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Uttarakhand: बिजली कनेक्शन का लोड बढ़ाने पर उद्योगों, बड़े उपभोक्ताओं से नहीं होगी वसूली, नियामक आयोग का फैसला

अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Thu, 04 Jun 2026 07:55 AM IST
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सार

उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने उद्योगों और बड़े बिजली उपभोक्ताओं को राहत देते हुए बिजली कनेक्शन का लोड बढ़ाने पर कनेक्टिविटी और प्रोसेसिंग शुल्क वसूलने पर रोक लगा दी है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि ऊर्जा निगम इस प्रक्रिया के लिए अतिरिक्त शुल्क नहीं ले सकेंगे।

Industries and large consumers will not be charged for increasing their electricity connection load Dehradun
electricity - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

अब कनेक्शन का लोड (भार) बढ़वाने वाले राज्य के उद्योगों, बड़े उपभोक्ताओं से ऊर्जा निगम किसी भी प्रकार का कनेक्टिविटी, पावर सिस्टम स्टडी, टेक्निकल फिजिबिलिटी या रजिस्ट्रेशन-सह-प्रोसेसिंग शुल्क नहीं वसूल सकेंगे। नियामक आयोग ने एक मामले की सुनवाई में ये बड़ी राहत दी है।

काशीपुर की कंपनी काशी विश्वनाथ स्टील्स प्राइवेट लिमिटेड के पास 132 केवी पर 21,500 केवीए का बिजली कनेक्शन था। कंपनी ने इसी वोल्टेज स्तर पर अपना लोड 12,000 केवीए और बढ़ाने (कुल 33,500 केवीए करने) के लिए यूपीसीएल में आवेदन किया था। इसके लिए यूपीसीएल ने उपभोक्ता से 40,000 रुपये का रजिस्ट्रेशन-सह-प्रोसेसिंग शुल्क जमा करवा लिया।

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इसके बाद, पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) ने टेक्निकल फिजिबिलिटी रिपोर्ट के नाम पर 1,00,000 रुपये और फिर कनेक्टिविटी एग्रीमेंट के लिए 4,00,000 रुपये की अतिरिक्त मांग कर दी। इसकी शिकायत जब आयोग तक पहुंची तो आयोग ने पिटकुल को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था।

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 लोड बढ़ाने का किया था आवेदन
आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद और सदस्य (विधि) अनुराग शर्मा की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद कहा कि पिटकुल को यूपीसीएल के माध्यम से लोड बढ़ाने या नया कनेक्शन मांगने वाले उपभोक्ताओं से सीधे कोई कनेक्शन एग्रीमेंट करने की आवश्यकता नहीं है।

नया ईएचवी कनेक्शन लेने या मौजूदा लोड को घटाने-बढ़ाने वाले उपभोक्ताओं से कनेक्टिविटी, पावर सिस्टम स्टडी या टेक्निकल फिजिबिलिटी के नाम पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। आयोग ने माना कि चूंकि उपभोक्ता ने समान वोल्टेज स्तर (132 केवी) पर ही लोड बढ़ाने का आवेदन किया था, इसलिए नियमों के तहत उससे 40,000 का रजिस्ट्रेशन-सह-प्रोसेसिंग शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए था। अब यूपीसीएल इसे समायोजित करेगा।

कुल्हाल परियोजना के जीर्णोद्धार को 120 करोड़ मंजूर

उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने देहरादून स्थित 30 मेगावाट क्षमता की कुल्हाल जल विद्युत परियोजना के जीर्णोद्धार, आधुनिकीकरण और अपग्रेडेशन (आरएमयू) के लिए 120.89 करोड़ रुपये के पूंजी निवेश प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। यह परियोजना 1975 में शुरू हुई थी और लगभग 50 वर्ष की सेवा पूरी कर चुकी है।

यूजेवीएनएल की ओर से दायर याचिका पर आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य (विधि) अनुराग शर्मा और सदस्य (तकनीकी) प्रभात किशोर डिमरी की पीठ ने यह आदेश जारी किया। आधुनिकीकरण योजना के तहत परियोजना की मशीनों की कार्यक्षमता में सुधार होगा और इसकी उम्र लगभग 35 वर्ष और बढ़ जाएगी। इस आधुनिकीकरण कार्य को अनुबंध आवंटन के बाद 52 महीनों के भीतर चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। इससे कुल्हाल परियोजना का बिजली उत्पादन 10 प्रतिशत बढ़ सकता है।

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धरासू सोलर प्रोजेक्ट का विवाद बातचीत से सुलझाएं आयोग
नियामक आयोग ने उत्तरकाशी के धरासू स्थित चार मेगावाट के सोलर पावर प्रोजेक्ट से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही आयोग ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि कंपनियों के बीच आपसी तालमेल और सहयोग की कमी के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। आयोग ने सभी पक्षों को आपस में बैठकर विवाद सुलझाने और एक ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। यूपीसीएल, यूजेवीएनएल और निजी विकासकर्ता आपस में बैठक करेंगे और मुद्दों पर विचार-विमर्श कर सबसे बेहतर समाधान प्रस्ताव तैयार करेंगे। बैठक के मिनट्स आयोग के सामने पेश करने होंगे।

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