Delhi Fire Tragedies: पांच माह में 46 मौत; हर बार हादसों के बाद ही क्यों जागता है सिस्टम? फायर ऑडिट बनी दिखावा
राजधानी में पांच महीनों में आग और इमारत गिरने से 46 लोगों की जान गई। हर हादसे के बाद फायर ऑडिट और कार्रवाई के वादे होते हैं, पर सरकारी बयान नहीं बदलते, सिर्फ मृतकों की संख्या बढ़ती है। विस्तार से पढ़ें पूरी खबर-
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राजधानी में पिछले पांच महीनों के भीतर आग लगने की तीन बड़ी घटनाओं में 40 लोगों की जान जा चुकी है। वहीं इमारत गिरने की घटनाओं में छह लोगों की मौत हुई यानी 46 लोगों ने इस तरह की घटनाओं में जान गंवाई। हर हादसे के बाद सरकार, प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की ओर से एक तयशुदा प्रतिक्रिया सामने आती है-फायर ऑडिट होगा, दोषियों पर कार्रवाई होगी, सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा होगी। वादे चलते रहते हैं, जांच चलती रहती है...फिर कोई नई त्रासदी यह सवाल छोड़ जाती है कि आखिर इन घोषणाओं का नतीजा कहां है?
मार्च 2026 में पालम अग्निकांड में एक ही परिवार के नौ लोगों की मौत हुई। सरकार ने व्यापक फायर ऑडिट और निरीक्षण अभियान की घोषणा की। इसके बाद अग्नि सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताने वाली बैठकों का दौर चला। इसके कुछ ही सप्ताह बाद मई में विवेक विहार में आग लगी और नौ लोगों की जान चली गई। फिर वही बयान दोहराए गए। फायर ऑडिट, सख्त कार्रवाई और सुरक्षा समीक्षा के आश्वासन दिए गए।
बयान नहीं बदलते...बस मृतकों की संख्या बदलती है
अब मालवीय नगर में 22 लोगों की मौत के बाद भी तस्वीर नहीं बदली है। एक बार फिर जांच, समीक्षा और कार्रवाई की बातें हो रही हैं। बड़ा सवाल यह है कि यदि पालम के बाद फायर ऑडिट हुआ था तो विवेक विहार कैसे हुआ? और यदि विवेक विहार के बाद व्यवस्था सचमुच चौकन्नी हुई थी तो मालवीय नगर में 22 लोगों की जान कैसे चली गई? सच यह है कि दिल्ली में हर अग्निकांड के बाद सरकारी बयान नहीं बदलते, सिर्फ मृतकों की संख्या बदल जाती है।
एसी कमरों में हो रहा फायर ऑडिट, जमीन पर नहीं दिख रहा असर
हर बड़े हादसे के बाद सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला शब्द है-फायर ऑडिट। सरकार, उपराज्यपाल, मंत्री और अग्निशमन विभाग दावा करते हैं कि संवेदनशील इमारतों की जांच होगी। ...लेकिन आज तक शायद ही किसी एजेंसी ने सार्वजनिक रूप से बताया हो कि कितनी इमारतों का ऑडिट हुआ, कितनों में गंभीर खामियां मिलीं, कितनों की एनओसी रद्द हुई और कितनों पर कार्रवाई हुई।
समीक्षा बैठकों की भरमार, नतीजे नदारद
हर हादसे के बाद समीक्षा बैठकों का लंबा सिलसिला शुरू हो जाता है। उपराज्यपाल कार्यालय, गृह विभाग, दिल्ली अग्निशमन सेवा, एमसीडी और जिला प्रशासन चिंता जताते हैं। निर्देश जारी होते हैं। सख्त कार्रवाई के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीन पर हालात जस के तस रहते हैं। अवैध निर्माण जारी हैं। रिहायशी इमारतों में गोदाम और व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। आपातकालीन निकास बंद हैं या मौजूद ही नहीं हैं। नियमों का उल्लंघन खुलेआम हो रहा है।
वर्षों से फायर सेफ्टी नियमों का उल्लंघन तो जिम्मेदार कौन
सबसे बड़ा सवाल जवाबदेही का है। यदि किसी इमारत में वर्षों से फायर सेफ्टी नियमों का उल्लंघन हो रहा था तो जिम्मेदार केवल भवन मालिक कैसे हो सकता है? निरीक्षण करने वाले विभाग, फायर अधिकारी, स्थानीय निकाय और प्रशासनिक तंत्र की जिम्मेदारी कौन तय करेगा? वो क्या वजहें हैं कि सब कुछ देखते हुए इतना बड़ा अमला जानबूझकर आंखें मूंद लेता है। हर हादसे के बाद जांच बैठती है। रिपोर्ट तैयार होती है। कुछ गिरफ्तारियां भी होती हैं। पर, व्यवस्था की नाकामी पर कम ही किसी आला अधिकारी की जवाबदेही तय होती हो।
अफसर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं: सूद
दिल्ली सरकार के गृह मंत्री आशीष सूद इस घटना को लेकर कहा है कि अधिकारियों की नाक के नीचे अवैध गतिविधियां चल रही हैं और वे हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। नियमों के अनुसार कार्रवाई केवल कागजों में सिमटी हुई है। उन्होंने कहा है कि पूरी दिल्ली में जहां भी ऐसी अवैध गतिविधियां चल रही हैं, वहां तत्काल कार्रवाई होगी।
हर साल दोहराई जा रही त्रासदी
03 मई 2026: विवेक विहार की चार मंजिला इमारत में आग, 9 लोगों की मौत।
18 मार्च 2026: पालम अग्निकांड में एक परिवार के 9 लोगों की मौत।
29 नवंबर 2025: तिगड़ी की चार मंजिला इमारत में आग, 4 लोगों की मौत।
25 मई 2024: विवेक विहार के बेबी केयर अस्पताल में आग, 7 नवजातों की मौत।
15 फरवरी 2024: अलीपुर की पेंट फैक्टरी में आग, 11 लोगों की मौत।
13 मई 2022: मुंडका कॉमर्शियल बिल्डिंग अग्निकांड, 27 लोगों की मौत।
12 फरवरी 2019: करोल बाग के होटल अर्पित पैलेस में आग, 17 लोगों की मौत।
08 दिसंबर 2019: अनाज मंडी अग्निकांड में 43 लोगों की मौत।
20 जनवरी 2018: बवाना फैक्टरी अग्निकांड में 17 लोगों की मौत।
20 नवंबर 2011: नंद नगरी कम्युनिटी हॉल में लगी आग, 14 लोगों की मौत।
13 जून 1997: उपहार सिनेमा अग्निकांड में 59 लोगों की मौत।