{"_id":"6a8616f3887cb6ca8304b461","slug":"slaughterhouse-locked-up-corporation-silent-on-land-worth-crores-dehradun-news-c-5-1-drn1088-1046210-2026-08-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Dehradun News: स्लॉटर हाउस पर लटका ताला, करोड़ों की जमीन पर निगम खामोश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Dehradun News: स्लॉटर हाउस पर लटका ताला, करोड़ों की जमीन पर निगम खामोश
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भंडारी बाग स्थित नगर निगम के स्लॉटर हाउस को वर्ष 2020 में बंद कर दिया गया था। इसके बाद से नगर निगम क्षेत्र में कोई स्लॉटर हाउस संचालित नहीं हो रहा है। स्लॉटर हाउस बंद होने के साथ ही यहां मौजूद नगर निगम की बेशकीमती जमीन भी करीब चार साल से उपयोग से बाहर है।
दून मेडिकल कॉलेज के बराबर में स्थित यह जमीन शहर के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण स्थान पर है, लेकिन नगर निगम अब तक इसका कोई वैकल्पिक उपयोग तय नहीं कर पाया है। करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन का इस तरह खाली पड़ा रहना नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
एक ओर निगम जमीन की कमी का हवाला देता है और दूसरी ओर उसके पास उपलब्ध महत्वपूर्ण भूखंड का वर्षों से उपयोग नहीं हो पा रहा है। ऐसे में जरूरत है कि निगम इस संपत्ति को लेकर गंभीरता से योजना तैयार करे और शहरहित में इसका उपयोग सुनिश्चित करे।
विज्ञापन
इस जमीन का इस्तेमाल केवल आय बढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। निगम चाहे तो यहां सार्वजनिक उपयोग की सुविधाएं विकसित करने पर भी विचार कर सकता है। इससे जमीन शहर के लोगों के काम आ सकेगी और वर्षों से बेकार पड़ी सरकारी संपत्ति का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा।
खाली जमीन से राजस्व का नुकसान, विकास के अवसर भी छिने
जमीन के खाली पड़े रहने से नगर निगम को सीधे तौर पर संभावित किराये, लीज और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से होने वाली आय का नुकसान हो रहा है। इसके अलावा जमीन का रखरखाव और सुरक्षा भी निगम के लिए जिम्मेदारी बनी हुई है। लंबे समय तक उपयोग न होने पर किसी सरकारी संपत्ति पर अतिक्रमण और अवैध कब्जे का खतरा भी बना रहता है। यदि निगम इस जमीन का व्यावसायिक उपयोग करे तो इससे नियमित आय का बड़ा स्रोत तैयार हो सकता है। यहां व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स, कार्यालय, पीजी या अन्य अनुमत व्यावसायिक गतिविधियां विकसित की जा सकती हैं। इससे निगम को किराये अथवा लीज के रूप में लगातार राजस्व मिल सकता है। वहीं, यदि नियमानुसार बहुमंजिला आवासीय परियोजना विकसित की जाए तो शहर में आवास की जरूरत पूरी करने के साथ निगम को आर्थिक लाभ भी मिल सकता है।
आर्थिक संकट से जूझ रहा निगम, आय बहुत कम
नगर निगम देहरादून का अनुमानित बजट 350 करोड़ रुपये से ज्यादा है। इसके सापेक्ष निगम 60 करोड़ रुपये के करीब कर विभाग वसूलकर खजाने में जमा कराता है। कूड़ा उठान के एवज में भी निगम वसूली करता है। इसके अलावा दुकानों और व्यवसायिक परिसरों से भी निगम की आय होती है लेकिन उसके बाद भी निगम के खर्च पूरे नहीं होते। ऐसे में नगर निगम को जरूरत है अपनी आय बढ़ाने की।
विज्ञापन
दून मेडिकल कॉलेज के बराबर में स्थित यह जमीन शहर के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण स्थान पर है, लेकिन नगर निगम अब तक इसका कोई वैकल्पिक उपयोग तय नहीं कर पाया है। करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन का इस तरह खाली पड़ा रहना नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
विज्ञापन
एक ओर निगम जमीन की कमी का हवाला देता है और दूसरी ओर उसके पास उपलब्ध महत्वपूर्ण भूखंड का वर्षों से उपयोग नहीं हो पा रहा है। ऐसे में जरूरत है कि निगम इस संपत्ति को लेकर गंभीरता से योजना तैयार करे और शहरहित में इसका उपयोग सुनिश्चित करे।
विज्ञापन
इस जमीन का इस्तेमाल केवल आय बढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। निगम चाहे तो यहां सार्वजनिक उपयोग की सुविधाएं विकसित करने पर भी विचार कर सकता है। इससे जमीन शहर के लोगों के काम आ सकेगी और वर्षों से बेकार पड़ी सरकारी संपत्ति का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा।
खाली जमीन से राजस्व का नुकसान, विकास के अवसर भी छिने
जमीन के खाली पड़े रहने से नगर निगम को सीधे तौर पर संभावित किराये, लीज और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से होने वाली आय का नुकसान हो रहा है। इसके अलावा जमीन का रखरखाव और सुरक्षा भी निगम के लिए जिम्मेदारी बनी हुई है। लंबे समय तक उपयोग न होने पर किसी सरकारी संपत्ति पर अतिक्रमण और अवैध कब्जे का खतरा भी बना रहता है। यदि निगम इस जमीन का व्यावसायिक उपयोग करे तो इससे नियमित आय का बड़ा स्रोत तैयार हो सकता है। यहां व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स, कार्यालय, पीजी या अन्य अनुमत व्यावसायिक गतिविधियां विकसित की जा सकती हैं। इससे निगम को किराये अथवा लीज के रूप में लगातार राजस्व मिल सकता है। वहीं, यदि नियमानुसार बहुमंजिला आवासीय परियोजना विकसित की जाए तो शहर में आवास की जरूरत पूरी करने के साथ निगम को आर्थिक लाभ भी मिल सकता है।
आर्थिक संकट से जूझ रहा निगम, आय बहुत कम
नगर निगम देहरादून का अनुमानित बजट 350 करोड़ रुपये से ज्यादा है। इसके सापेक्ष निगम 60 करोड़ रुपये के करीब कर विभाग वसूलकर खजाने में जमा कराता है। कूड़ा उठान के एवज में भी निगम वसूली करता है। इसके अलावा दुकानों और व्यवसायिक परिसरों से भी निगम की आय होती है लेकिन उसके बाद भी निगम के खर्च पूरे नहीं होते। ऐसे में नगर निगम को जरूरत है अपनी आय बढ़ाने की।