{"_id":"69dc5e89337f33e45009fcb6","slug":"asha-bhosle-passed-away-know-interesting-fact-about-her-by-his-own-language-2026-04-13","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"'ये वो दरिया है, जो कभी खत्म नहीं होता'; जब आशा भोसले ने खुद सुनाए अपनी जिंदगी से जुड़े दिलचस्प किस्से","category":{"title":"Blog","title_hn":"अभिमत","slug":"blog"}}
'ये वो दरिया है, जो कभी खत्म नहीं होता'; जब आशा भोसले ने खुद सुनाए अपनी जिंदगी से जुड़े दिलचस्प किस्से
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: Sarijuddin
Updated Mon, 13 Apr 2026 08:40 AM IST
विज्ञापन
सार
Asha Bhosle: 12 अप्रैल को महान गायिका आशा भोसले का निधन हो गया। अपने जीवन में उन्होंने विभिन्न साक्षात्कारों में अपने बारे में कई खास बातें बताई थीं। आइए जानते हैं उन्होंने क्या कहा था?
आशा भोसले
- फोटो : एक्स
विज्ञापन
विस्तार
आशा भोसले की जिंदगी के कई दिलचस्प किस्से हैं। कई साक्षात्कारों में उन्होंने इन किस्सों को साझा किया था। यहां पढ़िए आशा ताई से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से उन्हीं की जुबानी।
10 साल की उम्र में रिकॉर्ड किया पहला गाना
जब मैंने अपना पहला गाना रिकॉर्ड किया, तो मेरी उम्र मात्र दस वर्ष थी। मुझे यह गाना माइक के सामने गाना था और मैं कांपने लगी, क्योंकि तब मुझे कुछ पता नहीं था। जब मैंने अपना पहला गाना गाया, तो मुझे लगा कि मैं भी गा सकती हूं। सिर्फ दीदी (लता मंगेशकर) ही नहीं गा सकतीं, मैं भी गा सकती हूं।
बचपन में दीदी मेरे सबसे करीब थीं। वह मेरी बांह पकड़ लेतीं और हम पूरे शहर में घूमते। वह मुझे हर रोज अपने साथ स्कूल ले जाती थीं। आखिरकार एक दिन, शिक्षक ने हम दोनों को एक ही क्लास में बैठने से मना कर दिया। जब शिक्षक ने हमें वहां साथ बैठने से रोक दिया, तो हम दोनों रोते हुए घर पहुंचे। फिर दीदी (लता) ने मेरे बिना स्कूल जाना बंद कर दिया। बाबा ने कहा कि वे हमारे लिए एक प्राइवेट टीचर का इंतजाम करेंगे और इसी के साथ उनका स्कूल जाना खत्म हो गया।
Trending Videos
10 साल की उम्र में रिकॉर्ड किया पहला गाना
जब मैंने अपना पहला गाना रिकॉर्ड किया, तो मेरी उम्र मात्र दस वर्ष थी। मुझे यह गाना माइक के सामने गाना था और मैं कांपने लगी, क्योंकि तब मुझे कुछ पता नहीं था। जब मैंने अपना पहला गाना गाया, तो मुझे लगा कि मैं भी गा सकती हूं। सिर्फ दीदी (लता मंगेशकर) ही नहीं गा सकतीं, मैं भी गा सकती हूं।
विज्ञापन
विज्ञापन
बचपन में दीदी मेरे सबसे करीब थीं। वह मेरी बांह पकड़ लेतीं और हम पूरे शहर में घूमते। वह मुझे हर रोज अपने साथ स्कूल ले जाती थीं। आखिरकार एक दिन, शिक्षक ने हम दोनों को एक ही क्लास में बैठने से मना कर दिया। जब शिक्षक ने हमें वहां साथ बैठने से रोक दिया, तो हम दोनों रोते हुए घर पहुंचे। फिर दीदी (लता) ने मेरे बिना स्कूल जाना बंद कर दिया। बाबा ने कहा कि वे हमारे लिए एक प्राइवेट टीचर का इंतजाम करेंगे और इसी के साथ उनका स्कूल जाना खत्म हो गया।
आशा भोसले
- फोटो : इंस्टाग्राम
एक महीने के बच्चे को छोड़कर काम पर जाती थीं आशा ताई
जब मैंने गाना शुरू किया, तो मैं बंबई (मुंबई) से बहुत दूर रहती थी और गाने के लिए रोज ट्रेन से आती थी। 1949 में, जब मैं 16 साल की थी, तब मेरा बच्चा पैदा हुआ। मुझे अपने एक महीने के बच्चे को घर पर छोड़कर स्टूडियो जाना पड़ता था। हर सुबह पांच बजे मैं रियाज करती थी और घर भी संभालना पड़ता था। गांव के कुएं से पानी भरना, खाना बनाना, सास और देवर की देखभाल करना और काम के बाद देर रात घर लौटना। कई बार परिवार की एकमात्र कमाने वाली सदस्य होने और एकल मां होने के नाते मुझे अपने बच्चों को दूध पिलाने के लिए अक्सर स्टूडियो से जाना पड़ता था, क्योंकि वे बहुत छोटे थे। फिर मैं रिकॉर्डिंग पूरी करने के लिए वापस लौट आती थी।
जब मैंने गाना शुरू किया, तो मैं बंबई (मुंबई) से बहुत दूर रहती थी और गाने के लिए रोज ट्रेन से आती थी। 1949 में, जब मैं 16 साल की थी, तब मेरा बच्चा पैदा हुआ। मुझे अपने एक महीने के बच्चे को घर पर छोड़कर स्टूडियो जाना पड़ता था। हर सुबह पांच बजे मैं रियाज करती थी और घर भी संभालना पड़ता था। गांव के कुएं से पानी भरना, खाना बनाना, सास और देवर की देखभाल करना और काम के बाद देर रात घर लौटना। कई बार परिवार की एकमात्र कमाने वाली सदस्य होने और एकल मां होने के नाते मुझे अपने बच्चों को दूध पिलाने के लिए अक्सर स्टूडियो से जाना पड़ता था, क्योंकि वे बहुत छोटे थे। फिर मैं रिकॉर्डिंग पूरी करने के लिए वापस लौट आती थी।
Asha Bhosle Death: सोशल मीडिया पर एक्टिव थीं आशा भोसले, जानें आखिरी पोस्ट में क्या था खास?
