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Barack Obama: ओबामा के 'एलियंस' बयान से फैली अफवाह, सच्चाई क्या है?
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सार
वर्ष 2021 में पेंटागन की एक रिपोर्ट सामने आई, जिसमें 2004 से 2021 के बीच दर्ज 140 से अधिक घटनाओं का उल्लेख था। इन्हें ‘अनआइडेंटिफाइड एरियल फिनॉमिना’ यानी यूएपी कहा गया।
बराक ओबामा ने एलियंस पर किया चौंकाने वाला खुलासा
- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
हाल ही में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के एक बयान ने सोशल मीडिया पर भारी हलचल मचा दी। मिनेसोटा में अवैध प्रवासियों के खिलाफ संघीय एजेंसियों की छापेमारी पर टिप्पणी करते हुए ओबामा ने 'एलियंस इन कस्टडी' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जो संभवतः अमेरिकी कानून में अवैध प्रवासियों को संदर्भित करता है।
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हालांकि, इस बयान को संदर्भ से काटकर कुछ लोगों ने इसे अंतरिक्षीय एलियंस (दूसरे ग्रहों के लोग )से जोड़ दिया, जिससे अफवाह फैल गई कि अमेरिका ने दूसरे ग्रहों से आए जीवों को हिरासत में रखा है। बाद में ओबामा ने स्वयं भी स्पष्टीकरण दे दिया था। लेकिन तब तक बात साड़ी दुनियां में फ़ैल चुकी थी। यह चर्चा न केवल राजनीतिक मुद्दों को छूती है, बल्कि यूएफओ (अनआइडेंटिफाइड फ्लाइंग ऑब्जेक्ट्स) और यूएपी (अनआइडेंटिफाइड एरियल फिनॉमिना) के रहस्यमयी दुनिया में भी घुस जाती है।
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अनआइडेंटिफाइड एरियल फिनॉमिना
यूएफओ का विषय लंबे समय तक कल्पना, विज्ञान कथा और साजिश सिद्धांतों तक सीमित माना जाता रहा। हालांकि पिछले एक दशक में अमेरिकी सरकार का रवैया कुछ हद तक बदला है। वर्ष 2021 में पेंटागन की एक रिपोर्ट सामने आई, जिसमें 2004 से 2021 के बीच दर्ज 140 से अधिक घटनाओं का उल्लेख था। इन्हें ‘अनआइडेंटिफाइड एरियल फिनॉमिना’ यानी यूएपी कहा गया।
इन घटनाओं में सैन्य पायलटों द्वारा देखी गई ऐसी उड़न वस्तुओं का जिक्र था, जिनकी गति और व्यवहार मौजूदा तकनीक और भौतिकी के ज्ञात नियमों से मेल नहीं खाते थे।
हालांकि, इस रिपोर्ट में भी यह नहीं कहा गया कि ये वस्तुएं किसी अंतरिक्षीय सभ्यता से जुड़ी थीं। रक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि इनमें से कई घटनाएं प्राकृतिक कारणों, ड्रोन, विदेशी तकनीक या सेंसर की त्रुटियों से जुड़ी हो सकती हैं। लेकिन कुछ मामलों की पहचान न हो पाने ने रहस्य को और गहरा जरूर किया।
इसके अलावा, 2024 में पेंटागन की एक नई समीक्षा रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया कि यूएफओ दर्शनों में कोई एलियन तकनीक का सबूत नहीं मिला है और कोई सरकारी कवर-अप नहीं चल रहा। इस रिपोर्ट ने दशकों पुरानी अफवाहों को खारिज करते हुए कहा कि ज्यादातर दर्शन सामान्य वस्तुओं या तकनीकी गड़बड़ियों के कारण थे, लेकिन मिसइनफॉर्मेशन के प्रसार ने जांच को धीमा कर दिया है।
एलियन शब्द का द्विअर्थी विश्लेषण
