आईपीएस के घर से ड्रग की बरामदगी: पौने तीन वर्ष से चल रही थी फैक्ट्री, विदेश में 20 गुना ज्यादा कीमत
स्थानीय पुलिस की जांच से बचने के लिए एसपी के पी-4 सेक्टर के मकान को करीब पौने तीन वर्षों से नाइजीरियाई परिवार ने किराये पर ले रखा था। आशंका जताई जा रही है कि आरोपियों ने तभी से मादक पदार्थ बनाने की फैक्ट्री शुरू कर दी होगी।
कासना कोतवाली क्षेत्र स्थित पी-4 सेक्टर का इलाका बेहद एकांत है। अधिकांश मकान अधबने या फिर बने ही नहीं हैं। बृहस्पतिवार रात को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की टीम ने जिस मकान में छापेमारी की। यह मकान एसपी ओपीएन पांडे का है। उनकी लखनऊ में तैनाती है, फिलहाल वे प्रधानमंत्री की सुरक्षा टीम का हिस्सा हैं। दिल्ली से टीम ने यहां आकर सबसे पहले आरोपियों को काबू किया।
इसके बाद मकान की छानबीन की। मकान के बराबर रहने वाली एक महिला ने बताया कि एनसीबी टीम ने अंदर जाकर आरोपियों को पकड़ लिया था। इस दौरान एक आरोपी टीम से बचने के लिए मकान की छत पर चढ़ गया और शोर मचाने लगा। टीम ने कुछ देर बाद घेराबंदी कर उसे भी दबोच लिया। वहीं, एसपी ओपीएन पांडे ने बताया कि किरायेदारों ने करीब आठ माह से (24 हजार प्रति माह की दर से) करीब दो लाख रुपये किराये का भुगतान नहीं किया है। वहीं, इतने माह से ही करीब दो लाख रुपये का बिजली का बिल भी बकाया है। उन्होंने किराया न मिलने पर मकान खाली करने का नोटिस दिया हुआ था। इसके अलावा स्थानीय पुलिस अधिकारियों से भी इस संबंध में बात की थी।
पुलिस और खुफिया विभाग को कैसे नहीं लगी भनक
कासना कोतवाली क्षेत्र के पी-4 सेक्टर में लंबे अर्से से मादक पदार्थ तैयार किए जा रहे थे। इसकेे बावजूद आरोपी यहां नशे का धंधा चलाते रहे, लेकिन इसकी भनक पुलिस व खुफिया विभाग को नहीं लगी।
कासना और सूरजपुर कोतवाली क्षेत्र के सेक्टर व सोसायटियों में बड़ी संख्या में अफ्रीकी रहते हैं। अधिकांश अफ्रीकी छात्र यहां के कॉलेज व विश्वविद्यालयों में पढ़ाई करते हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कई अफ्रीकी नागरिक नशे के कारोबार में पकड़े जाते रहे हैं। बड़ी संख्या में विदेशियों के यहां रहने और आपराधिक गतिविधियों में कई लोगों के पकड़े जाने के कारण इनकी समय-समय पर जांच की जाती रही है, लेकिन एनसीबी के अधिकारियों के खुलासे के बाद पुलिस व खुफिया विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
भारत में सस्ता जबकि विदेशों में महंगा है स्यूडोएफेड्रिन
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने ड्रग तस्करों से ग्रेटर नोएडा के एक मकान से 1800 किलो स्यूडोएफेड्रिन पकड़ी है। यह ड्रग्स बनाने के काम आता है। इसकी भारत से ज्यादा कीमत में विदेशों में है। यही वजह है कि भारत इसका एक प्रमुख बाजार बना हुआ है। यहां से इसको तस्करी के माध्यम से विदेशी बाजार तक पहुंचाया जाता है। वहां इसकी बेहद ऊंची बोली लगाई जाती है। कई बार यह ब्लैक मार्केट में बीस गुना से भी ज्यादा कीमत में बेची जाती है।
दवाइयों के छोटे कारखानों से बाहर निकाल लेते हैं...
