विराट कोहली से कह रहे फैन्स- 'अभी न जाओ छोड़कर के दिल अभी भरा नहीं'
विराट कोहली केवल एक क्रिकेटर नहीं हैं, वह एक बड़े यूथ आइकॉन भी हैं। वह भारत के बहुत बड़े ब्रांड एंबेसडर हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर भारतीय सेना के डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई तक उनके बहुत बड़े प्रशंसक हैं।
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दिवंगत अभिनेता देवानंद की फिल्म 'हम दोनों' का प्रसिद्ध गीत है 'अभी न जाओ छोड़कर के दिल अभी भरा नहीं'। क्रिकेटर विराट कोहली के लिए आज दुनियाभर में करोड़ों फैन्स के मन में यही गीत बज रहा है।
विराट कोहली के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास को लेकर दो दिन से चल रही ऊहापोह उस समय समाप्त हो गई, जब विराट कोहली के संन्यास की आधिकारिक घोषणा हो गई। पिछले वर्ष टी-20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद विराट कोहली ने टी-20 क्रिकेट से संन्यास ले लिया था।
अब विराट कोहली वन-डे क्रिकेट में खेलते नजर आएंगे। हालांकि, लग तो यही रहा है कि जल्द ही वह वन-डे क्रिकेट से भी संन्यास ले लेंगे।
जैसा नाम है, वैसा ही विराट व्यक्तित्व कोहली का है, जिन्हें साथी खिलाड़ी प्यार से चीकू भी पुकारते हैं। वर्ष 2008 में अंडर-19 टीम इंडिया को वर्ल्ड कप जीताने से लेकर अब टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने तक विराट कोहली के व्यक्तित्व में 360 डिग्री का परिवर्तन देखने को मिला है।
जब विराट कोहली अंडर-19 में खेलते थे तो एक चबी ब्वॉय हुआ करते थे। तब विराट कोहली की फिटनेस वैसी नहीं थी, जैसी आज है। इंटरनेशनल क्रिकेट में कदम रखते ही विराट कोहली ने न केवल स्वयं को बदला, बल्कि आज वह लाखों-लाख युवाओं के लिए फिटनेस को लेकर प्रेरणास्रोत भी बन गए हैं।
36 वर्षीय विराट कोहली की फिटनेस आज भी टीम इंडिया में खेल रहे कई युवा क्रिकेटरों के कहीं बेहतर है।
विराट कोहली ने जगाया लोगों में भरोसा
मास्टर ब्लॉस्टर सचिन तेंदुलकर के क्रिकेट से रिटायरमेंट के बाद यदि भारतीय फैन्स को किसी एक क्रिकेटर पर यह विश्वास रहा है कि अगर वह मैदान पर खड़ा है तो टीम इंडिया जीत सकती है तो वह विराट कोहली ही हैं। विराट कोहली को चेस मास्टर यानी रनों का पीछा करने वाला खिलाड़ी भी कहा जाता है।
उन्होंने टीम इंडिया को कई मुश्किल मैचों में जीत दिलाई है। कई क्रिकेटर तो यह कहते हैं कि विराट कोहली जब मैदान पर होते हैं तो उनके दिमाग में बॉल दर बॉल एक अलग ही कैलकुलेशन चलती है, जो कोई दूसरा क्रिकेटर नहीं कर पता है।
विराट कोहली न केवल खुद खेलते हैं, बल्कि साथी खिलाड़ी को भी वह उसी अंदाज में खिलाते हैं कि टीम अपनी जीत सुनिश्चित कर लेती है।
विराट कोहली केवल एक क्रिकेटर नहीं हैं, वह एक बड़े यूथ आइकॉन भी हैं। वह भारत के बहुत बड़े ब्रांड एंबेसडर हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर भारतीय सेना के डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई तक उनके बहुत बड़े प्रशंसक हैं।
जब ऑपरेशन सिंदूर को लेकर ले. जनरल घई भारतीय सेना की प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे, तब उन्होंने विराट कोहली के रिटायरमेंट की बात कही। इससे पता चलता है कि विराट कोहली की फैन फॉलोइंग कहां तक है?
अपने करियर की शुरुआत में एक इंटरव्यू में विराट कोहली ने कहा था कि वो नास्तिक हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में विराट कोहली का झुकाव अध्यात्म की तरफ झुका है। इसमें उनकी धर्मपत्नी अनुष्का शर्मा का बहुत बड़ा योगदान है। विराट कोहली नीम करोली बाबा के कैंची धाम और वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के सानिध्य में जा चुके हैं।
उज्जैन में महाकाल दर्शन का विराट कोहली का एक वीडिया भी वायरल हुआ था। यदि हम विराट कोहली के टीवी इंटरव्यूज को देखें तो पता चलता है कि वह कितने सुलझे हुए व्यक्ति हैं। क्रिकेट के प्रति उनका समर्पण किसी से छिपा हुआ नहीं है। यह किस्सा तो सभी को पता है कि अपने पिता के अंतिम संस्कार के बाद वह खेलने के लिए मैदान पर उतर गए थे, क्योंकि टीम को उनकी जरूरत थी।
विराट कोहली के रिकॉर्ड्स
विराट कोहली ने 123 टेस्ट मैच खेले हैं, जिनकी 210 इनिंग्स में उन्होंने 9230 रन बनाए हैं, जिनमें 30 शतक और 31 अर्धशतक शामिल हैं। उनका अधिकतम स्कोर 254 रन नाबाद है। टेस्ट क्रिकेट में कोहली ने 121 कैच लिए हैं। वैसे तो किंग कोहली बैट्समैन हैं, लेकिन टेस्ट की 11 इनिंग्स में उन्होंने 175 गेंदें भी फेंकी हैं, लेकिन उन्हें कोई विकेट नहीं मिला है।
यह सत्य है कि विराट कोहली कभी अपने व्यक्तिगत रिकॉर्ड के लिए नहीं खेले। वह एक ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने सदैव टीम स्पिरिट को ऊपर रखा है। यदि व्यक्तिगत रिकॉर्ड के लिए विराट कोहली को खेलना होता तो अभी टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने का समय नहीं था। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने उनसे अनुरोध भी किया कि वह अपने संन्यास पर पुनर्विचार कर लें।
महान क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने एक समय कहा था कि आपको उस समय अपने खेल से संन्यास लेना चाहिए, जब लोग पूछें 'क्यों'? और विराट कोहली ने ऐसा ही किया है। आज लोग पूछ रहे हैं कि आखिर ऐसी जल्दबाजी थी, जो विराट कोहली को संन्यास लेना पड़ा।
अभी इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के दौरान भी कई क्रिकेट विशेषज्ञों ने इस बात को कहा था कि विराट कोहली चाहते तो टी-20 क्रिकेट वर्ष 2027 तक आराम से खेल सकते थे, लेकिन विराट कोहली एक अलग मिट्टी के बने इंसान हैं।
विराट कोहली वर्ष 2011 में वर्ल्ड कप, 2013 व 2025 में चैंपियंस ट्रॉफी और वर्ष 2024 में टी-20 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे हैं। विराट कोहली की कमी न केवल टी-20 क्रिकेट में, बल्कि टेस्ट क्रिकेट में भी फैन्स को खलेगी। उम्मीद तो यही है कि वह भारतीय क्रिकेट से आगे भी जुड़े रहेंगे और युवाओं को मार्गदर्शन देते रहेंगे। नई पीढ़ी के क्रिकेटरों को तैयार करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देते रहेंगे।
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