‘एलियन’ शब्द और प्रवासन का कानूनी अर्थ विवाद का असली कारण अंतरिक्ष नहीं, बल्कि धरती पर ही मौजूद एक गंभीर राजनीतिक और मानवीय मुद्दा है—प्रवासन। अमेरिकी कानून में ‘इलीगल एलियन’ शब्द उन लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जो बिना वैध दस्तावेजों के अमेरिका में प्रवेश करते हैं या वहां रहते हैं। यह शब्द दशकों से प्रशासनिक और कानूनी भाषा का हिस्सा रहा है, हालांकि हाल के वर्षों में इसे अमानवीय मानते हुए इसके प्रयोग पर सवाल भी उठे हैं।
उदाहरण के लिए, बाइडेन प्रशासन ने इस शब्द को 'अनडॉक्यूमेंटेड इमिग्रेंट्स' जैसे अधिक मानवीय शब्दों से बदलने की कोशिश की है, लेकिन रिपब्लिकन नेता इसे बनाए रखने पर जोर देते हैं। इसी संदर्भ में ओबामा ने हाल ही में मिनेसोटा में हुई एक कार्रवाई पर टिप्पणी की थी, जहां संघीय एजेंसियों ने अवैध प्रवासियों के खिलाफ छापेमारी कर कई लोगों को हिरासत में लिया।
ओबामा ने इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह की सामूहिक गिरफ्तारियां और भय का माहौल अधिनायकवादी देशों की याद दिलाता है। उन्होंने मानवीय दृष्टिकोण अपनाने और कानून के साथ करुणा बरतने की बात कही।
यहीं से भ्रम पैदा हुआ
ओबामा द्वारा इस्तेमाल किए गए ‘एलियंस इन कस्टडी’ जैसे शब्दों को कुछ लोगों ने जानबूझकर या अज्ञानवश अंतरिक्षीय एलियंस से जोड़ दिया। सोशल मीडिया पर क्लिप्स को संदर्भ से काटकर पेश किया गया और देखते ही देखते यह अफवाह फैल गई कि अमेरिका ने किसी दूसरे ग्रह के जीवों को कैद कर रखा है।
एक्स (पूर्व ट्विटर) पर ऐसे कई पोस्ट्स देखे गए जहां यूजर्स ने ओबामा के बयान को यूएफओ थ्योरीज से जोड़ा। उदाहरण के लिए, एक पोस्ट में दावा किया गया कि ओबामा ने विल स्मिथ के बेटे से बातचीत में 'ईटी' मूवी का जिक्र करके एलियंस की सच्चाई को संकेत दिया था, जबकि वह केवल मजाक कर रहे थे।
एक अन्य पोस्ट में इमिग्रेशन कस्टडी को यूएफओ कस्टडी से जोड़कर मिसइनफॉर्मेशन फैलाई गई। ये उदाहरण दिखाते हैं कि कैसे राजनीतिक बयान वैज्ञानिक अफवाहों में बदल जाते हैं।
अफवाहों का दौर और डिजिटल युग
यह पहली बार नहीं है जब किसी सार्वजनिक व्यक्ति के बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया हो। डिजिटल युग में सूचनाएं जितनी तेजी से फैलती हैं, उतनी ही तेजी से भ्रम भी फैलता है। एल्गोरिद्म आधारित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सनसनीखेज दावों को बढ़ावा देते हैं, क्योंकि वही ज्यादा क्लिक और व्यूज लाते हैं। ‘एलियंस अमेरिकी हिरासत में’ जैसे वाक्य स्वाभाविक रूप से लोगों की जिज्ञासा को भड़काते हैं, भले ही उनका वास्तविक अर्थ कुछ और हो।
यह भी उल्लेखनीय है कि 2023 में पूर्व अमेरिकी खुफिया अधिकारी डेविड ग्रुश ने कांग्रेस के सामने शपथ लेकर दावा किया था कि अमेरिका के पास ‘गैर-मानवीय’ शिल्पों के अवशेष हैं। इस बयान ने भी काफी हलचल मचाई थी। हालांकि सरकार ने न तो इस दावे की पुष्टि की और न ही उसे पूरी तरह खारिज किया। आज तक कोई ठोस, सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है।
