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Dehradun News: पुलिस की विवेचना और मजबूत पैरवी से बेदम हो रहे दोषियों के पैतरे

Thu, 20 Aug 2026 02:15 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 20 Aug 2026 02:15 AM IST
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The culprits' plans are being thwarted by the police investigation and strong advocacy
अंकिता हत्याकांड में पुलिस की बेजोड़ विवेचना और उसके बाद मजबूत पैरवी दोषियों के हर पैतरे को बेदम साबित करती आ रही है। पुलिस की एसआईटी ने इस केस की चार्जशीट में ऐसे साक्ष्यों को शामिल किया है जिनके आगे बचाव पक्ष के हर तर्क निराधार साबित हो रहे हैं। पुलिस ने फॉरेंसिक साक्ष्यों से हत्याकांड को साबित किया तो समय को साबित करने के लिए उसने खगोलीय साक्ष्य भी जुटाए। साक्ष्यों के इन पुलिंदों का बचाव पक्ष दोषियों को राहत दिलाने के लिए कोई तोड़ नहीं निकाल पा रहा है। इसी के बूते दाषियों की हाई कोर्ट से तीसरी बार जमानत याचिका खारिज हो चुकी है।
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बता दें कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर एसआईटी का गठन किया गया था, 24 घंटे के भीतर ही आरोपियों को जेल भेज दिया गया था। दरअसल, शुरुआत में हत्यारोपियों (अब दोषी) ने पुलिस को बताया था कि अंकिता चीला नहर के किनारे से दुर्घटनावश पानी में गिरी थी। दावा यह भी किया गया था कि पुलकित ने उसे बचाने का प्रयास किया क्योंकि उस वक्त वहां पर प्राकृतिक रोशनी बहुत थी। घटना का वक्त रात नौ बजे के आसपास का बताया गया था। यानी साफ था कि प्राकृतिक रोशनी होती तो वह चांद की रोशनी हो सकती है। ऐसे में आरोपियों इस बात की काट के लिए पुलिस ने केंद्रीय वेधशाला कोलकाता को एक ई-मेल इस बात की जानकारी के लिए लिखा कि ऋषिकेश के उस हिस्से में चांद कितने बजे निकला था। वहां से जवाब आया कि चांद उस रात रात 11 बजे के आसपास दिखाई दिया था। लिहाजा, पुलकित और उसके दोस्तों की बात वहीं खारिज हो गई।
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दुर्घटना नहीं हत्या थी। इस बात को साबित करने के लिए पुलिस ने डी-एक्सलरेशन की थ्योरी को साबित किया। अंकिता अगर पानी में दुर्घटनावश गिरती तो वह नहर किनारे से टकराती। फिर चाहे उसके शरीर का कोई भी हिस्सा हो। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आया कि अंकिता के शरीर पर कोई जाहिरा चोट के निशान नहीं थे। उसके हाथों पर नील पड़ने का निशान था जो कि केवल किसी के उसे दोनों हाथों से मजबूती से पकड़ने से आया हो सकता है। डी एक्सलरेशन थ्योरी कहती है कि किसी को जब कोई पानी में जोर से धक्का दे तभी ऐसा हो सकता है कि शरीर कहीं न टकराए और सीधे पानी में गिरे। चूंकि नहर पटरी से पानी काफी नीचे रहता है तो इससे साबित हुआ कि उसे जानबूझकर धक्का दिया गया होगा जिससे वह डूब गई।
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