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कहीं एआई विनाश की गारंटी न बन जाए: साइबर सुरक्षा के लिए वरदान या अभिशाप?
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सार
एंथ्रोपिक का नया क्लाउड मिथोस न केवल मौजूदा मॉडल की तुलना में ज्यादा जटिल सॉफ्टवेयर कोड लिख सकता है, बल्कि दुनिया के सभी लोकप्रिय सॉफ्टवेयर सिस्टम में मौजूद कमजोरियों को भी ज्यादा आसानी से ढूंढ सकता है। अगर यह गलत हाथ में चला गया, तो इसके नतीजे भयावह हो सकते हैं।
एआई
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आमतौर पर, इस समय मैं ईरान के साथ युद्ध के भू-राजनीतिक प्रभावों के बारे में लिख रहा होता, लेकिन फिलहाल मैं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में हुई एक जबर्दस्त प्रगति को उजागर करना चाहता हूं, जो उम्मीद से कहीं पहले ही हुई है, और जिसके भू-राजनीतिक प्रभाव भी उतने ही गहरे और दूरगामी होंगे। एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने घोषणा की है कि वह अपने लार्ज लैंग्वेज मॉडल की सबसे नई पीढ़ी 'क्लाउड मिथोस प्रीव्यू' को जारी कर रही है; लेकिन यह केवल लगभग 40 तकनीकी कंपनियों के एक छोटे समूह के लिए उपलब्ध होगा, जिसमें गूगल, ब्रॉडकॉम, एनवीडिया, सिस्को, पालो एल्टो नेटवर्क्स, एप्पल, जेपीमॉर्गनचेस, अमेजन और माइक्रोसॉफ्ट शामिल हैं। इसके कुछ प्रतिस्पर्धी भी इन साझेदारों में शामिल हैं, क्योंकि यह नया एआई मॉडल प्रदर्शन के मामले में एक 'बड़ा बदलाव' दर्शाता है, जिसके साइबर सुरक्षा और अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण सकारात्मक और नकारात्मक निहितार्थ हैं।
अच्छी खबर यह है कि क्लाउड मिथोस को विकसित करने के दौरान एंथ्रोपिक ने पाया कि यह एआई न केवल अभी उपलब्ध किसी भी मॉडल की तुलना में ज्यादा आसानी से और ज्यादा जटिल सॉफ्टवेयर कोड लिख सकता है, बल्कि यह दुनिया के लगभग सभी सबसे लोकप्रिय सॉफ्टवेयर सिस्टम में मौजूद कमजोरियों को भी पहले से कहीं ज्यादा आसानी से ढूंढ सकता है। बुरी खबर यह है कि अगर यह गलत लोगों के हाथ लग गया, तो वे दुनिया के लगभग हर बड़े सॉफ्टवेयर सिस्टम को हैक कर सकते हैं, जिनमें उस कंसोर्टियम की कंपनियों द्वारा बनाए सभी सिस्टम भी शामिल हैं।
यह कोई पब्लिसिटी स्टंट नहीं है। इस घोषणा से पहले, प्रमुख टेक कंपनियों के प्रतिनिधियों ने ट्रंप प्रशासन के साथ बातचीत की है। इस बातचीत का विषय अमेरिका और उन सभी अन्य देशों की सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव थे, जो अब इन असुरक्षित सॉफ्टवेयर सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं। इसकी एक अच्छी वजह भी है। जैसा कि एंथ्रोपिक ने कहा, पिछले एक महीने में ही, 'मिथोस प्रीव्यू ने हजारों गंभीर कमजोरियों का पता लगाया है, जिनमें हर बड़े ऑपरेटिंग सिस्टम और वेब ब्राउजर में मौजूद कुछ कमजोरियां भी शामिल हैं। एंथ्रोपिक ने इस कंसोर्टियम को 'प्रोजेक्ट ग्लासविंग' नाम दिया है। कंपनी ने बताया कि यह एक ऐसा प्रयास है, जिसके तहत सबसे बड़ी और भरोसेमंद टेक कंपनियों (जिनमें बैंक भी हैं) और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर देने वाली कंपनियों के साथ मिलकर काम किया जाएगा, ताकि 'इन क्षमताओं का इस्तेमाल सुरक्षा के मकसद से किया जा सके।' इसका यह भी मकसद है कि टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अग्रणी कंपनियों को उन कमजोरियों को ढूंढने और उन्हें ठीक करने में शुरुआती बढ़त मिल सके।
