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AIIMS Rishikesh: बेड नहीं...कहकर गंभीर मरीज को लौटाया, रास्ते में हुई मौत,फिर सवालों के घेरे में कार्यप्रणाली

राजीव खत्री, संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश Published by: Renu Saklani Updated Mon, 01 Jun 2026 02:47 PM IST
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सार

बेड नहीं है कहकर एम्स ऋषिकेश में इमरजेंसी गेट से गंभीर मरीज को लौटा दिया गया। मरीज ने रास्ते में दम तोड़ गिया। मामले में पौड़ी सीएमओ ने बड़ा आरोप लगाया है कि एम्स ऋषिकेश हमें महत्व नहीं देता है।

 

Questions Raised Over AIIMS Rishikesh Functioning Critically Ill Patient Turned Away Citing Lack of Beds Dies
एम्स ऋषिकेश - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

उत्तराखंड के लोगों के लिए अंतिम उम्मीद माने जाने वाले एम्स ऋषिकेश की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आरोप हैं कि यहां गंभीर मरीजों को भी केवल बेड नहीं है कहकर इमरजेंसी गेट से लौटा दिया जाता है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि कई मामलों में मरीजों को प्राथमिक उपचार तक नहीं मिल पाता और दूसरे अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो जाती है। पौड़ी के सीएमओ का कहना है कि एम्स उन्हें महत्व नहीं देता है।



ताजा मामला कोट विकासखंड में तैनात कर्मी भरत भंडारी का है, जो अपने सरकारी आवास में झुलस गए थे। गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल ने उन्हें तत्काल एम्स रेफर किया। परिजनों का आरोप है कि एम्स पहुंचने पर उन्हें यह कहकर भर्ती करने से इनकार कर दिया गया कि बेड उपलब्ध नहीं हैं।
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आरोप यह भी है कि चिकित्सकों ने मरीज का समुचित परीक्षण तक नहीं किया और न ही प्राथमिक उपचार दिया। मजबूर परिजन उन्हें जॉलीग्रांट अस्पताल ले जाने लगे, लेकिन रास्ते में ही भरत भंडारी ने दम तोड़ दिया।
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इस मामले में पौड़ी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. शिव मोहन शुक्ला का बयान भी कम चौंकाने वाला नहीं है। सीएमओ ने साफ कहा कि एम्स हमें विशेष महत्व नहीं देता है। हमारा एम्स के साथ समन्वय नहीं हो पाता है। एम्स हमारे लिए टर्शियरी सेंटर है, लेकिन यहां बेड न होने की बात हमारी समझ से बाहर है। जब एक जिले का मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी ही यह महसूस कर रहा है कि उसकी बात नहीं सुनी जा रही, तो आम मरीजों और उनके परिजनों की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
 

एम्स में प्रशासनिक व्यवस्थाएं हैं लचर
एम्स में प्रशासनिक व्यवस्थाएं लचर हैं। प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में एम्स की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में यदि रेफर मरीजों को लगातार बेड का बहाना बनाकर लौटाया जा रहा है, तो यह संस्थान की प्रशासनिक असफलता है। आखिर एक राष्ट्रीय महत्व की संस्था में गंभीर मरीजों के लिए आपात व्यवस्था क्यों नहीं है और यदि है, तो फिर रेफर मरीजों को दर-दर भटकने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ रहा है। कांग्रेस नेता जयेंद्र रमोला ने कहा कि इस प्रकरण की जांच होनी चाहिए। दोषियों के खिलाफ हत्या के आरोप में प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए। एम्स राज्य का सबसे बड़ा चिकित्सा संस्थान है। यहां रेफर होकर आने वाले मरीजों को कम से कम प्राथमिक उपचार तो मिलना चाहिए। ऋषिकेश में एम्स की स्थापना इसी उद्देश्य से की गई थी कि पहाड़ के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके। 

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यह घटना बेहद दुखद है। एम्स वास्तविकता का आकलन अवश्य करेगा। एम्स में बेड की समस्या सतत रूप से बनी हुई है। एम्स में एक बेड के लिए तीन मरीज हमेशा रहते हैं। बेड की उपलब्धता के लिए राज्य और केंद्र सरकार दोनों के सहयोग की आवश्यकता है, जिससे 200 एकड़ भूमि प्राप्त होने के बाद एम्स का विस्तार किया जा सके। राज्य में प्राथमिक केंद्र व द्वितीयक केंद्रों की कमी के चलते भी एम्स में बेड की समस्या बनी रहती है। - डॉ. संदीप कुमार, पीआरओ, एम्स

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