटेंट क्रिएटर्स, पॉडकास्टर्स और वीडियो एडिटर्स के लिए बेहद प्रभावी टूल बन गया है, जो उनके समय की बचत करता है।