मेरी समझ से सुपर-इंटेलिजेंट एआई उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से आ रहा है। हम जानते थे कि यह किसी भी व्यक्ति को सॉफ्टवेयर कोड लिखने में मदद करने के मामले में जबर्दस्त रूप से बेहतर होता जा रहा है। पर बताया जाता है कि एंथ्रोपिक ने भी यह उम्मीद नहीं की थी कि यह मौजूदा कोड में कमियों को ढूंढने और उनका फायदा उठाने के तरीके खोजने में इतनी जल्दी माहिर हो जाएगा। एंथ्रोपिक ने बताया कि उसे हर बड़े ऑपरेटिंग सिस्टम और वेब ब्राउजर में गंभीर कमियां मिली हैं, जिनमें से कई दुनिया भर में पावर ग्रिड, जल संयंत्र, एयरलाइन रिजर्वेशन सिस्टम, रिटेल नेटवर्क, सैन्य सिस्टम और अस्पताल चलाते हैं।
अगर यह एआई उपकरण सचमुच बड़े पैमाने पर उपलब्ध हो जाता है, तो इसका मतलब होगा कि किसी भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर सिस्टम को हैक करने की क्षमता (जो कभी सिर्फ निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों और खुफिया एजेंसियों का ही काम हुआ करती थी, और जिसमें काफी मेहनत और पैसा लगता था) अब हर अपराधी, आतंकवादी संगठन और देश के लिए उपलब्ध होगी, चाहे वह कितना भी छोटा क्यों न हो। मैं कोई अतिशयोक्ति नहीं कर रहा हूं, जब कहता हूं कि बच्चे गलती से इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। मम्मी-पापा, तैयार हो जाइए : ‘बेटा, आज स्कूल के बाद तुमने क्या किया?’‘मम्मी, मैंने और मेरे दोस्तों ने मिलकर बिजली ग्रिड उड़ा दिया। आज रात के खाने में क्या है?’
इसीलिए एंथ्रोपिक प्रमुख सॉफ्टवेयर प्रदाताओं को सावधानीपूर्वक नियंत्रित संस्करण दे रहा है, ताकि वे अपराधियों या आपके बच्चों के ऐसा करने से पहले ही कमियों को ढूंढकर ठीक कर सकें। दुनिया का कोई भी देश अकेले इस समस्या को हल नहीं कर सकता। इसका समाधान उन दो एआई महाशक्तियों, अमेरिका और चीन से ही शुरू होना चाहिए। अब यह बेहद जरूरी है कि वे आपस में सहयोग करना सीखें, ताकि बुरे इरादे रखने वाले लोग साइबर क्षमताओं के इस अगले स्तर तक पहुंच न बना सकें। ऐसा शक्तिशाली हथियार उन दोनों के लिए खतरा बन जाएगा, जिससे वे अपने देशों के भीतरी और बाहरी आतंकी समूहों तथा अन्य विरोधियों के सामने असुरक्षित हो जाएंगे। यह हर देश के लिए अमेरिका-चीन के आपसी खतरे से भी कहीं बड़ा खतरा बन सकता है। सच तो यह है कि यह एक ऐसा बुनियादी और अहम मोड़ साबित हो सकता है, जैसा कि 'आपसी विनाश की गारंटी' और 'परमाणु अप्रसार' की जरूरत के उभरने के समय था। अमेरिका और चीन को मिलकर काम करना होगा, ताकि वे खुद को और बाकी दुनिया को उन इन्सानों और स्वायत्त एआई से बचा सकें, जो इस तकनीकी का इस्तेमाल कर रहे हैं। अगले महीने बीजिंग में ट्रंप और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाले शिखर सम्मेलन के एजेंडे में इसे सबसे ऊपर रखा जाना चाहिए।
मुंडी का तर्क है कि जिम्मेदार सरकारों को (उन कंपनियों के साथ मिलकर, जो ये एआई टूल्स और सॉफ्टवेयर इंफ्रास्ट्रक्चर बनाती हैं) तीन काम तुरंत करने की जरूरत है। शुरुआत के तौर पर हमें 'इन नए सुपर-इंटेलिजेंट मॉडल्स की रिलीज को सावधानीपूर्वक नियंत्रित करने और यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि वे केवल सबसे जिम्मेदार सरकारों और कंपनियों तक ही पहुंचें। इसके बाद, हमें इस मिले हुए समय का इस्तेमाल करके 'अच्छे लोगों' को सुरक्षा के साधन उपलब्ध कराने होंगे, 'ताकि उनके मुख्य इंफ्रास्ट्रक्चर के सॉफ्टवेयर की सभी कमियों को, हैकर्स से पहले ही, ढूंढकर ठीक किया जा सके।' अंत में, मुंडी का तर्क है कि हमें चीन और सभी जिम्मेदार देशों के साथ मिलकर काम करना होगा, ताकि सभी प्रमुख नेटवर्कों (चाहे वे सार्वजनिक हों या निजी) के भीतर सुरक्षित और संरक्षित कार्य-क्षेत्र बनाए जा सकें, ताकि वे भविष्य में होने वाले हैकिंग हमलों से सुरक्षित रह सकें।
