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ट्रंप की अपील: होर्मुज पर सहयोगी देशों की ठंडी प्रतिक्रिया, सैन्य नहीं कूटनीति ही बनेगी समाधान का रास्ता

अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: Devesh Tripathi Updated Wed, 18 Mar 2026 05:43 AM IST
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सार
होर्मुज मार्ग को सुरक्षित बनाने में सहयोग की अमेरिकी अपील पर सहयोगी देशों ने जैसी ठंडी प्रतिक्रिया दी है, उस पर ट्रंप की निराशा वर्तमान वैश्विक कूटनीतिक यथार्थ का महत्वपूर्ण संकेतक है। होर्मुज को खोलने के लिए सैन्य बल से ज्यादा जरूरी यह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय संवाद-उन्मुख हो।
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Donald Trump appeal allies lukewarm response Hormuz issue diplomacy not military will be way to resolve
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : ANI

विस्तार

दूसरे देशों से युद्धपोत और नौसैनिक बलों को भेजकर होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग को सुरक्षित बनाने में सहयोग करने की अमेरिकी अपील पर मिली ठंडी प्रतिक्रिया के बाद राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा व्यक्त की गई निराशा आज के वैश्विक शक्ति संतुलन और कूटनीतिक यथार्थ का महत्वपूर्ण संकेतक है। उल्लेखनीय है कि फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाले इस संकरे समुद्री मार्ग से वैश्विक तेल कारोबार का करीब 20 फीसदी हिस्सा गुजरता है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार के लिए इस मार्ग की अहमियत इससे ही समझी जा सकती है कि वर्तमान पश्चिम एशिया संघर्ष की शुरुआत में इस मार्ग में अड़चन आने की आशंका पैदा होने के साथ ही वैश्विक तेल बाजार में तेल की कीमत सौ डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई। हालांकि, ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि अमेरिका के लिए होर्मुज का प्रश्न उतना अहम नहीं है, क्योंकि उसके पास तेल तक अपनी पहुंच है। इसके बावजूद, ट्रंप की सहयोग की अपील को, चीन और जापान के अलावा ब्रिटेन, जर्मनी, स्पेन, इटली, ग्रीस व दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने खारिज किया, तो इसकी वजह समझी जा सकती है। असल में, ट्रंप की एक खास किस्म की अनिश्चितता उन देशों को भी उनसे दूर कर रही है, जो अब तक भले ही अनिच्छापूर्वक, लेकिन उनके साथ खड़े थे। जहां तक यूरोपीय देशों की बात है, उनमें से ज्यादातर अपनी घरेलू राजनीतिक बाध्यताओं से जूझ रहे हैं। यूक्रेन युद्ध की वजह से इन देशों के संसाधनों पर जो दबाव पड़ा है, उससे यहां युद्ध विरोधी भावनाएं और सैन्य हस्तक्षेप के प्रति संदेह बढ़ा है, और इसीलिए वे किसी नए सैन्य अभियान में शामिल होने से हिचकिचा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, विश्व के अन्य देशों में अमेरिकी विदेश नीति को लेकर संशय तो बढ़ा ही है, कोई भी देश पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल होकर अपनी सुरक्षा व आर्थिक हितों को जोखिम में नहीं डालना चाहता। वैश्विक व्यवस्था के लिहाज से यह स्थिति जटिलता बढ़ाने वाली ही है कि खुद अमेरिका अपने सहयोगियों को ऐसी लड़ाई में खींचने की कोशिश कर रहा है, जिससे वे बचना चाहते हैं। अब ट्रंप यह कहने को मजबूर हुए हैं कि उन्हें किसी की जरूरत नहीं, लेकिन यह पूरा प्रकरण अंतरराष्ट्रीय संबंधों के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण सबक है। यह स्थिति अमेरिका की एकध्रुवीय शक्ति के युग के कमजोर होने का भी संकेत है, जब सहयोगी बिना सवाल उठाए अमेरिकी आदेशों का पालन नहीं कर रहे। यह समय है, जब सभी पक्ष कूटनीति की ओर लौटें। युद्ध विनाश और तबाही ही फैलाते हैं। होर्मुज को खोलने के लिए सैन्य बल से ज्यादा जरूरी यह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय संवाद-उन्मुख हो।
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