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जीवाश्म ईंधन से मुक्ति की राह पर भारत: ऊर्जा सुरक्षा का नया आधार है रेलवे का विद्युतीकरण

Seema Javed सीमा जावेद
Updated Fri, 13 Mar 2026 07:26 AM IST
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सार

अपने रेलवे नेटवर्क को विद्युतीकृत करके भारत विश्व को संदेश दे रहा है कि अपने बुनियादी ढांचे को जलवायु परिवर्तन अनुकूल बनाने से वह ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से भी मजबूत होगा।

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रेलवे नेटवर्क का विद्युतीकरण - फोटो : ANI
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विस्तार

ऊर्जा और युद्ध मौलिक तथा ऐतिहासिक रूप से परस्पर संबंधित हैं। औद्योगिक क्रांति के बाद से, ऊर्जा संसाधनों ने युद्ध शुरू और इसे संचालित करने, दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। चाहे वह रूस व यूक्रेन के बीच का युद्ध हो या फिर इन दिनों चल रहा ईरान, इस्राइल और अमेरिका के बीच का टकराव। पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, एक बार फिर याद दिलाता है कि तेल और गैस पर निर्भर दुनिया असुरक्षित है। भारत भी इससे अलग नहीं है। देश अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है और उसका बड़ा हिस्सा होर्मुज जलमार्ग से होकर आता है। इस ऊर्जा असुरक्षा के दौर में भारतीय रेलवे अब लगभग पूरी तरह बिजली से चलने की दहलीज पर है। वर्तमान में, भारतीय रेलवे के ब्रॉड गेज नेटवर्क का 99.4 फीसदी हिस्सा विद्युतीकृत हो चुका है।  
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लंबे समय तक चलने वाले भू-राजनीतिक तनाव ऊर्जा सुरक्षा में गंभीर बाधाएं उत्पन्न कर सकते हैं। 2020 में, चीन द्वारा ऑस्ट्रेलिया पर लगाए गए अनौपचारिक कोयला आयात प्रतिबंध के कारण कीमतों में भारी उछाल आया और वैश्विक आपूर्ति शृंखला बाधित हुई। 2022 में, यूक्रेन-रूस विवाद के कारण यूरोपीय संघ को अपनी आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लानी पड़ी, जिससे कई दक्षिण एशियाई और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के लिए कोयले की कीमतें इतनी बढ़ गईं कि वे बाजार से बाहर हो गए। और अब 2026 में, होर्मुज जलमार्ग के जरिये वैश्विक तेल व गैस आपूर्ति का 20 फीसदी हिस्सा बाधित हो गया है। एक ऐसे क्षेत्र में तनाव, जो वैश्विक तेल उत्पादन का लगभग एक-तिहाई और प्राकृतिक गैस का लगभग पांचवां हिस्सा है, एशिया तथा यूरोप में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा कर सकता है। नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रिफिकेशन (विद्युतीकरण) इस तरह के हर भू-राजनीतिक उथल-पुथल के खिलाफ एक मजबूत सुरक्षा कवच का काम करते हैं। इसलिए, नवीकरणीय ऊर्जा पर अधिकाधिक निर्भरता सभी देशों के लिए भविष्य का मार्ग है, विशेष रूप से यूरोपीय संघ और एशिया में, जीवाश्म ईंधनों से होने वाले जोखिमों को कम करने में मदद मिलती है।
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सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 में रेलवे ने विद्युतीकरण करके करीब 178 करोड़ लीटर डीजल की बचत की। 2016-17 की तुलना में इसकी डीजल इस्तेमाल में करीब 62 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसका मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के झटकों का असर कम होगा। भारत के लगभग 40 प्रतिशत कच्चे तेल और 20 प्रतिशत एलएनजी आयात होर्मुज जलमार्ग से होकर गुजरते हैं। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और होर्मुज जलमार्ग बंद होने की वजह से इन दिनों भारत की ऊर्जा निर्भरता चर्चा में है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो तेल की कीमतों के साथ बीमा लागत और आपूर्ति जोखिम भी तेजी से बढ़ सकते हैं। ऐसे में भारतीय रेलवे का बिजली पर चलना भारत के लिए एक तरह का सुरक्षा कवच है। पिछले दशक में रेलवे ने अपने नेटवर्क में सौर ऊर्जा को भी तेजी से जोड़ा है।

रेल नेटवर्क में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग पर काम करने वाली ब्रिटेन की संस्था राइडिंग सनबीम पिछले कुछ वर्षों से भारत के रेलवे बदलाव पर नजर रख रही है। संस्था के सीईओ लियो मरे कहते हैं कि अपने रेलवे नेटवर्क को विद्युतीकृत करके भारत दुनिया को यह संदेश दे रहा है कि अपने बुनियादी ढांचे को जलवायु परिवर्तन अनुकूल बनाने पर वह ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से भी मजबूत होगा।
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