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Ghaziabad News: धड़ल्ले से दौड़ रहीं 285 डग्गामार बसें, जिम्मेदार नहीं कर रहे कार्रवाई
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संवाद न्यूज एजेंसी
साहिबाबाद। जनपद में सैकड़ों की संख्या में डग्गामार बसें धड़ल्ले से दौड़ लगा रही है, लेकिन न परिवहन विभाग के अधिकारियों को इसकी परवाह है और न ही यातायात पुलिस इसकी जरुरत समझती है। यदि इसी तरह का हाल रहा तो किसी भी दिन यहां पर लखनऊ जैसा बड़ा हादसा हो सका है।
आनंद विहार, मोहन नगर मेट्रो स्टेशन और सिटी मॉल के सामने मुख्य मार्ग पर डग्गामार बसों का संचालन खुलेआम हो रहा है। हाल यह है कि डग्गामार बसें, परिवहन निगम की बसों के साथ खड़ी होकर मोहननगर से गढ़, पिलखुवा, हापुड़ और मेरठ रूट के लिए यात्रियों को भरकर बेखौऊ रवाना होती है। इन बसों की सुरक्षा का आलम यह है कि इनमें कई के टायर पुराने हो चुके हैं तो फिटनेस तक अधूरी है। कई बसों में फर्स्ट-एड बॉक्स तक की सुविधा नहीं है और न ही अग्निशमन के उपाय है।
दरअसल, परिवहन निगम व आरटीओ और यातायात पुलिस की हीलाहवाली के चलते जनपद की सड़कों पर 285 डग्गामार बसें दौड़ रही हैं। मोहन नगर से 211 और लाल कुआं से कुल 74 अनाधिकृत बसों का संचालन हो रहा है। अगर गाजियाबाद और बुलंदशहर दोनों जिलों के आंकड़ा देखें तो अनाधिकृत बसों की संख्या 720 तक पहुंच रही है।
हाल ही में रोडवेज और आरटीओ के संयुक्त सर्वे में डग्गामार बसों की यह संख्या सामने आई है। यह डग्गामार बस यात्रियों के जीवन से तो खिलवाड़ कर ही रही है। साथ ही परिवहन निगम को हर माह 40 लाख रुपये से भी अधिक राजस्व का नुकसान पहुंचा रही है। जब डग्गामार बसों पर कार्रवाई की बात कही जाती है विभाग एक दूसरे पर जिम्मेदारी डाल देते है।
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साहिबाबाद। जनपद में सैकड़ों की संख्या में डग्गामार बसें धड़ल्ले से दौड़ लगा रही है, लेकिन न परिवहन विभाग के अधिकारियों को इसकी परवाह है और न ही यातायात पुलिस इसकी जरुरत समझती है। यदि इसी तरह का हाल रहा तो किसी भी दिन यहां पर लखनऊ जैसा बड़ा हादसा हो सका है।
आनंद विहार, मोहन नगर मेट्रो स्टेशन और सिटी मॉल के सामने मुख्य मार्ग पर डग्गामार बसों का संचालन खुलेआम हो रहा है। हाल यह है कि डग्गामार बसें, परिवहन निगम की बसों के साथ खड़ी होकर मोहननगर से गढ़, पिलखुवा, हापुड़ और मेरठ रूट के लिए यात्रियों को भरकर बेखौऊ रवाना होती है। इन बसों की सुरक्षा का आलम यह है कि इनमें कई के टायर पुराने हो चुके हैं तो फिटनेस तक अधूरी है। कई बसों में फर्स्ट-एड बॉक्स तक की सुविधा नहीं है और न ही अग्निशमन के उपाय है।
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दरअसल, परिवहन निगम व आरटीओ और यातायात पुलिस की हीलाहवाली के चलते जनपद की सड़कों पर 285 डग्गामार बसें दौड़ रही हैं। मोहन नगर से 211 और लाल कुआं से कुल 74 अनाधिकृत बसों का संचालन हो रहा है। अगर गाजियाबाद और बुलंदशहर दोनों जिलों के आंकड़ा देखें तो अनाधिकृत बसों की संख्या 720 तक पहुंच रही है।
हाल ही में रोडवेज और आरटीओ के संयुक्त सर्वे में डग्गामार बसों की यह संख्या सामने आई है। यह डग्गामार बस यात्रियों के जीवन से तो खिलवाड़ कर ही रही है। साथ ही परिवहन निगम को हर माह 40 लाख रुपये से भी अधिक राजस्व का नुकसान पहुंचा रही है। जब डग्गामार बसों पर कार्रवाई की बात कही जाती है विभाग एक दूसरे पर जिम्मेदारी डाल देते है।