सूर्य ग्रहण के कारण मंगलवार को चारों धामों बदरी-केदार, यमुनोत्री-गंगोत्री समेत प्रदेशभर के मठ-मंदिर बंद रहे। ग्रहण के सूतक के कारण चारों धामों में तड़के चार बजे से पहले ही पूजा कर कपाट बंद श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए गए थे जिससे धामों में दिनभर सन्नाटा पसरा रहा। ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों में शुद्धिकरण किया गया और विधिवत रूप से पूजा-अर्चना हुई। हरिद्वार, श्रीनगर, देवप्रयाग में लोगों ने ग्रहण खत्म होने पर गंगा स्नान किया।
Surya Grahan 2022: दिनभर बंद रहे चारों धामों के कपाट, ग्रहण खत्म होने पर लोगों ने पूजा पाठ कर किया गंगा स्नान
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वहीं जोशीमठ का नृसिंह मंदिर और गोपीनाथ मंदिर भी ग्रहण के कारण बंद रहा। उर्गम घाटी में स्थित पंचम केदार कल्पेश्वर मंदिर के कपाट वर्षभर खुले रहते हैं, लेकिन सूर्य ग्रहण के सूतक को देखते हुए मंदिर में सुबह 11 बजे से आम श्रद्धालुओं के लिए पूजा वर्जित रही।
गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के कपाट भी दिनभर बंद रहे। गंगोत्री धाम के तीर्थपुरोहित राजेश सेमवाल ने बताया कि प्रात: कालीन मां भगवती गंगे की आरती व पूजा अभिषेक तड़के चार बजे से पहले किए गए थे। इसके बाद सूतक काल के कारण गंगोत्री मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए।
मंगलवार शाम को कपाट साढ़े छह बजे खोले गए और मां गंगा मईया की आरती की गई। उधर, यमुनोत्री पुरोहित महासभा के अध्यक्ष पुरुषोत्तम उनियाल ने बताया कि यमुनोत्री धाम के कपाट सुबह चार बजे बंद कर दिए गए थे। इससे पहले ही पूजा की गई। शाम छह बजे बाद स्नान कपाट खोले गए।
वहीं कोटद्वार में श्री सिद्धबली मंदिर भी बंद रहा। मंदिर के मुख्य पुरोहित पंडित देवी प्रसाद भट्ट ने बताया कि मंगलवार सुबह 4:26 बजे सूतक काल प्रारंभ होते ही सिद्धबली मंदिर, बालाजी मंदिर, फलाहारी बाबा मंदिर, देवी मंदिर, लक्ष्मी नारायण मंदिर, हनुमान मंदिर सहित नगर के सभी मंदिरों के कपाट बंद रहे।
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