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Malviya Nagar fire: पांच महीने पहले हाईकोर्ट ने चेताया था, सिस्टम ने अदालत की भी नहीं सुनी; चली गई 21 की जान

गौरव बाजपेई, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 04 Jun 2026 07:06 AM IST
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सार

हादसा ऐसे समय हुआ है जब दिल्ली हाईकोर्ट ने पांच महीने पहले ही राजधानी के होटलों, रेस्तरां और अन्य आतिथ्य प्रतिष्ठानों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त निर्देश जारी किए थे।

Malviya Nagar fire: Five months ago, the High Court warned, but the system didn't even listen
मालवीय नगर हादसा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मालवीय नगर के हौज रानी स्थित फ्लोरिश स्टे होटल में बुधवार को लगी भीषण आग में हुई मौतों के बाद प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हादसा ऐसे समय हुआ है जब दिल्ली हाईकोर्ट ने पांच महीने पहले ही राजधानी के होटलों, रेस्तरां और अन्य आतिथ्य प्रतिष्ठानों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त निर्देश जारी किए थे।



जनहित याचिका दायर करने वाले अर्पित भार्गव का आरोप है कि यदि अदालत के आदेशों का समय पर पालन किया गया होता तो इस त्रासदी से बचा जा सकता था। उनके अनुसार, हाईकोर्ट ने 7 जनवरी 2026 को अग्नि सुरक्षा मानकों में खामियों पर चिंता जताते हुए संबंधित विभागों को तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया था। अदालत ने आग की घटनाओं की रोकथाम के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करने और उसे लागू करने को कहा था।
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मेडिकल टूरिज्म के लिए आए विदेशी मरीजों के लिए हादसे की वजह बने बजट होटल
राजधानी दिल्ली को देश का मेडिकल टूरिज्म हब माना जाता है। यहां हर वर्ष अफ्रीका, मध्य-पूर्व, बांग्लादेश, नेपाल और अन्य देशों से हजारों मरीज इलाज के लिए आते हैं। विश्वस्तरीय अस्पतालों और अपेक्षाकृत सस्ते उपचार के कारण दिल्ली विदेशी मरीजों की पहली पसंद बन चुकी है। लेकिन मालवीय नगर में हुई भीषण अग्निकांड की घटना ने मेडिकल टूरिज्म के एक ऐसे कड़वे सच को उजागर कर दिया है, जिस पर अब तक गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया था। साकेत स्थित अस्पतालों के आसपास बड़ी संख्या में बजट होटल, गेस्ट हाउस और रेस्ट हाउस संचालित हो रहे हैं। इनमें से कई इमारतें सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर केवल मुनाफा कमाने के उद्देश्य से चलाई जा रही हैं। 
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मेडिकल टूरिज्म का बढ़ता बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर में मेडिकल टूरिज्म तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन मरीजों के ठहरने की व्यवस्था उसी गति से सुरक्षित नहीं बन पाई है। अस्पतालों के आसपास सैकड़ों छोटे होटल और गेस्ट हाउस संचालित हो रहे हैं, जिनमें फायर सेफ्टी जैसी बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं।

प्रशासन की लापरवाही 
इलाके में दर्जनों ऐसी बिल्डिंगें हैं जो रिहायशी दिखती हैं लेकिन होटल की तरह चल रही हैं। बिना पुलिस और एमसीडी की जानकारी के इलाके में निर्माण कार्य संभव नहीं है। सरकार मेडिकल वीजा देती है, लेकिन आवास और सुरक्षा पर कोई सख्त गाइडलाइन नहीं जारी करती है। 

कहीं नाइटमेयर न बन जाए मेडिकल टूरिज्म
मालवीय नगर की आज की त्रासदी एक चेतावनी है। मेडिकल टूरिज्म भारत की अर्थव्यवस्था के लिए वरदान है, लेकिन अगर मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हुई तो यह छवि खराब होगी। विदेशी मरीज दिल्ली आकर डर के माहौल में न रहें, बल्कि विश्वास के साथ इलाज करा सकें। सरकार, अस्पताल और होटल इंडस्ट्री अगर मिलकर ईमानदारी से काम नहीं करेंगे तो घटनाएं दोहराएंगी और देश भर से मेडिकल टूरिज्म मेडिकल नाइटमेयर बन जाएगा।

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