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जीवन धारा: प्रेम एक भ्रम ही तो है, आत्म-समर्पण और अपनी असुरक्षा को स्वीकार करना जरूरी
फ्रेंज काफ्का
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 16 Feb 2026 06:31 AM IST
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सार
प्रेम एक भ्रम है, जो दूरी में फलता है, लेकिन निकटता में मुरझा जाता है। प्रेम महज एक भावना नहीं है, यह जटिल है। यह आनंद है, लेकिन यातना भी, निकटता है, लेकिन दूरी भी। जीवन है, लेकिन मृत्यु भी।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
मैं निरंतर कोई अवर्णनीय बात समझाने और बताने का प्रयास करता रहा हूं, जिसे मैं केवल अपनी आत्मा में महसूस करता हूं और जिसका अनुभव केवल आत्मा के स्तर पर ही हो सकता है। दरअसल, यह वही भय है, जो हर चीज में फैला हुआ है। जरूरी नहीं कि यह भय केवल भय ही हो, यह उस चीज की लालसा भी हो सकती है, जो भय से परे हो। यह एक तरह की अपूर्णता का एहसास है और जब कोई अकेला होता है, तो उसे हर पल इसे सहना पड़ता है। मुमकिन है कि यह अतिशयोक्ति या झूठा एहसास हो। पर एकमात्र सत्य तो यह तड़प ही है। तड़प का सत्य क्या वाकई सत्य है या कई झूठी भावनाओं की सच्ची अभिव्यक्ति? मेरी बात सुनने में विकृत लग सकती है, लेकिन यही है, जो मैं महसूस कर रहा हूं। जब कोई कहता है कि तुम ही हो, जिससे मैं सबसे अधिक प्रेम करता हूं, तो यह कहना झूठ भी हो सकता है। जब मैं कहता हूं कि तुम्हारी तड़प एक छुरी है, जो मुझे भीतर से आहत कर रही है, तो यह सच है। यही प्रेम है।
हालांकि मैं जानता हूं कि चाहे तुम कितना भी चाहो, लेकिन मुझसे प्रेम नहीं कर सकतीं। तुम्हारे हृदय में मेरे लिए जो प्रेम है, उससे शायद तुम दुखी भी हो, क्योंकि मेरे प्रति तुम्हारा प्यार, तुम्हें तुमसे दूर कर सकता है। मैं ऐसा ही हूं। मेरी दुनिया बिखर रही है। मैं बिखरने का शोक नहीं मना रहा, मैं तो हमेशा से बिखरता ही रहा हूं। मैं समझता हूं कि कोई दूर बैठे किसी के बारे में सोच सकता है और पास बैठे किसी को थामे रह सकता है। इसके अलावा, सबकुछ मानवीय शक्ति से परे है। सोचता हूं कि काश हम साथ में होते। साथ जीते, साथ मरते। पर यह इच्छा ही है। जब मैं छोटा था, तब अंकगणित की कक्षा में शिक्षक मेरी नोटबुक को ध्यान से पलट रहा होता, और मेरी इच्छा होती कि मैं किसी तरह कक्षा से बाहर आ जाऊं, उस जानी-पहचानी दुनिया में, जहां गणित की कक्षा जैसा तनाव न होता। लेकिन यह इच्छा ही रह गई, कभी पूरी नहीं हुई। सोचता हूं कि तुम्हें पत्र लिखूं, लेकिन इसका मतलब अज्ञात के सामने खुद को उजागर करने जैसा होगा। मुझे अज्ञात के सामने खुद को परोसना अच्छा नहीं लगता। इस अज्ञात तत्व को खत्म करने के लिए ही मनुष्य ने रेलगाड़ी, ऑटोमोबाइल और हवाई जहाज के आविष्कार किए। लेकिन अज्ञात की शक्तियां मजबूत हैं, इसलिए ही डाक के बाद तार, टेलीफोन, बेतार के तार का आविष्कार हुआ। पत्र लिखना मुझे कमजोर और असुरक्षित बनाता है, जो मैं होना नहीं चाहता। प्रेम मेरे लिए एक सपना है, जो जागते ही टूट जाता है। हम दूर हैं, लेकिन जो साथ होते हैं, क्या उनमें प्रेम होता है? प्रेम एक भ्रम है, जो दूरी में फलता है, लेकिन निकटता में मुरझा जाता है। सच्चा प्रेम आत्म-समर्पण है, लेकिन वह समर्पण हमें नष्ट भी कर सकता है। प्रेम महज एक भावना नहीं है, यह जटिल है। यह आनंद है, लेकिन यातना भी, निकटता है, लेकिन दूरी भी। जीवन है, लेकिन मृत्यु भी।
