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राज और नीति : जल्द आ सकती है कलेक्टरों की तबादला सूची
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सार
मध्य प्रदेश में बजट सत्र के बीच कलेक्टरों की तबादला सूची जल्द जारी होने की चर्चा है। एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रतिबंध हट गया है। भोपाल, इंदौर सहित कई जिलों में बदलाव संभव हैं, जबकि कुछ कलेक्टरों का कार्यकाल पूरा होने और पदोन्नति के कारण स्थानांतरण तय माना जा रहा है।
राज और नीति : मप्र में सियासी और प्रशासनिक हलचल बताता कॉलम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के बीच कभी भी कलेक्टरों की तबादला सूची आने की चर्चा है। मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसके कारण कलेक्टरों के तबादलों पर अब तक प्रतिबंध लगा हुआ था। माना जा रहा है कि अब कभी भी कलेक्टरों की तबादला सूची आ सकती है। सूत्रों के मुताबिक इस संबंध में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन के बीच चर्चा भी हो चुकी है। इस सूची में विभिन्न कारणों से इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, रीवा, शहडोल, धार, बैतूल शिवपुरी, सीधी, मैहर सहित एक दर्जन जिलों में बदलाव देखने को मिल सकता है। भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह सुपर टाइम स्केल में पदोन्नत हो चुके हैं। ऐसे में उनका स्थानांतरण लगभग तय माना जा रहा है। शिवपुरी, रीवा, धार और मैहर जिलों के कलेक्टर अपने कार्यकाल के 3 वर्ष पूरे कर चुके हैं। धार या बैतूल के कलेक्टर को भोपाल या इंदौर का कलेक्टर बनाए जाने की चर्चा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस सूची में क्या 2017 बैच के सीधी भर्ती के अधिकारियों और कलेक्टर बनने से वंचित रहे प्रमोटी आईएएस अधिकारियों का नंबर लगेगा?
पीएम के पीएस की दो दिनी भोपाल यात्रा
पूर्व ब्यूरोक्रेट और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव पीके मिश्रा की हाल ही में हुई दो दिन की भोपाल यात्रा इन दिनों प्रशासनिक और सियासी गलियारों में चर्चा में है। बताया गया है कि वे एक निजी विवाह समारोह में भाग लेने भोपाल आए थे। इस दौरान उन्होंने राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से भी मुलाकात की। मिश्रा की इन तीनों से मुलाकात के मायने निकाले जा रहे हैं। पीके मिश्रा गुजरात कैडर के 1972 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हैं। वे 11 सितंबर 2019 से प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव हैं। वे गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव (2001-2004), केंद्रीय कृषि सचिव और पीएम के अतिरिक्त प्रधान सचिव (2014-2019) रह चुके हैं।
एसीएस नीरज मंडलोई की कुशल प्रशासनिक कारीगरी
प्रदेश में इस समय मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के बीच बेहतर समन्वय देखने में आ रहा है। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में विकास को नई गति मिली है। रोड नेटवर्क के लिए केंद्र सरकार से मध्य प्रदेश को सर्वाधिक बजट मिला है। राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में मध्य प्रदेश सबसे आगे है। औद्योगिक क्षेत्र में भी निवेश की दृष्टि से मध्य प्रदेश अग्रणी है। मेट्रोपॉलिटन सिटी, नदी जोड़ो अभियान सहित कई ऐसे काम प्रदेश में हो रहे हैं जो भविष्य में प्रदेश के विकास में नया आयाम जोड़ेंगे। सियासी और प्रशासनिक गलियारों में इन सब के पीछे मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के बेहतर समन्वय को देखा जा रहा है। इस समन्वय के पीछे की कुशल प्रशासनिक कारीगरी करने वाले हैं मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई। याद करें अनुराग जैन के मुख्य सचिव बनने के शुरुआती दौर में उनके और मुख्यमंत्री के बीच तालमेल के अभाव की चर्चाएं होती रहती थी, लेकिन इन चर्चाओं पर अब न केवल विराम लग गया है बल्कि दोनों मध्य प्रदेश के विकास में हर जगह साथ खड़े नजर आते हैं।
