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दूसरा पहलू: अंतरिक्ष यात्रियों को ग्रहण कैसा दिखाई पड़ता है

डीना एल वाइबेल Published by: Devesh Tripathi Updated Tue, 19 May 2026 06:12 AM IST
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सार
अप्रैल 2026 में आर्मेटिस-II मिशन के अंतरिक्ष यात्री ऐसे पहले इन्सान बने, जिन्होंने अंतरिक्ष से पूर्ण सूर्य ग्रहण का दृश्य अपनी आंखों से देखा।
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सूर्यग्रहण - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

अप्रैल 2026 में आर्मेटिस-II मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों ने सिर्फ एक रोमांचक अंतरिक्ष यात्रा ही नहीं की, बल्कि उन्होंने एक बेहद दुर्लभ और अद्भुत नजारा भी देखा। वे ऐसे पहले इन्सान बने, जिन्होंने अंतरिक्ष से पूर्ण सूर्य ग्रहण का दृश्य अपनी आंखों से देखा। सूर्य ग्रहण तब होता है, जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है व सूर्य को ढक लेता है। पूर्ण सूर्य ग्रहण की स्थिति में, सूर्य का चमकीला मध्य भाग पूरी तरह छिप जाता है। 12 अगस्त, 2026 को फिर एक पूर्ण सूर्य ग्रहण होने जा रहा है, पर यह चुनिंदा देशों में ही दिखाई देगा। इस दौरान ‘मून इल्यूजन’, यानी चंद्रमा का भ्रम भी देखने को मिल सकता है, जिसमें क्षितिज के पास चंद्रमा सामान्य से बड़ा दिखाई देता है और यही इस ग्रहण को और विशाल व अद्भुत बना सकता है।


छह अप्रैल, 2026 को, नासा के आर्टेमिस-II मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों ने एक अलग तरह का अद्भुत ग्रहण देखा। उस समय वे चंद्रमा के चारों ओर उड़ान भर रहे थे। उनकी यात्रा के दौरान चंद्रमा और उनका अंतरिक्ष यान एक सीध में आ गए और चंद्रमा ठीक उनके और सूर्य के बीच आ गया। इस स्थिति में दृश्य पृथ्वी से दिखने वाले दृश्य से बिल्कुल अलग था। उस समय अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा सूर्य से भी बड़ा दिखाई दे रहा था। इस अद्भुत दृश्य में पृथ्वी भी दिखाई दे रही थी। सूर्य का प्रकाश पृथ्वी से टकराकर वापस चंद्रमा पर पड़ रहा था। इसी घटना को ‘अर्थशाइन’ कहा जाता है। कल्पना कीजिए कि सूर्य चंद्रमा के पीछे छिपा हुआ है, और चंद्रमा के चारों ओर हल्का-सा धुंधला घेरा बन रहा है। उसी समय पृथ्वी से परावर्तित रोशनी चांद को हल्का रोशन कर रही है, जिससे उसकी सतह पर मौजूद पहाड़ व गड्ढे साफ दिखाई दे रहे हैं। यह अद्भुत नजारा पूरे 54 मिनट तक रहा। अंतरिक्ष यात्रियों ने भी स्वीकारा कि उनका दिमाग उन दृश्यों पर भरोसा नहीं कर पा रहा था, जो वे देख रहे थे।


वैज्ञानिकों ने लंबे समय से यह समझने की कोशिश की है कि ‘विस्मय’ का इन्सानी दिमाग पर क्या असर पड़ता हैै। चंद्रमा के पीछे से सूर्य ग्रहण देखना एक ऐसा दुर्लभ और अलौकिक अनुभव है, जिसके बारे में पृथ्वी पर रहने वाले ज्यादातर लोग कल्पना ही कर सकते हैं। लेकिन चाहे ग्रहण अंतरिक्ष में देखा जाए या पृथ्वी से, ब्रह्मांड की इस भव्यता के साथ सीधा साक्षात्कार आपको भीतर तक झकझोर देता है और यह एहसास कराता है कि इन्सान होना अपने आप में कितना अद्भुत अनुभव है।  - द कन्वर्सेशन
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