{"_id":"6997b141fa895efb8b0d4f57","slug":"deadly-bacteria-found-in-drinking-water-in-chhayasa-village-of-palwal-2026-02-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Faridabad: पलवल के छांयसा गांव में पेयजल आपूर्ति के छह सैंपल हुए फेल, पानी में मिला जानलेवा बैक्टीरिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Faridabad: पलवल के छांयसा गांव में पेयजल आपूर्ति के छह सैंपल हुए फेल, पानी में मिला जानलेवा बैक्टीरिया
अरुण शर्मा, चंडीगढ़/फरीदाबाद
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 20 Feb 2026 06:26 AM IST
विज्ञापन
सार
छह विभिन्न घरों से लिए गए इन सैंपलों में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है और कुछ मामलों में जानलेवा भी साबित हो सकता है।
demo
- फोटो : freepik.com
विज्ञापन
विस्तार
पलवल के छांयसा गांव में पेयजल आपूर्ति के छह सैंपल फेल पाए गए हैं। छह विभिन्न घरों से लिए गए इन सैंपलों में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है और कुछ मामलों में जानलेवा भी साबित हो सकता है। वहीं, गांव के छह घरों के कूंडे (पानी जमा करने के लिए जमीन में बने टैंक) में भी बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है। 110 घरों में से लिए गए सैंपलों में से 57 में क्लोरीन भी कम मिला।
Trending Videos
जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। विभाग के अनुसार, लोगों के बीमार होने के केस बढ़ने पर विभाग ने गांव में 386 सैंपल लिए थे। इनमें से बैक्ट्रोलोजिकल जांच के लिए 176 सैंपल भेजे गए। 76 की रिपोर्ट आ चुकी है, जिनमें 9 प्रतिशत में बैक्टीरिया मिला है।
विज्ञापन
विज्ञापन
अभी 210 सैंपल जांच के लिए लैब भेजे नहीं गए। जनस्वास्थ्य विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए वीरवार को सरकार को विस्तृत रिपोर्ट भेज दी है। हालांकि इस रिपोर्ट में दूषित पानी को मौत का कारण नहीं माना गया। विभाग ने गांव में बीमारी से केवल सात मौतें होने की ही पुष्टि की है।
शुक्रवार से विधानसभा का बजट सत्र शुरू हो रहा है। विधानसभा में विपक्ष इस मामले में सरकार की घेराबंदी कर सकता है। पंचकूला स्थित जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग मुख्यालय ने इसीलिए वीरवार को ही विस्तृत रिपोर्ट तैयार करके सरकार को भेज दी है।
चार प्रकार के टेस्ट होते हैं...
बैक्ट्रोलोजिकल टेस्ट के दाैरान घरों में पानी आपूर्ति वाले सभी सैंपल लिए जाते हैं। इसमें देखा जाता है कि घरों तक पानी में बैक्टीरिया का मिश्रण तो नहीं हो रहा। ओटी टेस्ट में केमिकल की कुछ बूंदे डालकर यह देखा जाता है कि पानी से कोलीफार्म बैक्टीरिया खत्म करने के लिए क्लोरीन है कि नहीं। इसी तरह से अमोनिया, हेवी मेटल के टेस्ट में पानी की गुणवत्ता और आपूर्ति मानकों पर खरी उतर रही है कि यह भी देखा जाता है।
अधिकतर सैंपलों की रिपोर्ट आना बाकी
176 में से शेष 100 सैंपलों की बैक्ट्रोलोजिकल रिपोर्ट लैब से आना शेष है। विभाग ने जो पानी की आपूर्ति हो रही है, उसके भी अमोनिया टेस्ट के 14 व हेवी मेटल के छह सैंपलों की रिपोर्ट आना बाकी है।