इसका प्रयोग दवाइयां बनाने के काम आता है। जो कि कई प्रकार के रोग में उपयोग किया जाता है। जिसके पास इसका लाइसेंस होता है वही इसे ले सकता है। लेकिन कई बार दवाइयों के छोटे-छोटे कारखानों से ज्यादा पैसों के लालच में चार-पांच गुना ज्यादा कीमत पर इसे ऐसे लोगों को बेच दिया जाता है। विदेशों में जाने के बाद इसकी कीमत 20 गुना से ज्यादा हो जाती है।
बेहद खतरनाक ड्रग्स बनाने के आता है काम
स्यूडोएफेड्रिन का प्रयोग आइस एक्सटेसी और मेथ एम्फेटामाइन नामक खतरनाक ड्रग्स बनाने के काम आता है। जिसका उपयोग विदेशों में किया जाता है। इस केमिकल से जब यह ड्रग्स बना लिया जाता है तो इसकी कीमत और बढ़ जाती है। इन दोनों को मिलाकर इसका उपयोग किया जाता है और यह उत्तेजना बढ़ाने के काम आता है। इसका उपयोग रेव पार्टियों व क्लब ड्रग्स के तौर पर किया जाता है।
सीधे तौर पर नहीं होता है इसका उपयोग
नशा करने के लिए हेरोइन, गांजा, अफीम आदि का सीधे तौर पर उपयोग किया जाता है लेकिन स्यूडोएफेड्रिन का उपयोग सीधे तौर पर नहीं किया जा सकता है। इसको पहले दूसरे रसायन में बदला जाता है और अंतिम तौर पर यह असली ड्रग्स के रूप में तैयार किया जाता है।
घूमने-फिरने के बहाने बुलाये जाते हैं विदेशी
विदेशों से ऐसे लोगों को भारत में घूमने-फिरने का लालच दिया जाता है, जो कि गरीब हैं। उनको यहां रहने और खाने-पीने की सुविधा दी जाती है और वापसी में कुछ सामान लाने के लिए कहा जाता है, जो कि संभवत: इस तरह का ड्रग्स होता है।
क्या होता है स्यूडोएफेड्रिन
स्यूडोएफेड्रिन एक प्रकार का केमिकल है। इसका प्रयोग ड्रग्स बनाने के काम आता है। इसमें कई प्रकार की प्रक्रियाओं को पूरा किया जाता है। उसके बाद यह ड्रग्स की शक्ल लेता है।
नकली हेरोइन बनाने का भी कर रहे थे काम
एनसीबी अधिकारियों के मुताबिक मौके पर ड्रग्स के कई पैकेट भी पकड़े गए। जब उसकी जांच की गई तो पता चला कि यह नकली हेरोइन है और यहां इसका व्यापार करने की कोशिश की जा रही थी।
एयरपोर्ट के स्कैनर भी कई बार नहीं पकड़ पाता
एयरपोर्ट पर जब सामान को स्कैनर में डाला जाता है तो उसमें यह खाने-पीने के सामान की तरह दिखता है। लिहाजा कई बार यह पकड़ में नहीं आता होगा। जब सामान खुलवाकर उसकी जांच की जाती है और शक के आधार पर आगे की प्रक्रिया होती है तब समझ आता है कि यह चीज क्या है।
स्यूडोएफेड्रिन एक प्रकार का केमिकल है, जिसे दवाइयां बनाने के लिए लाइसेंसधारक ही ले सकता है। लेकिन अगर इसे गलत उद्देश्य के साथ कोई उपयोग करता है तो यह ड्रग्स की श्रेणी में आ जाता है। इससे कई प्रकार के ड्रग्स बनाये जाते हैं। -माधव सिंह, जोनल डायरेक्टर, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, दिल्ली