- ‘लेटर टु मिलेना’ पुस्तक के अनूदित अंश
सूत्र: असुरक्षा को स्वीकार करें
प्रेम केवल सुख का मिलन नहीं, बल्कि स्वयं को खोकर सत्य को पाने की तड़प है। प्रेम महज एक भावना नहीं है, यह जटिल है। यह आनंद है, लेकिन यातना भी, निकटता है, लेकिन दूरी भी। अपने भीतर की असुरक्षा को स्वीकार करना ही सबसे बड़ी शक्ति है। अज्ञात से डरो मत, क्योंकि वहीं अनंत संभावनाएं जीवित रहती हैं।
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हालांकि मैं जानता हूं कि चाहे तुम कितना भी चाहो, लेकिन मुझसे प्रेम नहीं कर सकतीं। तुम्हारे हृदय में मेरे लिए जो प्रेम है, उससे शायद तुम दुखी भी हो, क्योंकि मेरे प्रति तुम्हारा प्यार, तुम्हें तुमसे दूर कर सकता है। मैं ऐसा ही हूं। मेरी दुनिया बिखर रही है। मैं बिखरने का शोक नहीं मना रहा, मैं तो हमेशा से बिखरता ही रहा हूं। मैं समझता हूं कि कोई दूर बैठे किसी के बारे में सोच सकता है और पास बैठे किसी को थामे रह सकता है। इसके अलावा, सबकुछ मानवीय शक्ति से परे है। सोचता हूं कि काश हम साथ में होते। साथ जीते, साथ मरते। पर यह इच्छा ही है। जब मैं छोटा था, तब अंकगणित की कक्षा में शिक्षक मेरी नोटबुक को ध्यान से पलट रहा होता, और मेरी इच्छा होती कि मैं किसी तरह कक्षा से बाहर आ जाऊं, उस जानी-पहचानी दुनिया में, जहां गणित की कक्षा जैसा तनाव न होता। लेकिन यह इच्छा ही रह गई, कभी पूरी नहीं हुई। सोचता हूं कि तुम्हें पत्र लिखूं, लेकिन इसका मतलब अज्ञात के सामने खुद को उजागर करने जैसा होगा। मुझे अज्ञात के सामने खुद को परोसना अच्छा नहीं लगता। इस अज्ञात तत्व को खत्म करने के लिए ही मनुष्य ने रेलगाड़ी, ऑटोमोबाइल और हवाई जहाज के आविष्कार किए। लेकिन अज्ञात की शक्तियां मजबूत हैं, इसलिए ही डाक के बाद तार, टेलीफोन, बेतार के तार का आविष्कार हुआ। पत्र लिखना मुझे कमजोर और असुरक्षित बनाता है, जो मैं होना नहीं चाहता। प्रेम मेरे लिए एक सपना है, जो जागते ही टूट जाता है। हम दूर हैं, लेकिन जो साथ होते हैं, क्या उनमें प्रेम होता है? प्रेम एक भ्रम है, जो दूरी में फलता है, लेकिन निकटता में मुरझा जाता है। सच्चा प्रेम आत्म-समर्पण है, लेकिन वह समर्पण हमें नष्ट भी कर सकता है। प्रेम महज एक भावना नहीं है, यह जटिल है। यह आनंद है, लेकिन यातना भी, निकटता है, लेकिन दूरी भी। जीवन है, लेकिन मृत्यु भी।
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- ‘लेटर टु मिलेना’ पुस्तक के अनूदित अंश
सूत्र: असुरक्षा को स्वीकार करें
प्रेम केवल सुख का मिलन नहीं, बल्कि स्वयं को खोकर सत्य को पाने की तड़प है। प्रेम महज एक भावना नहीं है, यह जटिल है। यह आनंद है, लेकिन यातना भी, निकटता है, लेकिन दूरी भी। अपने भीतर की असुरक्षा को स्वीकार करना ही सबसे बड़ी शक्ति है। अज्ञात से डरो मत, क्योंकि वहीं अनंत संभावनाएं जीवित रहती हैं।