सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Belt and Road Initiative aka BRI Brazil and China not on same page know implications

कूटनीति: बीआरआई से ब्राजील के मोहभंग के मायने... वैकल्पिक बुनियादी ढांचे और निवेश का रास्ता खुल सकता है

K S Tomar केएस तोमर
Updated Mon, 04 Nov 2024 04:34 AM IST
विज्ञापन
सार
बीआरआई चीन की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिससे ब्राजील के बाहर निकलने से अन्य देश भी चीन के साथ अपनी साझेदारी को लेकर सतर्क हो सकते हैं। ऐसे में चीन को जहां उदार शर्तों की पेशकश करनी पड़ सकती है, वहीं पश्चिमी देशों को फायदा हो सकता है।
loader
Belt and Road Initiative aka BRI Brazil and China not on same page know implications
ब्राजील और चीन के बीच दूरियां बढ़ने के संकेत (प्रतीकात्मक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

महाशक्ति देश के रूप में अमेरिका की जगह लेने की अपनी महत्वाकांक्षी योजना के तहत चीन ने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के जरिये 2024 तक 150 से अधिक देशों में करीब 10 खरब डॉलर का निवेश किया है, जिसका उद्देश्य एशिया, यूरोप, अफ्रीका और अन्य जगहों पर बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी का विकास करके वैश्विक व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ाना है। ऐसे में ब्राजील का फैसला बुनियादी ढांचे और आर्थिक प्रभाव की वैश्विक भू-राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। सबसे बड़ी लैटिन अमेरिकी अर्थव्यवस्थाओं में से एक ब्राजील का बीआरआई से मोहभंग संभावित संदेह और विकासशील देशों में चीनी निवेश के प्रति बदलते दृष्टिकोण का संकेत है।


भारत अपनी सुरक्षा चिंताओं के कारण बीआरआई का विरोध करता है। बीआरआई की बुनियादी ढांचा परियोजनाएं भारत के पड़ोस में चीन के प्रभाव को भी बढ़ाती हैं, जिससे दक्षिण एशिया, हिंद महासागर और उससे आगे तक इसकी रणनीतिक पहुंच बढ़ती है, जो संभावित रूप से भारत को घेरती है। बीआरआई के तहत बनाए गए प्रमुख बंदरगाहों और राजमार्गों पर चीनी सैन्य उपस्थिति में वृद्धि भारत के क्षेत्रीय प्रभुत्व को खतरे में डालती है और सुरक्षा जोखिम को बढ़ाती है। इसके अलावा, बीआरआई की ऋण-जाल कूटनीति पड़ोसी देशों के बीच आर्थिक निर्भरता की आशंका पैदा करती है, जिससे भारत का क्षेत्रीय प्रभाव और सुरक्षा कमजोर होती है।


विश्व बैंक ने अपने विश्लेषण में बीआरआई के भागीदार देशों में बढ़ते कर्ज के बोझ, परियोजनाओं में देरी और अस्थिर वित्तीय मॉडल की ओर इशारा किया है। बीआरआई को कई देशों में विफलताओं का सामना करना पड़ा है, जिनमें श्रीलंका और पाकिस्तान शामिल हैं, जो कर्ज चुकाने और चीनी-वित्तपोषित परियोजनाओं के चलते आर्थिक तनाव से जूझ रहे हैं। सीमित स्थानीय लाभ, भू-राजनीतिक चिंताएं और चीनी कंपनियों पर निर्भरता जैसे मुद्दों ने देशों को पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सुधारों के बिना, बीआरआई में कम लाभ और भागीदार देशों में संदेह बढ़ने का जोखिम है, जिससे इसकी दीर्घकालिक व्यवहार्यता को खतरा है। वर्ष 2019 में इसमंे शामिल होने वाला इटली आर्थिक लाभ की उम्मीद कर रहा था, लेकिन वह साकार नहीं हुआ, क्योंकि चीन को इतालवी निर्यात ठहर गया, जबकि चीनी आयात बढ़ गया। अब इटली भी बीआरआई से बाहर निकलने की तैयारी कर रहा है।

