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कर्ज, कलंक, नशा, खामोशी...चारों जानलेवा; रिश्तों में दरार से शुरू हुआ खूनी खेल, अपना ही बना परिवार का हत्यारा

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 07 Jan 2026 06:00 AM IST
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सार

बंद दरवाजों के पीछे पनप रहा तनाव घर के अंदर खून बिखेर रहा है। रिश्तों में दरार आ रही है। हाल के महीनों में सामने आई हत्याओं की वारदात में यह भयावह सच्चाई उजागर हुई है।

Debt, stigma, addiction and silence...all four are deadly.
Delhi Triple murder - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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राजधानी दिल्ली के कई घरों में इन दिनों सन्नाटा कुछ ज्यादा ही डरावना है। बंद दरवाजों के पीछे पनप रहा तनाव घर के अंदर खून बिखेर रहा है। रिश्तों में दरार आ रही है। हाल के महीनों में सामने आई हत्याओं की वारदात में यह भयावह सच्चाई उजागर हुई है। कर्ज, बेरोजगारी, नशा, मानसिक बीमारी और टूटते रिश्ते एक साथ दबाव बनाते हैं, तो कई बार इंसान अपनों को दुश्मन मान बैठता है। मां-बाप, पत्नी, भाई-बहन और मासूम बच्चों की हत्याओं ने समाज के सामने यह सवाल खड़ा कर दिया है...आखिर परिवारों में ऐसा क्या टूट रहा है, जो प्यार को हिंसा में बदल रहा है।   

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पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर इलाके में एक युवक ने अपनी मां, भाई और बहन की हत्या करने के बाद खुद थाने पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया। हत्या की वजह उसने भारी कर्ज और आर्थिक दबाव को बताया लेकिन पुलिस जांच और परिजनों ने उसके आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि आर्थिक संकट जैसी बात ही नहीं है। ऐसे में सवाल यही उठता है कि आखिर क्या वजह रही कि उसने अपनी मां-बहन और भाई को पूरी प्लानिंग करके मौत की नींद सुला दिया। पुलिस की माने तो मानसिक तनाव और नशे जैसी बात तो सामने नहीं आ रही है। 
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हालांकि यह सब कहना अभी जल्दबाजी ही होगा कि आखिर इस तिहरे हत्याकांड को अंजाम देते वक्त उसकी मनोदशा क्या रही होगी। मनो चिकित्सक भी मान रहे हैं कि ऐसे अपराधियों की मनोदशा का अध्ययन करके भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है। 

दिल्ली में पिछले कुछ वर्षों के दौरान सामने आए पारिवारिक हत्याओं के मामले यह संकेत दे रहे हैं कि रिश्तों की नींव कहीं गहरे स्तर पर कमजोर पड़ रही है। जिन घरों को सबसे सुरक्षित माना जाता था, वहीं अब खून बहने की खबरें समाज को झकझोर रही हैं। इन वारदातों में हत्यारा कोई बाहरी नहीं, बल्कि वही सदस्य है, जिससे सुरक्षा और भरोसे की सबसे ज्यादा उम्मीद की जाती है।

नशे के लिए परिवार के 4 लोगों को मारा
दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के पालम स्थित राजनगर पार्ट-2 में केशव (25) नामक युवक ने शाम को खूनी खेल खेलते हुए दादी दीवानो, पिता दिनेश, मां दर्शन और बहन उर्वशी की बेरहमी से गला रेतकर हत्या कर दी। आरोपी पिछले 10 साल से नशे का आदी थी। घटना वाले दिन उसने अपनी दादी से नशे के लिए पैसे मांगे। मना करने पर पहले उसने दादी फिर परिवार के अन्य सदस्यों को मौत की नींद सुला दिया। बाद में वह घर में रखे जेवरात और कैश समेट कर भागने की फिराक में था। चचेरे भाई के मुताबिक आरोपी दादी से बहुत प्यार करता था।

नेबसराय में माता-पिता व बहन की हत्या
दक्षिण दिल्ली के नेब सराय इलाके में राजेश कुमार (51), उनकी पत्नी कोमल (46) और उनकी बेटी कविता की बेरहमी से हत्या कर दी गई। पुलिस ने हत्या के आरोप में 20 साल के बेटे अर्जुन को गिरफ्तार किया। छोटी बहन को ज्यादा प्यार करने की वजह से आरोपी ने अपनी सनक में पूरे परिवार को खत्म कर दिया। आरोपी ने दावा किया कि उसके साथ सौतला व्यवहार किया जाता था। 