निगम मंडलों में नियुक्तियों के संकेत
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इस बात के साफ संकेत दिए हैं कि राज्य के निगम मंडलों सहित सत्ता और संगठन के रिक्त पदों पर नियुक्ति की तैयारी है। खंडेलवाल का मानना है कि पार्टी में संगठन हो या सत्ता, सभी पद महत्वपूर्ण होते हैं। पार्टी के सभी प्रकोष्ठों में भी नियुक्ति होना है। खंडेलवाल कहते हैं कि हमारी कोशिश है कि हमारा कार्यकर्ता किसी न किसी जवाबदारी में आए। माना जा रहा है कि संगठन और सत्ता के सभी पदों पर एक साथ नियुक्ति की तैयारी के कारण ही सूची जारी करने में विलंब हो रहा है। पार्टी अध्यक्ष खंडेलवाल द्वारा दिए गए संकेत से कार्यकर्ताओं में फिर से आस जागी है।
अस्वीकरण: यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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पूर्व ब्यूरोक्रेट और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव पीके मिश्रा की हाल ही में हुई दो दिन की भोपाल यात्रा इन दिनों प्रशासनिक और सियासी गलियारों में चर्चा में है। बताया गया है कि वे एक निजी विवाह समारोह में भाग लेने भोपाल आए थे। इस दौरान उन्होंने राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से भी मुलाकात की। मिश्रा की इन तीनों से मुलाकात के मायने निकाले जा रहे हैं। पीके मिश्रा गुजरात कैडर के 1972 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हैं। वे 11 सितंबर 2019 से प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव हैं। वे गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव (2001-2004), केंद्रीय कृषि सचिव और पीएम के अतिरिक्त प्रधान सचिव (2014-2019) रह चुके हैं।
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एसीएस नीरज मंडलोई की कुशल प्रशासनिक कारीगरी
प्रदेश में इस समय मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के बीच बेहतर समन्वय देखने में आ रहा है। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में विकास को नई गति मिली है। रोड नेटवर्क के लिए केंद्र सरकार से मध्य प्रदेश को सर्वाधिक बजट मिला है। राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में मध्य प्रदेश सबसे आगे है। औद्योगिक क्षेत्र में भी निवेश की दृष्टि से मध्य प्रदेश अग्रणी है। मेट्रोपॉलिटन सिटी, नदी जोड़ो अभियान सहित कई ऐसे काम प्रदेश में हो रहे हैं जो भविष्य में प्रदेश के विकास में नया आयाम जोड़ेंगे। सियासी और प्रशासनिक गलियारों में इन सब के पीछे मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के बेहतर समन्वय को देखा जा रहा है। इस समन्वय के पीछे की कुशल प्रशासनिक कारीगरी करने वाले हैं मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई। याद करें अनुराग जैन के मुख्य सचिव बनने के शुरुआती दौर में उनके और मुख्यमंत्री के बीच तालमेल के अभाव की चर्चाएं होती रहती थी, लेकिन इन चर्चाओं पर अब न केवल विराम लग गया है बल्कि दोनों मध्य प्रदेश के विकास में हर जगह साथ खड़े नजर आते हैं।
निगम मंडलों में नियुक्तियों के संकेत
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इस बात के साफ संकेत दिए हैं कि राज्य के निगम मंडलों सहित सत्ता और संगठन के रिक्त पदों पर नियुक्ति की तैयारी है। खंडेलवाल का मानना है कि पार्टी में संगठन हो या सत्ता, सभी पद महत्वपूर्ण होते हैं। पार्टी के सभी प्रकोष्ठों में भी नियुक्ति होना है। खंडेलवाल कहते हैं कि हमारी कोशिश है कि हमारा कार्यकर्ता किसी न किसी जवाबदारी में आए। माना जा रहा है कि संगठन और सत्ता के सभी पदों पर एक साथ नियुक्ति की तैयारी के कारण ही सूची जारी करने में विलंब हो रहा है। पार्टी अध्यक्ष खंडेलवाल द्वारा दिए गए संकेत से कार्यकर्ताओं में फिर से आस जागी है।
अस्वीकरण: यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।