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दूसरी पारी: उपहार से ज्यादा भावनाओं का है महत्व, अपने परिवार के लोगों से खुलकर करें बात
अमर उजाला
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 20 Feb 2026 05:27 AM IST
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सार
आर्थिक संकट से जूझ रही 78 वर्षीय बुजुर्ग महिला को मनोवैज्ञानिक नीलकंठ ने उपहार के संबंध में कुछ यों सलाह दी-
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
संयुक्त परिवार में बुजुर्गों का अपने बच्चों, नाती-पोतों और नातिन-पोतियों को आशीर्वाद के तौर पर नकद या तोहफे देना एक पुरानी परंपरा है। इसकी जड़ें पुरुष-प्रधान व्यवस्था में हैं, जहां पैसे पर परिवार के सबसे बड़े आदमी का नियंत्रण होता था। पारंपरिक रूप से, खास मौकों पर बच्चों का अपने बड़ों के पैर छूना और बड़े-बुजुर्गों का उन्हें नकद या सोने-चांदी के गहने के रूप में आशीर्वाद देना आम बात हो गई है। पर, आज की बढ़ती महंगाई के दौर में सभी बुजुर्ग, विशेषकर महिलाएं इसका भार नहीं उठा पाती हैं। सोने-चांदी के भाव आज इतने ज्यादा हो गए हैं कि इन सब रीति-रिवाजों को निभाना एक बड़ा बोझ बन गया है। यह सिर्फ आपकी ही समस्या नहीं है, बल्कि कई बुजुर्गों ने अपनी बातचीत में मुझसे यह समस्या साझा की है।
जैसा कि मैंने अन्य लोगों को सलाह दी है, आपको भी सुझाव देना चाहता हूं कि अपने परिवार के लोगों, खासकर बेटों से खुलकर बात करें। सबसे पहले, उन्हें बताएं कि आप कैसा महसूस कर रही हैं और उनसे इस समस्या का समाधान पूछें। आपके लिए सबसे आसान तरीका यह है कि आप उनसे कहें कि वे आपकी तरफ से शगुन के तौर पर उपहार का एक लिफाफा तैयार कर लें।
दूसरा विकल्प यह है कि यदि आप सक्षम हों, तो सोने के गहनों के बदले चांदी का सिक्का देना शुरू करें-यह शगुन की निशानी होगी और अपेक्षाकृत सस्ती भी। निराश होने या अपराध-बोध से ग्रसित होने के बजाय अपनी कोई आमदनी न होने पर भी आप प्यार और भावनाओं से भरे हस्तनिर्मित उपहार देकर परिवार के लोगों को खुश कर सकती हैं। समय, मेहनत और रचनात्मकता से बनाए गए उपहार महंगे तोहफों से कहीं ज्यादा कीमती होते हैं। आप हस्तनिर्मित कार्ड, पुरानी यादों का कोलाज फोटो फ्रेम देकर भी उन्हें खास महसूस करा सकती हैं। हाथ से बने ग्रीटिंग कार्ड, पेंटिंग्स, या किसी पुरानी तस्वीर को इस तरह से सजाएं, जो देखने में अनूठी लगे और प्रेम दर्शाती हो। यदि घर में कोई पुरानी वस्तु हो, तो उसे सजाकर या पेंट करके उपहार के तौर पर दे सकती हैं।
उपहार देने की कोई सीमा नहीं होती, इसलिए आप अपनी आर्थिक हैसियत देखकर ही उपहार दें। चूंकि, आप संयुक्त परिवार में रहती हैं, तो उपहार देना लाजिमी है। इसलिए ऐसा उपहार दें, जिससे किसी को भेदभाव का आरोप लगाने का अवसर न मिले और आपकी वित्तीय स्वतंत्रता पर भी आंच न आए। असल में, उपहार में कीमती वस्तु से ज्यादा भावनाओं का महत्व होता है, इसलिए खुलकर अपने प्यार का इजहार करें। आखिरकार, इन खास पलों में खुश रहने का हक आपको भी है। समाज व सामाजिक परिपाटी को अपने निर्णयों पर हावी न होने दें!
जिंदगी की दूसरी पारी बहुत महत्वपूर्ण होती है। हर शुक्रवार इस पर आपको नया पढ़ने को मिलेगा। आप अपने विचार, अनुभव या समस्याएं edit@amarujala.com पर भेज सकते हैं, विशेषज्ञों की मदद से हम कोशिश करेंगे कि संवाद का पुल बन सके।
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जैसा कि मैंने अन्य लोगों को सलाह दी है, आपको भी सुझाव देना चाहता हूं कि अपने परिवार के लोगों, खासकर बेटों से खुलकर बात करें। सबसे पहले, उन्हें बताएं कि आप कैसा महसूस कर रही हैं और उनसे इस समस्या का समाधान पूछें। आपके लिए सबसे आसान तरीका यह है कि आप उनसे कहें कि वे आपकी तरफ से शगुन के तौर पर उपहार का एक लिफाफा तैयार कर लें।
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दूसरा विकल्प यह है कि यदि आप सक्षम हों, तो सोने के गहनों के बदले चांदी का सिक्का देना शुरू करें-यह शगुन की निशानी होगी और अपेक्षाकृत सस्ती भी। निराश होने या अपराध-बोध से ग्रसित होने के बजाय अपनी कोई आमदनी न होने पर भी आप प्यार और भावनाओं से भरे हस्तनिर्मित उपहार देकर परिवार के लोगों को खुश कर सकती हैं। समय, मेहनत और रचनात्मकता से बनाए गए उपहार महंगे तोहफों से कहीं ज्यादा कीमती होते हैं। आप हस्तनिर्मित कार्ड, पुरानी यादों का कोलाज फोटो फ्रेम देकर भी उन्हें खास महसूस करा सकती हैं। हाथ से बने ग्रीटिंग कार्ड, पेंटिंग्स, या किसी पुरानी तस्वीर को इस तरह से सजाएं, जो देखने में अनूठी लगे और प्रेम दर्शाती हो। यदि घर में कोई पुरानी वस्तु हो, तो उसे सजाकर या पेंट करके उपहार के तौर पर दे सकती हैं।
उपहार देने की कोई सीमा नहीं होती, इसलिए आप अपनी आर्थिक हैसियत देखकर ही उपहार दें। चूंकि, आप संयुक्त परिवार में रहती हैं, तो उपहार देना लाजिमी है। इसलिए ऐसा उपहार दें, जिससे किसी को भेदभाव का आरोप लगाने का अवसर न मिले और आपकी वित्तीय स्वतंत्रता पर भी आंच न आए। असल में, उपहार में कीमती वस्तु से ज्यादा भावनाओं का महत्व होता है, इसलिए खुलकर अपने प्यार का इजहार करें। आखिरकार, इन खास पलों में खुश रहने का हक आपको भी है। समाज व सामाजिक परिपाटी को अपने निर्णयों पर हावी न होने दें!
जिंदगी की दूसरी पारी बहुत महत्वपूर्ण होती है। हर शुक्रवार इस पर आपको नया पढ़ने को मिलेगा। आप अपने विचार, अनुभव या समस्याएं edit@amarujala.com पर भेज सकते हैं, विशेषज्ञों की मदद से हम कोशिश करेंगे कि संवाद का पुल बन सके।