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अच्छी खबर यह है कि क्लाउड मिथोस को विकसित करने के दौरान एंथ्रोपिक ने पाया कि यह एआई न केवल अभी उपलब्ध किसी भी मॉडल की तुलना में ज्यादा आसानी से और ज्यादा जटिल सॉफ्टवेयर कोड लिख सकता है, बल्कि यह दुनिया के लगभग सभी सबसे लोकप्रिय सॉफ्टवेयर सिस्टम में मौजूद कमजोरियों को भी पहले से कहीं ज्यादा आसानी से ढूंढ सकता है। बुरी खबर यह है कि अगर यह गलत लोगों के हाथ लग गया, तो वे दुनिया के लगभग हर बड़े सॉफ्टवेयर सिस्टम को हैक कर सकते हैं, जिनमें उस कंसोर्टियम की कंपनियों द्वारा बनाए सभी सिस्टम भी शामिल हैं।
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यह कोई पब्लिसिटी स्टंट नहीं है। इस घोषणा से पहले, प्रमुख टेक कंपनियों के प्रतिनिधियों ने ट्रंप प्रशासन के साथ बातचीत की है। इस बातचीत का विषय अमेरिका और उन सभी अन्य देशों की सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव थे, जो अब इन असुरक्षित सॉफ्टवेयर सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं। इसकी एक अच्छी वजह भी है। जैसा कि एंथ्रोपिक ने कहा, पिछले एक महीने में ही, 'मिथोस प्रीव्यू ने हजारों गंभीर कमजोरियों का पता लगाया है, जिनमें हर बड़े ऑपरेटिंग सिस्टम और वेब ब्राउजर में मौजूद कुछ कमजोरियां भी शामिल हैं। एंथ्रोपिक ने इस कंसोर्टियम को 'प्रोजेक्ट ग्लासविंग' नाम दिया है। कंपनी ने बताया कि यह एक ऐसा प्रयास है, जिसके तहत सबसे बड़ी और भरोसेमंद टेक कंपनियों (जिनमें बैंक भी हैं) और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर देने वाली कंपनियों के साथ मिलकर काम किया जाएगा, ताकि 'इन क्षमताओं का इस्तेमाल सुरक्षा के मकसद से किया जा सके।' इसका यह भी मकसद है कि टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अग्रणी कंपनियों को उन कमजोरियों को ढूंढने और उन्हें ठीक करने में शुरुआती बढ़त मिल सके।
मेरी समझ से सुपर-इंटेलिजेंट एआई उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से आ रहा है। हम जानते थे कि यह किसी भी व्यक्ति को सॉफ्टवेयर कोड लिखने में मदद करने के मामले में जबर्दस्त रूप से बेहतर होता जा रहा है। पर बताया जाता है कि एंथ्रोपिक ने भी यह उम्मीद नहीं की थी कि यह मौजूदा कोड में कमियों को ढूंढने और उनका फायदा उठाने के तरीके खोजने में इतनी जल्दी माहिर हो जाएगा। एंथ्रोपिक ने बताया कि उसे हर बड़े ऑपरेटिंग सिस्टम और वेब ब्राउजर में गंभीर कमियां मिली हैं, जिनमें से कई दुनिया भर में पावर ग्रिड, जल संयंत्र, एयरलाइन रिजर्वेशन सिस्टम, रिटेल नेटवर्क, सैन्य सिस्टम और अस्पताल चलाते हैं।
अगर यह एआई उपकरण सचमुच बड़े पैमाने पर उपलब्ध हो जाता है, तो इसका मतलब होगा कि किसी भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर सिस्टम को हैक करने की क्षमता (जो कभी सिर्फ निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों और खुफिया एजेंसियों का ही काम हुआ करती थी, और जिसमें काफी मेहनत और पैसा लगता था) अब हर अपराधी, आतंकवादी संगठन और देश के लिए उपलब्ध होगी, चाहे वह कितना भी छोटा क्यों न हो। मैं कोई अतिशयोक्ति नहीं कर रहा हूं, जब कहता हूं कि बच्चे गलती से इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। मम्मी-पापा, तैयार हो जाइए : ‘बेटा, आज स्कूल के बाद तुमने क्या किया?’‘मम्मी, मैंने और मेरे दोस्तों ने मिलकर बिजली ग्रिड उड़ा दिया। आज रात के खाने में क्या है?’
