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Faridabad News: फरीदाबाद में पानी की शुद्धता पर होगा कड़ा पहरा, जिला लैब होगी हाई-टेक जांच होगी तेज और सटीक
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फरीदाबाद में पानी की शुद्धता पर होगा कड़ा पहरा, जिला लैब होगी हाई-टेक जांच होगी तेज और सटीक
पेयजल के साथ एसटीपी वाले रिसाइकल पानी की चेक होगी गुणवत्ता
मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। जिले में अब शहर और ग्रामीण इलाकों में सप्लाई होने वाले पेयजल की गुणवत्ता की जांच पहले से कहीं अधिक सटीक और तेज होगी। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग सेक्टर-1 स्थित अपनी जिला स्तरीय प्रयोगशाला को अत्याधुनिक तकनीक से लैस करने जा रहा है। इसमें नया व आधुनिक भवन बनाने के साथ नई मशीनें और उपकरण लगाए जाएंगे जिससे पानी में मौजूद हानिकारक तत्वों और बैक्टीरिया की पहचान समय रहते हो सकेगी। इसका सीधा असर जनस्वास्थ्य पर पड़ेगा और जलजनित बीमारियों की रोकथाम में विभाग को बड़ी मजबूती मिलेगी।
पीएचईडी की जिला प्रयोगशाला को अब पारंपरिक जांच केंद्र से आगे बढ़ाकर एक आधुनिक टेस्टिंग हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत लैब में केजल्डाहल सिस्टम लगाया जाएगा, जिससे पानी में नाइट्रोजन की मात्रा का सटीक आकलन हो सकेगा। इसके साथ ही ऑक्सीजन स्तर और अन्य रासायनिक तत्वों की जांच के लिए डिजिटल डाइजेस्टर जैसे आधुनिक उपकरण शामिल किए जाएंगे।
बैक्टीरियल जांच को मजबूत करने के लिए इन्क्यूबेटर लगाए जाएंगे, जबकि रसायनों के सुरक्षित उपयोग के लिए फ्यूम हुड की व्यवस्था की जा रही है। इन सभी उपकरणों से पानी के नमूनों की गहराई से जांच संभव होगी जिससे किसी भी तरह की अशुद्धि को नजरअंदाज नहीं किया जा सकेगा।
अब बाहर नहीं भेजने पड़ेंगे पानी के नमूने
अब तक कई जटिल परीक्षणों के लिए फरीदाबाद से पानी के नमूने दूसरे शहरों की प्रयोगशालाओं में भेजने पड़ते थे। इससे रिपोर्ट आने में देरी होती थी और समस्या के समाधान में भी समय लगता था। नई मशीनों के इंस्टॉलेशन के बाद यह जरूरत खत्म हो जाएगी। जिला लैब आत्मनिर्भर बन जाएगी और यहीं पर टीडीएस, पीएच लेवल, फ्लोराइड, नाइट्रेट और हानिकारक बैक्टीरिया जैसी महत्वपूर्ण जांचें कम समय में पूरी की जा सकेंगी। इससे उन इलाकों को विशेष लाभ मिलेगा जहां अक्सर गंदे या बदबूदार पानी की शिकायतें सामने आती रहती हैं।
पेयजल के साथ एसटीपी पानी की भी होगी जांच
इस पहल की एक खास बात यह है कि लैब में केवल पेयजल ही नहीं बल्कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले पानी की जांच भी की जा सकेगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि उपचारित पानी मानकों पर खरा उतर रहा है या नहीं। इसके लिए विभाग अपने भवन को भी अपग्रेड कर रहा है ताकि नई मशीनों के संचालन और नमूनों के रखरखाव में कोई तकनीकी दिक्कत न आए। यह कदम पर्यावरण संरक्षण और जल प्रबंधन दोनों ही दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
जलजनित बीमारियों पर लगेगी लगाम
फरीदाबाद में तेजी से बढ़ती आबादी और शहरीकरण के बीच साफ पानी की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती है। कई बार सीवेज मिक्सिंग या पाइपलाइन लीकेज के कारण पानी दूषित हो जाता है जिससे हैजा, टाइफाइड और पेट से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
नई हाई-टेक लैब से समय पर जांच रिपोर्ट मिलने पर विभाग तुरंत सुधारात्मक कदम उठा सकेगा। दूषित पानी की सप्लाई को रोका जा सकेगा और प्रभावित क्षेत्र में वैकल्पिक व्यवस्था की जा सकेगी। इससे आम लोगों का भरोसा भी जल आपूर्ति व्यवस्था पर मजबूत होगा।
भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयारी
विभाग के अनुसार अगले छह महीने में सभी उपकरणों की स्थापना पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। आने वाले समय में यह प्रयोगशाला जिले के लिए एक भरोसेमंद केंद्र के रूप में काम करेगी। भविष्य में निजी स्रोतों, बोरवेल और औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास के पानी की जांच में भी यह लैब अहम भूमिका निभा सकती है। इससे न केवल वर्तमान समस्याओं का समाधान होने के साथ संभावित खतरों की पहचान पहले ही हो सकेगी।
पारदर्शिता और गुणवत्ता पर विशेष जोर
पीएचईडी ने साफ किया है कि सभी उपकरण उच्च गुणवत्ता और प्रमाणित मानकों के अनुसार ही खरीदे जाएंगे। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रखी गई है ताकि सरकारी संसाधनों का सही उपयोग हो और जनता को बेहतर सुविधा मिल सके। विभाग का मानना है कि मजबूत जांच प्रणाली के बिना शुद्ध पेयजल की आपूर्ति संभव नहीं है और यही सोच इस पूरे प्रोजेक्ट की नींव है।
