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जीवन धारा: हर अंत में एक नया आरंभ छिपा होता है, परिवर्तन से डरना नहीं चाहिए
मार्सेल प्रुस्त
Published by: Devesh Tripathi
Updated Tue, 19 May 2026 06:14 AM IST
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जीवन धारा
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विस्तार
समय के साथ हमारा व्यक्तित्व बदलता है, हमारी इच्छाएं बदलती हैं, हमारे विचार बदलते हैं, और धीरे-धीरे हम उस व्यक्ति से अलग हो जाते हैं, जो कभी हुआ करते थे। जो हम कल थे, वह आज नहीं रह जाते। हमारे भीतर लगातार कुछ समाप्त होता रहता है और उसकी जगह कुछ नया जन्म लेता है। इसलिए जीवन केवल जीने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि बार-बार बदलने और नए रूप में जन्म लेने की यात्रा भी है। हर बदलाव हमारे पुराने अस्तित्व के एक हिस्से को पीछे छोड़ देता है, और हर नई सीख, हर नया अनुभव हमारे भीतर एक नए व्यक्तित्व, नई ऊर्जा और नए जीवन का जन्म कराता है।हमारे जीवन की सबसे साधारण चीजें भी हमारी आत्मा से गहराई से जुड़ जाती हैं। एक पुराना कमरा, उसकी छत, दीवारों पर पड़ती धूप, खिड़की से आती हवा, बारिश की गंध, किसी परिचित जगह की चुप्पी या दूर से सुनाई देने वाली आवाज-ये सब केवल बाहरी वस्तुएं नहीं रह जातीं, बल्कि वे हमारे अनुभवों, हमारी स्मृतियों और हमारे भीतर बसे हुए समय का हिस्सा बन जाती हैं। इसलिए जब वे बदलती हैं या हम उनसे दूर हो जाते हैं, तो हमें केवल किसी वस्तु के खोने का दुख नहीं होता। हमें ऐसा लगता है, मानो हमारे अपने अस्तित्व का कोई हिस्सा धीरे-धीरे मिट रहा हो। यही कारण है कि कभी-कभी बहुत छोटी और साधारण बातें भी हमें गहराई से भावुक कर देती हैं, क्योंकि उनमें हमारा बीता हुआ कल छिपा होता है।
जीवन की सबसे कठिन सच्चाई यही है कि परिवर्तन कभी रुकता नहीं। समय लगातार हमारे भीतर से पुरानी परतों को हटाता रहता है। हमारी पुरानी आदतें, पुराने सपने, पुराना प्रेम और यादें धीरे-धीरे धुंधली होने लगती हैं। फिर भी मनुष्य का हृदय इस परिवर्तन को आसानी से स्वीकार नहीं कर पाता। वह चाहता है कि जो सुंदर था, जो अपना था, वह हमेशा वैसा ही बना रहे। वह बीते हुए समय को पकड़कर रखना चाहता है, क्योंकि उसी में उसे अपनी पहचान दिखाई देती है, लेकिन समय किसी के लिए नहीं रुकता। वह हमें लगातार आगे बढ़ाता रहता है, चाहे हम तैयार हों या नहीं। संवेदनशील और गहराई से महसूस करने वाले लोग इन परिवर्तनों को और तीव्रता से अनुभव करते हैं। वे उन चीजों में भी अर्थ और पीड़ा महसूस करते हैं, जिन्हें दुनिया सामान्य मानकर अनदेखा कर देती है। उनके लिए हर पुरानी जगह, हर मौसम और हर आवाज किसी खोए हुए समय का द्वार बन जाती है। और इसी अनुभव में एक गहरी प्रेरणा भी छिपी होती है। इसलिए, परिवर्तन से डरना नहीं चाहिए, क्योंकि हर अंत के भीतर एक नया आरंभ छिपा रहता है। जो बीत जाता है, वह पूरी तरह नष्ट नहीं होता। वह हमारी स्मृतियों, हमारी संवेदनाओं और हमारे अनुभवों में जीवित रहता है। हर दर्द हमें थोड़ा और गहरा बनाता है और हर विदाई हमें अपने भीतर छिपे किसी नए सत्य से परिचित कराती है।
-इन सर्च ऑफ लॉस्ट टाइम के अनूदित अंश