इसीलिए एंथ्रोपिक प्रमुख सॉफ्टवेयर प्रदाताओं को सावधानीपूर्वक नियंत्रित संस्करण दे रहा है, ताकि वे अपराधियों या आपके बच्चों के ऐसा करने से पहले ही कमियों को ढूंढकर ठीक कर सकें। दुनिया का कोई भी देश अकेले इस समस्या को हल नहीं कर सकता। इसका समाधान उन दो एआई महाशक्तियों, अमेरिका और चीन से ही शुरू होना चाहिए। अब यह बेहद जरूरी है कि वे आपस में सहयोग करना सीखें, ताकि बुरे इरादे रखने वाले लोग साइबर क्षमताओं के इस अगले स्तर तक पहुंच न बना सकें। ऐसा शक्तिशाली हथियार उन दोनों के लिए खतरा बन जाएगा, जिससे वे अपने देशों के भीतरी और बाहरी आतंकी समूहों तथा अन्य विरोधियों के सामने असुरक्षित हो जाएंगे। यह हर देश के लिए अमेरिका-चीन के आपसी खतरे से भी कहीं बड़ा खतरा बन सकता है। सच तो यह है कि यह एक ऐसा बुनियादी और अहम मोड़ साबित हो सकता है, जैसा कि 'आपसी विनाश की गारंटी' और 'परमाणु अप्रसार' की जरूरत के उभरने के समय था। अमेरिका और चीन को मिलकर काम करना होगा, ताकि वे खुद को और बाकी दुनिया को उन इन्सानों और स्वायत्त एआई से बचा सकें, जो इस तकनीकी का इस्तेमाल कर रहे हैं। अगले महीने बीजिंग में ट्रंप और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाले शिखर सम्मेलन के एजेंडे में इसे सबसे ऊपर रखा जाना चाहिए।
मुंडी का तर्क है कि जिम्मेदार सरकारों को (उन कंपनियों के साथ मिलकर, जो ये एआई टूल्स और सॉफ्टवेयर इंफ्रास्ट्रक्चर बनाती हैं) तीन काम तुरंत करने की जरूरत है। शुरुआत के तौर पर हमें 'इन नए सुपर-इंटेलिजेंट मॉडल्स की रिलीज को सावधानीपूर्वक नियंत्रित करने और यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि वे केवल सबसे जिम्मेदार सरकारों और कंपनियों तक ही पहुंचें। इसके बाद, हमें इस मिले हुए समय का इस्तेमाल करके 'अच्छे लोगों' को सुरक्षा के साधन उपलब्ध कराने होंगे, 'ताकि उनके मुख्य इंफ्रास्ट्रक्चर के सॉफ्टवेयर की सभी कमियों को, हैकर्स से पहले ही, ढूंढकर ठीक किया जा सके।' अंत में, मुंडी का तर्क है कि हमें चीन और सभी जिम्मेदार देशों के साथ मिलकर काम करना होगा, ताकि सभी प्रमुख नेटवर्कों (चाहे वे सार्वजनिक हों या निजी) के भीतर सुरक्षित और संरक्षित कार्य-क्षेत्र बनाए जा सकें, ताकि वे भविष्य में होने वाले हैकिंग हमलों से सुरक्षित रह सकें।

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