Uttarakhand: धधक रहे जंगल, वन महकमे का हाल, पांच साल की कार्ययोजना बनाई पर काम शुरू करने की नहीं आई याद
वनाग्नि से निपटने के लिए वन विभाग ने पांच साल की कार्ययोजना बनाई। लेकिन काम शुरू करने की याद ही नहीं रही।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जंगल की आग में सैकड़ों हेक्टेयर में वन संपदा खाक हो रही है। पर वनाग्नि नियंत्रण के लिए पांच साल की कार्ययोजना बनी है, उस पर कार्य शुरू नहीं हो सका है। वहीं, सर्दियों में वनाग्नि चुनौती बनी है पर इसको लेकर भी कोई ठोस कार्य योजना महकमे के पास नहीं है।
वर्ष-2024 में जंगल की आग की घटनाएं काफी हुई थी। इसी वर्ष बिनसर अभयारण्य समेत अन्य जगह पर जंगल की आग की चपेट में आने में कई वन कर्मियों और लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद वन विभाग ने वनाग्नि नियंत्रण के लिए पांच साल की विस्तृत कार्य योजना बनाई गई।
सूत्रों के अनुसार इसमें जंगल की आग की घटनाओं से पहले की तैयारी, वनाग्नि की घटनाओं के समय उठाए जाने वाले कदमों के बारे में उल्लेख किया गया था। साथ ही जहां पर जंगल की आग लगने की घटनाएं हुई, वहां पर हरियाली वापस लाने की योजना का भी उल्लेख किया गया था।
इसके अलावा जंगल की आग की घटनाओं के कारणों को जानने को लेकर अध्ययन करने की बात थी। इसके बाद योजना को पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेजा गया। इन कार्यों के लिए चार सौ करोड़ मांग की गई थी। पर कई साल हो गए हैं, पर इस कार्ययोजना पर कोई काम शुरू ही नहीं हो सका है।
सर्दियाें में जंगल की आग को लेकर कोई योजना नहीं
देहरादून। वन विभाग हर साल गर्मियों में वनाग्नि की घटनाओं को लेकर तैयारी करता है। इसमें कंट्रोल बर्निंग से लेकर 15 फरवरी से 15 जून तक फायर सीजन होता है। इस अवधि के लिए फायर वॉचर तैनात किए जाते हैं। फायर मैनेजमेंट प्लान से लेकर अन्य तैयारी होती है। पर बारिश, बर्फबारी कम होने से सर्दियों में आग लग रही है। पिछले साल नवंबर से 15 फरवरी तक ही 61 जंगल की आग की घटना रिपोर्ट हुई थी, जिसमें करीब 42 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा। इसके अलावा दो हेक्टेयर क्षेत्रफल में लगे पौधरोपण क्षेत्र को नुकसान पहुंचा।
नंदा देवी बायो स्फीयर की पहाड़ियों के शिखर तक पहुंची थी आग
सर्दियों में जंगल की आग काफी भीषण थी, यह आग नंदा देवी बायोस्फीयर की पहाड़ियों के शिखर तक पहुंच गई थी। यह आग कई दिनों तक लगी रही थी।
मानसून के बाद शांति
मानसून आने के साथ ही जंगल की आग नियंत्रित हो जाती है। इसके बाद वन विभाग प्लांटेशन के काम में व्यस्त हो जाता है। मानसून में लंबी गश्त भी शुरू होती है। ऐसे में जंगल की आग की आग को लेकर महीनों तक पूरी तरह फोकस नहीं रह जाता है।
दो दिनाें में 54 घटनाएं
देहरादून। प्रदेश में जंगल की आग की घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ी है। 25 मई तक प्रदेश में 394 जंगल की आग की घटना रिपोर्ट हुई थी, जिनकी संख्या बढ़कर 448 पर पहुंच गई। इसमें गढ़वाल रीजन में 329, कुमाऊं में 83 और वन्यजीव क्षेत्र में 36 घटनाएं हुई है। इन घटनाओं में 370 हेक्टेयर क्षेत्रफल में वन संपदा को नुकसान पहुंच चुका है। इन घटनाओं में दो लोगों की मौत हुई है। पूर्व मुख्य वन संरक्षक एसके सिंह बताते हैं कि सर्दियों में लगने वाली आग की घटनाओं की रोकथाम के लिए योजना बनानी होगी। इसके साथ ही आग के मूल कारणों को जानने के साथ ही उसके समाधान का प्रयास करना होगा।
ये भी पढे़ं...Chardham Yatra: धाम पहुंचने से पहले जाम ले रहा श्रद्धालुओं का इम्तिहान, तीन दिन के सफर में लग रहे दस दिन
केंद्र से वनाग्नि नियंत्रण के लिए जल्द आर्थिक मदद देने का करेंगे अनुरोध
प्रमुख वन संरक्षक रंजन मिश्रा बताते हैं कि वनाग्नि की घटनाओं के मद्देनजर पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से तत्काल आर्थिक मदद के लिए पत्र भेजा जाएगा। इसके अलावा कैंपा मद से भी राशि जारी करने का अनुरोध किया जाएगा। राशि मिलने के साथ ही जो पांच साल की कार्ययोजना बनी है, उसके आधार पर आगे कार्य होगा। मुख्य वन संरक्षक सुशांत पटनायक बताते हैं कि सर्दियों की आग को लेकर भी प्लान बनाकर कार्य होगा। जंगल की आग के नियंत्रण के लिए प्रयास किए गए हैं। इसमें अन्य विभागों का भी सहयोग लिया जाता है।