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नर्सरी दाखिला: छोटी क्लास, बड़ा बिल... अभिभावकों का बैठा जा रहा दिल, फीस का ढांचा देखकर अभिभावक हुए परेशान
रश्मि शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विजय पुंडीर
Updated Sun, 25 Jan 2026 08:51 AM IST
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सार
स्कूल की पहली सीढ़ी नर्सरी की क्लास जितनी छोटी है उसकी फीस उसके मुकाबले में काफी ज्यादा है। इस तरह से क्लास छोटी हो, लेकिन इसके खर्चे किसी उच्च शिक्षा के खर्चों से कम नही हैं।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
दिल्ली के निजी स्कूलों में नर्सरी दाखिले के लिए पहली सूची जारी हो चुकी है। अब दाखिला फीस अभिभावकों के लिए फांस बन रही है। अभिभावक स्कूलों के फीस का ढांचा देखकर दाखिले का गणित बिठा रहे हैं। जहां कुछ स्कूलों ने फीस में किसी न किसी शुल्क को जोड़कर फीस मद में बढ़ोतरी की है। वहीं कुछ स्कूलों ने अभी बीते साल के फीस ढांचे को ही जारी किया है। स्कूलों ने स्पष्ट किया कि फीस की समीक्षा के बाद यह फीस संशोधित भी हो सकती है। इस तरह से फीस में बढ़ोतरी भी हो सकती है। वहीं कुछ ने फीस में बढ़ोतरी कर दी है।
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स्कूल की पहली सीढ़ी नर्सरी की क्लास जितनी छोटी है उसकी फीस उसके मुकाबले में काफी ज्यादा है। इस तरह से क्लास छोटी हो, लेकिन इसके खर्चे किसी उच्च शिक्षा के खर्चों से कम नही हैं। सरकारी विश्वविद्यालयों में तो पूरे स्नातक की फीस 50 से 70 हजार तक बैठती है। निजी स्कूलों ने अब दाखिले के लिए फीस के ढांचे जारी करने शुरू किए हैं। फीस का ढांचा देखकर अभिभावकों के होश उड़ रहे हैं। नर्सरी में ई-लर्निग, स्मार्ट क्लास, सुरक्षा व साफ-सफाई के नाम पर फीस में 250 से 1000 रुपये तक जोड़े गए हैं। वहीं परिवहन शुल्क के ही 10 से 15 हजार रुपये फीस से अलग है।
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कुछ स्कूलों की फीस का ढांचा
एक नामी स्कूल में तीन महीने की ट्यूशन फीस 51 हजार से अधिक है, वहीं तीन महीने के वार्षिक शुल्क 25 हजार से अधिकत, विकास शुल्क तीन महीने का 30 हजार से अधिक है। वहीं दाखिला फीस 200 रुपये (एक बार की), सुरक्षा राशि (500 रुपये) नाश्ते व दिन के खाने के 10 हजार रुपये और परिवहन के अलग से तीन महीने के 10-15 हजार रुपये हैं। फोटो के लिए वार्षिक 2600 रुपये, ग्रुप इंशयोरेंस 500, स्वास्थय शुल्क वार्षिक 2000 से अधिक। इस तरह से स्कूल की फीस को देखें तो वह एक लाख से अधिक की बैठ रही है।
अलग-अलग मद में ले रहे पैसे
निजी स्कूलों ने अपने फीस के ढांचे में तमाम तरह के शुल्क को शामिल किया हुआ है। जिसमें कुछ वार्षिक हैं तो कुछ प्रति माह। इसके तहत वार्षिक शुल्क, रखरखाव शुल्क, मेडिकल शुल्क, एसाइनमेंट शुल्क, ई-लर्निंग शुल्क, फाउंडेशन डे कैलेंडर, क्लास व खाने का शुल्क शामिल है। लिहाजा अभिभावकों को अब स्कूलों के लिए मोटी फीस का जुगाड़ करना होगा। किसी के जुड़वां बच्चे हो तो राशि दोगुनी हो जाएगी।
फीस बता रहे, पर किस मद में ले रहे, यह नहीं
कई स्कूल फीस बढ़ा कर ले रहे हैं। कुछ अभिभावकों की शिकायत है कि यह 80 हजार से एक लाख रुपये तक है। अभिभावकों को एक राशि बताई जा रही है, लेकिन वह किस मद में नहीं बताया जा रहा। उन्हें यह नहीं पता कि यदि किसी दूसरे स्कूल में नाम आने पर उनका फीस रिफंड कैसे होगा। जब नर्सरी दाखिले की रेस शुरू हुई थी तभी फीस का ढांचा स्कूलों को वेबसाइट पर डालना चाहिए था। जबकि कई स्कूलों ने फीस के संबंध में कोई जानकारी अपलोड नहीं की है। एक ही फीस दो हिस्सों में फीस मांगी जा रही है एक डीडी के रूप में तो दूसरी यूपीआई के माध्यम से। -अपराजिता गौतम, अध्यक्ष दिल्ली स्कूल पैरेंट्स एसोसिएशन