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IND vs ENG: 'रोहित ने कभी किसी को दोष नहीं दिया', क्या अभिषेक नायर ने श्रेयस पर साधा निशाना? जानें क्या कहा
Sat, 11 Jul 2026 04:51 PM IST
शोभित चतुर्वेदी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Sat, 11 Jul 2026 04:51 PM IST
सार
पूर्व कोच अभिषेक नायर के अनुसार, रोहित शर्मा हार की जिम्मेदारी खुद लेते थे और कभी खिलाड़ियों को दोष नहीं देते थे। दरअसल श्रेयस अय्यर की कप्तानी में भारत लगातार मैच हार रहा है। श्रेयस कुछ मौकों पर हार का दोष अन्य खिलाड़ियों को दे चुके हैं।
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अभिषेक नायर
- फोटो : PTI
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विस्तार
भारतीय टीम के पूर्व कोच अभिषेक नायर ने एक बड़ा बयान देते हुए बताया है कि कैसे मुश्किल समय में भी रोहित शर्मा की साफ और स्पष्ट बातचीत टीम के माहौल को खुशहाल बनाए रखती थी। साल 2024 में गौतम गंभीर के कोचिंग स्टाफ के तहत आठ महीनों के कार्यकाल के दौरान सहायक कोच रहे नायर ने कहा कि रोहित ने कभी भी बाहर आकर किसी खिलाड़ी को दोष नहीं दिया और हार की ज़िम्मेदारी हमेशा अपने सिर ली।
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श्रेयस की कप्तानी पर उठ रहे सवाल
अभिषेक नायर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब श्रेयस अय्यर की कप्तानी पर सवाल उठ रहे हैं। अय्यर की अगुआई में टीम इंडिया को आयरलैंड के खिलाफ 0-2 से क्लीन स्वीप का सामना करना पड़ा और इंग्लैंड के खिलाफ भी टीम पांच मैचों की सीरीज में 0-3 से पीछे चल रही है। हालांकि श्रेयस ने बल्ले से अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन कमजोर मध्यक्रम, खराब फील्डिंग और टीम चयन की गलतियों ने उनका काम मुश्किल कर दिया है। लेकिन पंजाब किंग्स के कप्तान ने अपने तीखे बयानों से खुद की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। उन्होंने दूसरे टी20 में हार के लिए अप्रत्यक्ष रूप से रवि बिश्नोई को जिम्मेदार ठहराया था और अन्य मैचों में भी अलग-अलग खिलाड़ियों को उनके गुस्से का सामना करना पड़ा है।
अभिषेक नायर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब श्रेयस अय्यर की कप्तानी पर सवाल उठ रहे हैं। अय्यर की अगुआई में टीम इंडिया को आयरलैंड के खिलाफ 0-2 से क्लीन स्वीप का सामना करना पड़ा और इंग्लैंड के खिलाफ भी टीम पांच मैचों की सीरीज में 0-3 से पीछे चल रही है। हालांकि श्रेयस ने बल्ले से अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन कमजोर मध्यक्रम, खराब फील्डिंग और टीम चयन की गलतियों ने उनका काम मुश्किल कर दिया है। लेकिन पंजाब किंग्स के कप्तान ने अपने तीखे बयानों से खुद की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। उन्होंने दूसरे टी20 में हार के लिए अप्रत्यक्ष रूप से रवि बिश्नोई को जिम्मेदार ठहराया था और अन्य मैचों में भी अलग-अलग खिलाड़ियों को उनके गुस्से का सामना करना पड़ा है।
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नायर ने रोहित की कप्तानी को किया याद
नायर ने रोहित शर्मा के कप्तानी के दौर को याद करते हुए कहा, हमारे पास कप्तान के रूप में रोहित शर्मा थे और मुझे याद है कि मुंबई टेस्ट के बाद उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आकर कहा था 'कोई बात नहीं। हमने बहुत सारी सीरीज जीती हैं, हम यह वाली हार गए और मैं इसकी जिम्मेदारी लेता हूं। रोहित ऐसे ही थे। उनमें हमेशा एक ऐसा गुण था जिससे वह माहौल को हल्का कर देते थे और यह सुनिश्चित करते थे कि टीम ठीक रहे। बेशक, जब भी भारत हारता है तो सबको दर्द होता है। लेकिन एक चीज जो वह सबसे बेहतरीन करते थे, वो थी अपने खिलाड़ियों का ख्याल रखना।
नायर ने कहा, रोहित इस बात पर ध्यान देते थे कि कौन सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है, किसने रन नहीं बनाए हैं और वह उन्हें कैसे बेहतर महसूस करा सकते हैं। रोहित की जिस खूबी की मैं सबसे ज्यादा इज्जत करता था, वह यह थी कि वह हमेशा जिम्मेदारी खुद लेते थे। वह कभी बाहर आकर यह नहीं कहते थे कि तुमने यह किया या तुमने वह किया। इसके बजाय, वह अपना हाथ उठाते थे और कहते थे कि मैं असफल रहा। आप कभी उन्हें बहाने बनाते या किसी को बलि का बकरा बनाते नहीं सुनेंगे।
नायर ने रोहित शर्मा के कप्तानी के दौर को याद करते हुए कहा, हमारे पास कप्तान के रूप में रोहित शर्मा थे और मुझे याद है कि मुंबई टेस्ट के बाद उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आकर कहा था 'कोई बात नहीं। हमने बहुत सारी सीरीज जीती हैं, हम यह वाली हार गए और मैं इसकी जिम्मेदारी लेता हूं। रोहित ऐसे ही थे। उनमें हमेशा एक ऐसा गुण था जिससे वह माहौल को हल्का कर देते थे और यह सुनिश्चित करते थे कि टीम ठीक रहे। बेशक, जब भी भारत हारता है तो सबको दर्द होता है। लेकिन एक चीज जो वह सबसे बेहतरीन करते थे, वो थी अपने खिलाड़ियों का ख्याल रखना।
नायर ने कहा, रोहित इस बात पर ध्यान देते थे कि कौन सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है, किसने रन नहीं बनाए हैं और वह उन्हें कैसे बेहतर महसूस करा सकते हैं। रोहित की जिस खूबी की मैं सबसे ज्यादा इज्जत करता था, वह यह थी कि वह हमेशा जिम्मेदारी खुद लेते थे। वह कभी बाहर आकर यह नहीं कहते थे कि तुमने यह किया या तुमने वह किया। इसके बजाय, वह अपना हाथ उठाते थे और कहते थे कि मैं असफल रहा। आप कभी उन्हें बहाने बनाते या किसी को बलि का बकरा बनाते नहीं सुनेंगे।