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दूसरा पहलू: ऑनलाइन दुनिया और बढ़ती बेचैनी, युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर सोशल मीडिया के असर को लेकर चिंताएं

पाब्लो ग्रासिया Published by: Devesh Tripathi Updated Wed, 20 May 2026 06:45 AM IST
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सार
युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर सोशल मीडिया के असर को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं, लेकिन इसका प्रभाव हर युवा पर एक जैसा नहीं पड़ता।
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सोशल मीडिया और युवा - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

जैसे-जैसे सोशल मीडिया युवाओं की जिंदगी का एक अहम हिस्सा बनता जा रहा है, उनके मानसिक स्वास्थ्य पर इसके असर को लेकर चिंताएं भी बढ़ती जा रही हैं। हालांकि, सोशल मीडिया हर युवा को एक जैसा प्रभावित नहीं करता और न ही इसका असर उनकी खुशहाली पर एकसमान रूप से होता है।


वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट 2026 के एक अध्याय के विश्लेषण में यह समझाने की कोशिश की गई कि सोशल मीडिया का उपयोग विभिन्न सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि वाले किशोरों की मानसिक स्थिति व जीवन संतुष्टि को किस तरह प्रभावित करता है। अध्ययन में 43 देशों को शामिल किया गया। करीब 3.3 लाख किशोरों से जुटाए गए आंकड़ों के विश्लेषण में यह स्पष्ट हुआ कि जिन युवाओं में सोशल मीडिया के प्रति अत्यधिक लगाव, नियंत्रण खो देना या बार-बार इस्तेमाल करने की मजबूरी जैसी प्रवृत्तियां अधिक थीं, उनमें मानसिक परेशानियां भी ज्यादा देखने को मिलीं। ऐसे किशोरों में उदासी, चिंता, चिड़चिड़ेपन और अनिद्रा जैसी समस्याएं अधिक पाई गईं। साथ ही, उनकी ‘जीवन संतुष्टि’, यानी अपनी पूरी जिंदगी को लेकर सकारात्मक महसूस करने की क्षमता भी कम देखी गई। अध्ययन से यह भी पता चला कि कम संसाधन वाले परिवारों से आने वाले किशोर सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभावों के प्रति अधिक संवेदनशील पाए गए। परिवार की आय, परिवारजनों के रहने की परिस्थितियां और सामाजिक संसाधन यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं कि डिजिटल दुनिया किसी युवा के लिए अवसर बनेगी या जोखिम। दिलचस्प बात यह रही कि यह असमानता सबसे ज्यादा ‘जीवन संतुष्टि’ के स्तर पर दिखाई दी। विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी बड़ी वजह सोशल मीडिया पर होने वाली लगातार तुलना है। युवा हर समय दूसरों की उपलब्धियों, जीवनशैली और संसाधनों को देखते रहते हैं, जिससे उन्हें अपनी परिस्थितियां कमतर महसूस हो सकती हैं। कोविड महामारी के दौरान और उसके बाद युवाओं के जीवन में डिजिटल तकनीक की बढ़ती भूमिका ने इस खतरे को और गहरा किया।


अध्ययन से साफ हुआ कि सभी किशोर डिजिटल दुनिया का अनुभव एक जैसा नहीं करते। उनकी सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां तय करती हैं कि वे ऑनलाइन दुनिया के दबावों का सामना कितनी मजबूती से कर पाएंगे।  

-साथ में, रोजर फर्नांडीज-उर्बानो और मारिया रूबियो-काबानेज (द कन्वर्सेशन)
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