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Faridabad News: थार से कुचलकर हत्या के मामले में एसीपी के बेटे को मिली सशर्त जमानत
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सेंट्रल थाने में 22 सितंबर को दर्ज हुई थी एफआईआर
मनोज नामक युवक की रोडरेज के बाद थार से कुचलकर की गई थी हत्या
मृतक का भाई व एक अन्य अहम गवाह ट्रायल के दौरान बयान से मुकरे
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। थार कार से कुचलकर मनोज की हत्या मामले में एसीपी के बेटे हिमांशु कुमार को जिला अदालत से सशर्त जमानत मिली है। हिमांशु के अधिवक्ता की ओर से जमानत याचिका दायर कर दलील दी गई कि ये कोई पुरानी रंजिश का मामला नहीं था। स्कूटी व थार सवार के बीच हुई कहासुनी के बाद ये मामला हुआ। दो सह-आरोपियों केशव चौधरी व निशांत सहरावत को जमानत मिल चुकी है।
वहीं अभियोजन पक्ष ने याचिका का विरोध करते हुए दलील दी कि आरोपी ने जान बूझकर मनोज को थार कार से कुचला, जबकि वहां काफी जगह थी और वो साइड से कार निकाल सकता था। इसलिए ये गैर इरादतन हत्या नहीं बल्कि हत्या का केस है। पहले पुलिस ने हत्या की धारा जोड़ी थी लेकिन जांच के बाद हत्या की धारा हटा दी गई। सरकारी अधिवक्ता ने ये भी माना कि शिकायतकर्ता व एक चश्मदीद ने अभियोजन पक्ष का समर्थन नहीं किया है। मामले में एक अन्य चश्मदीद की गवाही होना बाकी है। सभी पक्षों को सुनकर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुरुषोत्तम कुमार की अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका मंजूर कर दी। अदालत ने ये भी शर्त रखी कि आरोपी केस के गवाहों से संपर्क करने का प्रयास नहीं करेगा। ये वारदात 21 सितंबर 2025 की देर रात हुई थी।
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मृतक का भाई व एक अन्य अहम गवाह ट्रायल के दौरान बयान से मुकरे
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। थार कार से कुचलकर मनोज की हत्या मामले में एसीपी के बेटे हिमांशु कुमार को जिला अदालत से सशर्त जमानत मिली है। हिमांशु के अधिवक्ता की ओर से जमानत याचिका दायर कर दलील दी गई कि ये कोई पुरानी रंजिश का मामला नहीं था। स्कूटी व थार सवार के बीच हुई कहासुनी के बाद ये मामला हुआ। दो सह-आरोपियों केशव चौधरी व निशांत सहरावत को जमानत मिल चुकी है।
वहीं अभियोजन पक्ष ने याचिका का विरोध करते हुए दलील दी कि आरोपी ने जान बूझकर मनोज को थार कार से कुचला, जबकि वहां काफी जगह थी और वो साइड से कार निकाल सकता था। इसलिए ये गैर इरादतन हत्या नहीं बल्कि हत्या का केस है। पहले पुलिस ने हत्या की धारा जोड़ी थी लेकिन जांच के बाद हत्या की धारा हटा दी गई। सरकारी अधिवक्ता ने ये भी माना कि शिकायतकर्ता व एक चश्मदीद ने अभियोजन पक्ष का समर्थन नहीं किया है। मामले में एक अन्य चश्मदीद की गवाही होना बाकी है। सभी पक्षों को सुनकर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुरुषोत्तम कुमार की अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका मंजूर कर दी। अदालत ने ये भी शर्त रखी कि आरोपी केस के गवाहों से संपर्क करने का प्रयास नहीं करेगा। ये वारदात 21 सितंबर 2025 की देर रात हुई थी।
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