दक्षिण एशिया में पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे शुरुआती बीआरआई साझेदार भी पीछे हट रहे हैं। ये बदलाव बीआरआई की वित्तीय और रणनीतिक लागतों के बारे में बढ़ते संदेह को दर्शाते हैं, क्योंकि राष्ट्र अपनी अर्थव्यवस्थाओं पर चीन के प्रभाव को लेकर तेजी से सतर्क हो रहे हैं। बीआरआई ने विशेष रूप से दक्षिण एशिया, अफ्रीका और पूर्वी यूरोप जैसे क्षेत्रों में ऋण स्थिरता और भू-राजनीतिक प्रभाव के बारे में चिंताएं पैदा की हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ब्राजील का बीआरआई से अलग होना पश्चिमी शक्तियों, विशेष रूप से अमेरिका के साथ उसके रणनीतिक पुनर्गठन के साथ-साथ ऋण निर्भरता और भू-राजनीतिक प्रभाव को लेकर चिंताओं से उपजा है। राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा ने चीन पर बहुत अधिक निर्भर रहने के बजाय विविध निवेश स्रोतों की ओर अधिक झुकाव दिखाया है, क्योंकि उन्हें डर है कि बीआरआई भागीदारी ब्राजील के अपने प्रमुख संसाधनों पर संप्रभुता को सीमित कर सकती है। उनकी विदेश नीति अब बहुपक्षवाद और क्षेत्रीय सहयोग पर जोर देती है, जो चीन के प्रति उसके सतर्क दृष्टिकोण को उजागर करती है।

इसके अलावा, पर्यावरणीय कारणों ने भी इसमें भूमिका निभाई होगी। ब्राजील के नीति निर्माताओं और पर्यावरणविदों का तर्क है कि बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा परियोजनाएं पारिस्थितिकी तंत्र को बाधित कर सकती हैं, खासकर अमेजन में। ब्राजील सतत विकास के लिए जोर दे रहा है, और उसे चिंता है कि बीआरआई के तहत परियोजनाएं कड़े पर्यावरणीय मानकों का पालन नहीं कर सकती हैं।

बीआरआई सहायता पर निर्भर विकासशील देशों के लिए ब्राजील का फैसला चीन के साथ साझेदारी के मूल्यांकन के लिए मिसाल बन सकता है। बीआरआई ऋण से दबे देश अपनी वित्तीय संप्रभुता को जोखिम में डाले बिना ऋण चुकाने की अपनी क्षमता के बारे में चिंतित हैं। ब्राजील के निर्णय से यह साफ है कि उनके पास विविध वित्तपोषण स्रोतों की तलाश का विकल्प है, संभवतः पश्चिमी सहयोगियों से कम ब्याज दर वाले ऋण, अनुदान और बिना शर्त तकनीकी सहायता। ऋण के बोझ से दबे देश फिर से शर्तों पर बातचीत कर सकते हैं या अधिक संतुलित रुख अपना सकते हैं, जिसमें  पश्चिमी, जापानी या विश्व बैंक या एशियाई विकास बैंक जैसे बहुपक्षीय निवेश स्रोत शामिल हैं। इससे चीन पर निर्भरता कम हो सकती है और यह भी सुनिश्चित हो सकता है कि बुनियादी ढांचे का विकास पटरी पर बना रहे।

ब्राजील के इस कदम से जिन देशों ने शुरू में उत्साह के साथ बीआरआई में भाग लिया था, वे अधिक सतर्क दृष्टिकोण अपनाने या अपने दीर्घकालिक हितों के लिए अधिक अनुकूल शर्तों पर बातचीत करने के लिए प्रेरित हो सकते हैं। इसके जवाब में चीन और भी देशों को रोकने के लिए अधिक उदार शर्तों की पेशकश कर सकता है या देशों की विशिष्ट विकासात्मक जरूरतों के लिए परियोजनाओं को तैयार कर सकता है। यदि अधिक देश ब्राजील के उदाहरण का अनुसरण करते हैं, तो चीन को संभवतः बीआरआई को कम करने या वैश्विक चिंताओं को देखते हुए इसे अधिक पारदर्शी बनाने की आवश्यकता हो सकती है। चीन ने पहले ही कुछ अनुकूलनशीलता दिखाई है  और 'बीआरआई 2.0' चरण की शुरुआत की है, जो पर्यावरणीय प्रभाव और ऋण जोखिमों पर आलोचनाओं के जवाब में टिकाऊ और हरित विकास पर केंद्रित है।

ब्राजील के बीआरआई से बाहर निकलने से अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य पश्चिमी सहयोगियों के नेतृत्व में वैकल्पिक बुनियादी ढांचे के रूप में निवेश पहलों के लिए रास्ता खुल सकता है। ऐसे विश्व में, जहां भू-राजनीतिक गठबंधन लगातार बदल रहे हैं, ब्राजील का निर्णय वैश्विक बुनियादी ढांचे की दौड़ में एक नए चरण की शुरुआत कर सकता है, जो एकतरफा महत्वाकांक्षाओं की तुलना में राष्ट्रीय हितों और सतत विकास को प्राथमिकता देता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Trending Videos
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed