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Faridabad News: बैंक लॉकर से आभूषण चोरी मामले में तत्कालीन एसबीआई ब्रांच मैनेजर को मिली जमानत
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अदालत ने कहा कि सिविल नेचर का है मामला जिसे आपराधिक नेचर का बना दिया गया
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। सेक्टर-15 की एसबीआई शाखा के बैंक लॉकर से आभूषण गायब होने मामले में बैंक की तत्कालीन मैनेजर प्रीति कटारिया को जमानत मिल गई है। जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने कहा कि यह प्रथम दृष्टया एक स्पष्ट रूप से दीवानी प्रकृति का मामला है, जिसे एफआईआर दर्ज करके एक आपराधिक अपराध का रूप दे दिया गया है।
तत्कालीन ब्रांच मैनेजर प्रीति कटारिया के पक्ष से दलील दी गई है कि लॉकर खोलते समय वह अकेली नहीं थी, बल्कि उस समय बैंक के 6-7 अन्य कर्मचारी भी वहां मौजूद थे। इसके अलावा, नए सॉफ्टवेयर एलएएमपी में, शिकायतकर्ता का लॉकर ‘अनअलॉटेड’ (किसी को आवंटित नहीं) दिखा रहा था। सभी की मौजूदगी में खोले गए लॉकर के अंदर कुछ भी रखा हुआ नहीं मिला। इसलिए उसने लॉकर के सामान की कोई चोरी या उसका कोई दुरुपयोग नहीं किया है। सभी पक्षों को सुनकर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ज्योति लांबा की अदालत ने तत्कालीन ब्रांच मैनेजर को जमानत दे दी। सेक्टर-15 स्थित एसबीआई शाखा में ये मामला 30 जनवरी को सामने आया था।
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फरीदाबाद। सेक्टर-15 की एसबीआई शाखा के बैंक लॉकर से आभूषण गायब होने मामले में बैंक की तत्कालीन मैनेजर प्रीति कटारिया को जमानत मिल गई है। जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने कहा कि यह प्रथम दृष्टया एक स्पष्ट रूप से दीवानी प्रकृति का मामला है, जिसे एफआईआर दर्ज करके एक आपराधिक अपराध का रूप दे दिया गया है।
तत्कालीन ब्रांच मैनेजर प्रीति कटारिया के पक्ष से दलील दी गई है कि लॉकर खोलते समय वह अकेली नहीं थी, बल्कि उस समय बैंक के 6-7 अन्य कर्मचारी भी वहां मौजूद थे। इसके अलावा, नए सॉफ्टवेयर एलएएमपी में, शिकायतकर्ता का लॉकर ‘अनअलॉटेड’ (किसी को आवंटित नहीं) दिखा रहा था। सभी की मौजूदगी में खोले गए लॉकर के अंदर कुछ भी रखा हुआ नहीं मिला। इसलिए उसने लॉकर के सामान की कोई चोरी या उसका कोई दुरुपयोग नहीं किया है। सभी पक्षों को सुनकर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ज्योति लांबा की अदालत ने तत्कालीन ब्रांच मैनेजर को जमानत दे दी। सेक्टर-15 स्थित एसबीआई शाखा में ये मामला 30 जनवरी को सामने आया था।
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