{"_id":"69b608b3ee60ea2e4404e613","slug":"cricket-in-india-from-colonial-game-to-national-passion-after-t20-world-cup-2026-2026-03-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक भारतीय खेल जिसे अंग्रेजों ने समझा अपनी खोज: टी-20 विश्वकप 2026 ने फिर दिखाया भारतीय क्रिकेट का दम","category":{"title":"Blog","title_hn":"अभिमत","slug":"blog"}}
एक भारतीय खेल जिसे अंग्रेजों ने समझा अपनी खोज: टी-20 विश्वकप 2026 ने फिर दिखाया भारतीय क्रिकेट का दम
संदीप जोशी, नई दिल्ली
Published by: Shivam Garg
Updated Sun, 15 Mar 2026 06:57 AM IST
विज्ञापन
सार
टी-20 विश्वकप 2026 ने यह साबित किया कि भारतीय क्रिकेट अब केवल प्रतिभा का नहीं, बल्कि समन्वय, धैर्य और नेतृत्व का भी उदाहरण बन चुका है। क्रिकेट के प्रति भारतीयों का यह प्रेम उन्हें एकजुट करता है और गर्व का अहसास कराता है।
भारतीय टीम
- फोटो : ANI
विज्ञापन
विस्तार
क्रिकेट के प्रति भारतीयों के गहरे लगाव को प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक आशीष नंदी ने अपनी किताब में 1989 में ही व्यक्त कर दिया था। उन्होंने लिखा था कि भारत में क्रिकेट केवल एक खेल नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक भावना बन चुका है। जब हाल ही में अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में भारत ने लगातार दूसरा टी-20 विश्वकप जीता, तो यह बात और भी सच लगने लगी। सवा लाख दर्शकों की मौजूदगी में मिली इस जीत का जश्न पूरे देश में त्योहार की तरह मनाया गया। पटाखों, ढोल-नगाड़ों, नाच-गाने और सोशल मीडिया पर बधाइयों की बाढ़ ने इस ऐतिहासिक जीत को और खास बना दिया।
Trending Videos
भारतीय क्रिकेट का यह गौरवपूर्ण सफर 1983 से शुरू हुआ था, जब कपिल देव की कप्तानी में भारत ने लॉर्ड्स में वेस्ट इंडीज को हराकर पहला विश्वकप जीता था। आज भारतीय क्रिकेट और अधिक परिपक्व तथा विकसित दिखाई देता है। टी-20 विश्वकप 2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने न केवल शानदार प्रदर्शन किया, बल्कि टीम भावना और आत्मविश्वास का भी बेहतरीन उदाहरण पेश किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
कप्तान सूर्यकुमार यादव के नेतृत्व में टीम ने साहसिक और आक्रामक क्रिकेट खेला। बल्लेबाजों ने व्यक्तिगत उपलब्धियों के बजाय टीम की जीत को प्राथमिकता दी। शुरुआती बल्लेबाज संजू सैमसन ने लगातार आक्रामक बल्लेबाजी से टीम को मजबूत शुरुआत दी। वहीं ईशान किशन और अभिषेक शर्मा को कप्तान का भरपूर समर्थन मिला, जिससे उनकी प्रतिभा खुलकर सामने आई।
गेंदबाजी भी भारतीय टीम की बड़ी ताकत रही। जसप्रीत बुमराह ने अपनी सटीक और घातक गेंदबाजी से विरोधी टीमों को लगातार दबाव में रखा। अर्शदीप सिंह, मोहम्मद सिराज और वरुण चक्रवर्ती ने भी महत्वपूर्ण मौकों पर शानदार प्रदर्शन किया। इसके साथ ही टीम की फील्डिंग इतनी चुस्त रही कि कई असंभव लगने वाले कैच भी पकड़े गए।
इस विश्वकप ने यह साबित किया कि भारतीय क्रिकेट अब केवल प्रतिभा का नहीं, बल्कि समन्वय, धैर्य और नेतृत्व का भी उदाहरण बन चुका है। क्रिकेट के प्रति भारतीयों का यह प्रेम उन्हें एकजुट करता है और गर्व का अहसास कराता है।
अब अगली चुनौती अगले वर्ष होने वाला एकदिवसीय विश्वकप है। यदि यही टीम भावना और समर्पण बना रहा, तो भारत भविष्य में भी नई ऊंचाइयां हासिल कर सकता है। सच तो यह है कि खेल हमें सत्य, धैर्य और अहिंसा की भावना भी सिखाता है और यही मूल्य किसी भी राष्ट्र को सच्चा ‘विश्वगुरु’ बना सकते हैं।