पत्नी और दो बेटियों की ले ली जान
उत्तर-पूर्वी दिल्ली के करावल नगर इलाके में रक्षा बंधन के दिन प्रदीप नामक एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी और दो मासूम बेटियों की गला दबाकर बेरहमी से हत्या कर दी। आरोपी नहीं चाहता था कि उसकी पत्नी मायके जाकर भाइयों की कलाई पर राखी बांधे। मृतकों की पहचान जयश्री, इनकी दो बेटियों इशिका (7) और नीटू (5) के रूप में हुई है। वारदात के 24 घंटे बाद ही पुलिस ने आरोपी प्रदीप को दिल्ली यूपी बॉर्डर से गिरफ्तार कर लिया। दरअसल प्रदीप और उसकी पत्नी जयश्री में मनमुटाव रहता था। इसी बात पर अक्सर दोनों के बीच झगड़ा होता रहता था। आरोपी नहीं चाहता था कि उसकी पत्नी आपने मायके जाए। 

मैदान गढ़ी में माता-पिता व भाई की हत्या
मैदान गढ़ी इलाके में मानसिक तनाव में एक युवक ने परिवार के तीन लोगों की हत्या कर दी। मृतकों में उसके पिता प्रेम सिंह (50), मां रजनी (45) और बड़ा भाई ऋतिक (24) शामिल थे। हत्या के बाद आरोपी सिद्धार्थ ने एम्स मेट्रो स्टेशन पर आत्महत्या का प्रयास किया। सुरक्षा गार्ड ने आत्महत्या करने से पहले ही उसे दबोच लिया। सिद्धार्थ पिछले काफी समय से मानसिक समस्याओं से जूझ रहा था। 

एक्सपर्ट की राय....
मूल्यों की बचाए रखने वाली सभी संस्थाएं तार-तार

रिश्ते पूरी तरह से आज रिस रहे हैं। मूल्यों को दुबारा से स्थापित करके ही इस रिसाव को रोका जा सकता है। इसके लिए बड़ी पहल सरकार को राष्ट्रीय परिवार संवंर्धन मिशन सरीखे कार्यक्रम से करनी चाहिए। इसके केंद्र में प्रेम, करुणा, दया, एक दूसरे का सम्मान जैसी मानवीय वृत्तियों को रखना होगा। आज की युवा पीढ़ी को पैरेंटिंग के तरीके भी सिखाने होंगे। पहल व्यवहारिक होनी चाहिए, तभी जमीन पर बदलाव दिखेगा।
-डॉ. संजय भट्ट, समाजविज्ञानी व रिटायर्ड प्रोफेसर, दिल्ली विश्वविद्यालय

मेट्रो शहरों में सहनशीलता दे रही जवाब
बड़े शहरों में सहनशीलता का स्तर गिर गया है। यहां लोग अमीरी-गरीबी, ऊंच-नीच जैसे माहौल में खुद को ढाल नहीं पाते। दिल्ली जैसे शहर में ऐसे बढ़ते मामलों के पीछे समाज में इस तरह के भेदभाव शामिल है। ऐसे में लोग अपनी महंगी चाहतों को पाने के लिए जुनूनी हो जाते है। लक्ष्मी नगर ट्रिपल मर्डर मामले में भी कुछ ऐसा ही बाहर निकल कर सामने आ सकता है। यदि आरोपी मानसिक रूप से बीमार होता, तो पुलिस थाने में जाकर खुद जुर्म स्वीकार नहीं करता।
-डॉ. स्वाति केडिया गुप्ता, सहायक प्रोफेसर क्लिनिकल मनोविज्ञान (एम्स)

गुस्सा चरम पर, काल्पनिक चाहतों के भी लगे पंख
दिल्ली जैसे शहर में इस तरह के बढ़ते मामलों के पीछे अत्यधिक गुस्सा कारण हो सकता है, जिसे यहां का माहौल बढ़ावा देता है। इसके अलावा, इन मामलों के पीछे पारिवारिक मूल्यों की कमी, कम पढ़े-लिखे होने, नशा या अपनी काल्पनिक चाहतों को पाने का पागलपन जैसे कारण भी हो सकते है। यही नहीं, किशोरावस्था का कोई सदमा भी जवानी में भयंकर रूप ले सकता है। लक्ष्मी नगर में घटित ट्रिपल मर्डर मामले में आरोपी ने खुद को नहीं मारा, बल्कि इस मामले में महिलाएं खुद साथ में आत्महत्या कर लेती है, जबकि पुरुष ऐसा नहीं करते।
-डॉ. लोकेश, मनोचिकित्सक (आरएमएल)

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