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दूसरा पहलू: सती की अंग्रेज से शादी और वह जानलेवा शाप... यह दास्तां 1771 ईस्वी में शुरू हुई

भूपेंद्र कुमार, अमर उजाला। Published by: Jyoti Bhaskar Updated Thu, 14 May 2026 10:53 AM IST
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सार

भारत के रीति-रिवाजों के बारे में विदेशी यात्रियों ने कई रोचक किस्सों को कलमबद्ध किया। ऐसा ही यह किस्सा जानलेवा शाप से जुड़ा है। यह दास्तां 1771 ईस्वी में शुरू हुई, जब जोसेफ डिक्सन नामक अंग्रेज ईस्ट इंडिया कंपनी में राइटर की नौकरी करने भारत आया।

Sati Pratha In India Marriage With Englishman and Deadly Curse This saga began in year 1771 know details
विदेशी यात्रियों ने कई रोचक किस्सों को कलमबद्ध किया है - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार

विदेशी यात्रियों ने भारत के रीति-रिवाजों के बारे में खूब लिखा है। खासकर 17वीं शताब्दी में फ्रांसीसी बर्नियर और इतालवी मनूची ने मुगल व ब्रिटिश काल के कितने ही रोचक किस्सों को कलमबद्ध किया। ऐसा ही एक किस्सा सती प्रथा से जुड़ा है।

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ब्रिटिश एसोसिएशन फॉर सीमेटरीज इन साउथ एशिया की पत्रिका 'चौकीदार' ने ऐसे ही एक लोमहर्षक किस्से को 1993 में प्रकाशित किया। यह दास्तां 1771 ईस्वी में शुरू हुई, जब जोसेफ डिक्सन नामक अंग्रेज ईस्ट इंडिया कंपनी में राइटर की नौकरी करने भारत आया। यहां उसने एक उच्च जाति की युवा महिला को पुलिस के सहयोग से सती होने से बचा लिया। यहीं से उसके परिवार के साथ अजीबोगरीब घटनाएं शुरू हुईं।
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सुखी नाम की उस महिला के पुरोहित भाइयों ने शाप दिया कि उसकी सात पुश्तों तक कोई खुश नहीं रहेगा, न ही बेटे-बेटियों की कभी शादी होगी। पर शाप से बेपरवाह डिक्सन ने सुखी से शादी कर ली। सुखी ने हेनरी नाम के बेटे और नैंसी नाम की बेटी को वर्ष 1778 में जन्म दिया। सात साल बाद जोसेफ छुट्टी लेकर बेटी के साथ इंग्लैंड चला गया। सुखी और हेनरी भारत में ही रह गए।

डिक्सन को आभास हो गया था कि उसके साथ कोई अनहोनी हो सकती है। इसलिए दिसंबर 1785 में अपनी मौत से तीन माह पूर्व उसने वसीयत कर दी कि भारत में उसकी जो भी संपत्ति है, वह सुखी और हेनरी को मिलेगी। इधर भारत में सुखी के भाइयों ने उसकी हत्या कर दी और हेनरी को जहर देकर मार डाला। नैंसी को डिक्सन के दूर के रिश्ते के भाई फ्लैचर ने पाला और 1798 में सैमुअल से उसकी शादी हो गई। इस शादी से नैंसी को एक बेटी हुई, लेकिन सैमुअल की एक हादसे में मौत हो गई। हताश नैंसी ने कुछ समय बाद डैनी एशबर्थम से दूसरी शादी की।

वर्ष 1818 में एक दिन, जब नैंसी अकेली थी, तो गार्डन में चाकू से उस पर हमला हुआ। परिवार के लोगों ने शाप से पीछा छुड़ाने के लिए नैंसी और उससे जुड़े सभी दस्तावेज उसके साथ ही दफना दिए। इधर भारत में दिसंबर, 1829 में पहले गवर्नर-जनरल लॉर्ड विलियम बेंटिक ने सती प्रथा को प्रतिबंधित कर दिया। वर्ष 1883 में नैंसी के नाती जेम्स मैकेंजी ने कब्र में दफन दस्तावेज निकालने का प्रयास किया। वह जानना चाहता था कि क्या वाकई इतनी मौतों के पीछे शाप था। पर कब्र की हालत ऐसी नहीं थी कि उसे खोला जा सकता। और इसी के साथ नैंसी और शाप का राज भी हमेशा के लिए दफन हो गया।

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