इसके अलावा, ओबामा ने खुद 2021 में रेजी लव के पॉडकास्ट में यूएफओ पर बात की, जहां उन्होंने स्पष्ट कहा कि राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने पूछा था कि क्या कोई लैब में एलियन स्पेसक्राफ्ट हैं, और जवाब नकारात्मक मिला। उन्होंने केवल इतना कहा कि ब्रह्मांड इतना बड़ा है कि कहीं जीवन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
ब्रह्मांड में कहीं और जीवन हो सकता है
तथ्य, संभावना और भ्रम के बीच सभी उपलब्ध तथ्यों और बयानों का विश्लेषण यही संकेत देता है कि बराक ओबामा ने कभी यह स्वीकार नहीं किया कि अंतरिक्ष से आए किसी जीव को अमेरिका ने हिरासत में रखा है। उन्होंने केवल वैज्ञानिक संभावना के तौर पर यह कहा कि ब्रह्मांड में कहीं और जीवन हो सकता है।
‘हिरासत में लिए गए एलियंस’ वाला संदर्भ पूरी तरह से प्रवासन और अवैध प्रवासियों की कानूनी स्थिति से जुड़ा हुआ था। इस प्रकरण से एक बड़ा सबक भी मिलता है। शब्दों का संदर्भ और अर्थ समझे बिना उन्हें साझा करना न केवल गलत सूचना फैलाता है, बल्कि गंभीर मुद्दों को भी हल्के मनोरंजन में बदल देता है।
अंतरिक्षीय जीवन की खोज मानवता के लिए एक रोमांचक वैज्ञानिक प्रश्न है, जबकि प्रवासन एक जटिल मानवीय और राजनीतिक समस्या। दोनों को एक-दूसरे में मिलाकर देखना न तो विज्ञान के साथ न्याय है और न ही समाज के साथ।
यूएफओ जांच में प्रगति
इसके अतिरिक्त, हाल के वर्षों में यूएफओ जांच में प्रगति हुई है। नासा ने 2023 में एक स्वतंत्र पैनल गठित किया, जो यूएपी डेटा का विश्लेषण कर रहा है। इस पैनल ने जोर दिया कि ज्यादातर दर्शन वैज्ञानिक तरीके से समझाए जा सकते हैं, लेकिन बेहतर डेटा संग्रह की जरूरत है। इसी तरह, अमेरिकी कांग्रेस में यूएपी पर सुनवाईयां जारी हैं, जहां सैन्य अधिकारी गवाही दे रहे हैं।
उदाहरण के लिए, 2022 में नौसेना के पायलटों ने गोलाकार वस्तुओं के दर्शन का वर्णन किया, जो हवा में स्थिर रहती थीं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ये चीनी या रूसी जासूसी ड्रोन हो सकते हैं।
प्रवासन के संदर्भ में, ओबामा प्रशासन ने भी 'केजेस' का इस्तेमाल किया था, जिसकी आलोचना हुई, लेकिन यह ट्रंप और बाइडेन प्रशासनों में भी जारी रहा। 2024 में बाइडेन ने डिपोर्टेशन को कम किया, लेकिन रिपब्लिकन्स इसे सीमा सुरक्षा की विफलता बताते हैं।
सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहें
इस पूरे मुद्दे से हमें मीडिया साक्षरता की महत्वता समझ आती है। सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहें न केवल व्यक्तिगत विश्वासों को प्रभावित करती हैं, बल्कि सार्वजनिक नीतियों पर भी असर डालती हैं। उदाहरण के लिए, यूएफओ थ्योरीज ने कई लोगों को सरकार पर अविश्वास करने पर मजबूर किया, जबकि वास्तविकता में ये जांच पारदर्शिता बढ़ाने के लिए हैं।
इसी तरह, प्रवासन पर बहस में 'एलियन' शब्द का इस्तेमाल मानवीय संवेदनाओं को चोट पहुंचाता है। ओबामा का बयान एक याद दिलाता है कि शब्दों की शक्ति कितनी बड़ी है- वे एकता ला सकते हैं या विभाजन पैदा कर सकते हैं। अंत में, विज्ञान और राजनीति को अलग रखकर ही हम सच्चाई तक पहुंच सकते हैं।
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