लोगों की सुविधा के लिए लैब को अपग्रेड किया जा रहा है। इसमें एसटीपी वाले पानी की जांच की सुविधा भी बढ़ाई जाएगी। - राहुल, कार्यकारी अभियंता पीएचईडी फरीदाबाद
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पेयजल के साथ एसटीपी वाले रिसाइकल पानी की चेक होगी गुणवत्ता
मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। जिले में अब शहर और ग्रामीण इलाकों में सप्लाई होने वाले पेयजल की गुणवत्ता की जांच पहले से कहीं अधिक सटीक और तेज होगी। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग सेक्टर-1 स्थित अपनी जिला स्तरीय प्रयोगशाला को अत्याधुनिक तकनीक से लैस करने जा रहा है। इसमें नया व आधुनिक भवन बनाने के साथ नई मशीनें और उपकरण लगाए जाएंगे जिससे पानी में मौजूद हानिकारक तत्वों और बैक्टीरिया की पहचान समय रहते हो सकेगी। इसका सीधा असर जनस्वास्थ्य पर पड़ेगा और जलजनित बीमारियों की रोकथाम में विभाग को बड़ी मजबूती मिलेगी।
पीएचईडी की जिला प्रयोगशाला को अब पारंपरिक जांच केंद्र से आगे बढ़ाकर एक आधुनिक टेस्टिंग हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत लैब में केजल्डाहल सिस्टम लगाया जाएगा, जिससे पानी में नाइट्रोजन की मात्रा का सटीक आकलन हो सकेगा। इसके साथ ही ऑक्सीजन स्तर और अन्य रासायनिक तत्वों की जांच के लिए डिजिटल डाइजेस्टर जैसे आधुनिक उपकरण शामिल किए जाएंगे।
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बैक्टीरियल जांच को मजबूत करने के लिए इन्क्यूबेटर लगाए जाएंगे, जबकि रसायनों के सुरक्षित उपयोग के लिए फ्यूम हुड की व्यवस्था की जा रही है। इन सभी उपकरणों से पानी के नमूनों की गहराई से जांच संभव होगी जिससे किसी भी तरह की अशुद्धि को नजरअंदाज नहीं किया जा सकेगा।
अब बाहर नहीं भेजने पड़ेंगे पानी के नमूने
अब तक कई जटिल परीक्षणों के लिए फरीदाबाद से पानी के नमूने दूसरे शहरों की प्रयोगशालाओं में भेजने पड़ते थे। इससे रिपोर्ट आने में देरी होती थी और समस्या के समाधान में भी समय लगता था। नई मशीनों के इंस्टॉलेशन के बाद यह जरूरत खत्म हो जाएगी। जिला लैब आत्मनिर्भर बन जाएगी और यहीं पर टीडीएस, पीएच लेवल, फ्लोराइड, नाइट्रेट और हानिकारक बैक्टीरिया जैसी महत्वपूर्ण जांचें कम समय में पूरी की जा सकेंगी। इससे उन इलाकों को विशेष लाभ मिलेगा जहां अक्सर गंदे या बदबूदार पानी की शिकायतें सामने आती रहती हैं।
पेयजल के साथ एसटीपी पानी की भी होगी जांच
इस पहल की एक खास बात यह है कि लैब में केवल पेयजल ही नहीं बल्कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले पानी की जांच भी की जा सकेगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि उपचारित पानी मानकों पर खरा उतर रहा है या नहीं। इसके लिए विभाग अपने भवन को भी अपग्रेड कर रहा है ताकि नई मशीनों के संचालन और नमूनों के रखरखाव में कोई तकनीकी दिक्कत न आए। यह कदम पर्यावरण संरक्षण और जल प्रबंधन दोनों ही दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
जलजनित बीमारियों पर लगेगी लगाम
फरीदाबाद में तेजी से बढ़ती आबादी और शहरीकरण के बीच साफ पानी की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती है। कई बार सीवेज मिक्सिंग या पाइपलाइन लीकेज के कारण पानी दूषित हो जाता है जिससे हैजा, टाइफाइड और पेट से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
नई हाई-टेक लैब से समय पर जांच रिपोर्ट मिलने पर विभाग तुरंत सुधारात्मक कदम उठा सकेगा। दूषित पानी की सप्लाई को रोका जा सकेगा और प्रभावित क्षेत्र में वैकल्पिक व्यवस्था की जा सकेगी। इससे आम लोगों का भरोसा भी जल आपूर्ति व्यवस्था पर मजबूत होगा।
भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयारी
विभाग के अनुसार अगले छह महीने में सभी उपकरणों की स्थापना पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। आने वाले समय में यह प्रयोगशाला जिले के लिए एक भरोसेमंद केंद्र के रूप में काम करेगी। भविष्य में निजी स्रोतों, बोरवेल और औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास के पानी की जांच में भी यह लैब अहम भूमिका निभा सकती है। इससे न केवल वर्तमान समस्याओं का समाधान होने के साथ संभावित खतरों की पहचान पहले ही हो सकेगी।
पारदर्शिता और गुणवत्ता पर विशेष जोर
पीएचईडी ने साफ किया है कि सभी उपकरण उच्च गुणवत्ता और प्रमाणित मानकों के अनुसार ही खरीदे जाएंगे। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रखी गई है ताकि सरकारी संसाधनों का सही उपयोग हो और जनता को बेहतर सुविधा मिल सके। विभाग का मानना है कि मजबूत जांच प्रणाली के बिना शुद्ध पेयजल की आपूर्ति संभव नहीं है और यही सोच इस पूरे प्रोजेक्ट की नींव है।
लोगों की सुविधा के लिए लैब को अपग्रेड किया जा रहा है। इसमें एसटीपी वाले पानी की जांच की सुविधा भी बढ़ाई जाएगी। - राहुल, कार्यकारी अभियंता पीएचईडी फरीदाबाद