आशा भोसले
- फोटो : इंस्टाग्राम
संगीत मेरी सांस है
संगीत सांस की तरह है और यह हमेशा आसान नहीं था। सांस नहीं होती है, तो आदमी मर जाता है। मेरे लिए संगीत मेरी सांस है। मैंने अपनी पूरी जिंदगी इसी सोच के साथ बिताई है। मैंने संगीत को बहुत कुछ दिया है।
जैसे हर क्षेत्र में राजनीति होती है, फिल्मों में भी राजनीति होती है, इसलिए यह आसान नहीं है। मैं किस्मत पर बहुत भरोसा करती हूं और मेरा मानना है कि जो मेरे लिए बना है, वह मुझे जरूर मिलेगा और जो मेरे लिए नहीं बना है, वह मुझे कभी नहीं मिलेगा। मुझे मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन आज जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूं, तो यह सब मजेदार लगता है, क्योंकि मैं उन मुश्किलों से बाहर निकल आई हूं।
संगीत सांस की तरह है और यह हमेशा आसान नहीं था। सांस नहीं होती है, तो आदमी मर जाता है। मेरे लिए संगीत मेरी सांस है। मैंने अपनी पूरी जिंदगी इसी सोच के साथ बिताई है। मैंने संगीत को बहुत कुछ दिया है।
जैसे हर क्षेत्र में राजनीति होती है, फिल्मों में भी राजनीति होती है, इसलिए यह आसान नहीं है। मैं किस्मत पर बहुत भरोसा करती हूं और मेरा मानना है कि जो मेरे लिए बना है, वह मुझे जरूर मिलेगा और जो मेरे लिए नहीं बना है, वह मुझे कभी नहीं मिलेगा। मुझे मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन आज जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूं, तो यह सब मजेदार लगता है, क्योंकि मैं उन मुश्किलों से बाहर निकल आई हूं।
आशा भोसले
- फोटो : एएनआई
90 की उम्र में तीन घंटे खड़े होकर गाना गाया
नब्बे साल की उम्र में, मुझे स्टेज पर तीन घंटे खड़े होकर गाने गाने पड़ते हैं। मुझे खुशी है कि मैं इस उम्र में भी ऐसा कर पाती हूं।
संगीत एक दरिया है, जो खत्म नहीं होता
संगीत कभी खत्म नहीं होता, यह दरिया है। अगर कोई कहता है कि 'मैं खुद को पूर्ण मानता हूं', तो ऐसा कहना गलत है, क्योंकि कोई भी अपने आप में पूर्ण नहीं होता। बात हमेशा इस बारे में होती है कि आप समय के साथ कैसे बदल सकते हैं या विकसित हो सकते हैं। मैंने मुख्य कलाकारों और डांसरों के लिए भी गाने गाए हैं। मेरा मानना है कि मैं किसी के भी साथ आसानी से घुल-मिल सकती हूं। लेकिन मेरी इच्छा है कि मैंने अलग-अलग भाषाओं में और भी गाने गाए होते। काश, मैं और ज्यादा शास्त्रीय गायन कर पाती!
-विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित
नब्बे साल की उम्र में, मुझे स्टेज पर तीन घंटे खड़े होकर गाने गाने पड़ते हैं। मुझे खुशी है कि मैं इस उम्र में भी ऐसा कर पाती हूं।
संगीत एक दरिया है, जो खत्म नहीं होता
संगीत कभी खत्म नहीं होता, यह दरिया है। अगर कोई कहता है कि 'मैं खुद को पूर्ण मानता हूं', तो ऐसा कहना गलत है, क्योंकि कोई भी अपने आप में पूर्ण नहीं होता। बात हमेशा इस बारे में होती है कि आप समय के साथ कैसे बदल सकते हैं या विकसित हो सकते हैं। मैंने मुख्य कलाकारों और डांसरों के लिए भी गाने गाए हैं। मेरा मानना है कि मैं किसी के भी साथ आसानी से घुल-मिल सकती हूं। लेकिन मेरी इच्छा है कि मैंने अलग-अलग भाषाओं में और भी गाने गाए होते। काश, मैं और ज्यादा शास्त्रीय गायन कर पाती!
-विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित