गाजियाबाद में भीषण अग्निकांड: एक घंटा तक फंसे रहे 200 लोग, 50 कर्मचारी मदद के लिए आए; मां-बाप को नहीं बचा पाए
खोड़ा में पांच मंजिला इमारत में शॉर्ट सर्किट से लगी आग ने दहशत मचा दी। जिसमें पार्किंग में 40 वाहन जल गए और धुएं से दम घुटने से दंपती की मौत हो गई।
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विस्तार
संगम विहार बीरबल नगर स्थित पांच मंजिला इमारत में मंगलवार रात भीषण आग लग गई। इससे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। घटना में एक दंपती की धुएं के कारण दम घुटने से मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक लोग घायल हो गए। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। साथ ही इमारत में बने 43 फ्लैटों में रहने वाले करीब 200 लोग अंदर फंस गए। दमकल विभाग ने करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद सभी को बाहर निकाला।
प्राथमिक जांच में पार्किंग क्षेत्र में लगे मीटर में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका जताई जा रही है। पार्किंग में खड़े करीब 40 वाहन आग की चपेट में आ गए थे। इससे आग तेजी से फैली। पूरे मामले की जांच की जा रही है।
सीएफओ राहुल पाल ने बताया कि तीन मार्च की रात करीब 11 बजे दमकल विभाग को आग लगने की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचने पर आग दूसरे तल की सीढ़ियों तक पहुंच चुकी थी। पार्किंग में खड़े करीब 40 वाहन जलने लगे थे। दमकल की 10 गाड़ियों और करीब 50 कर्मचारियों की मदद से आग बुझाने व इमारत में फंसे लोगों को निकालने का अभियान शुरू किया गया।
दमकल की सीढ़ियों का प्रयोग कर लोगों को बाहर निकाला गया। इस दौरान पहली मंजिल के एक फ्लैट में राजेंद्र प्रसाद (48) और उनकी पत्नी मीनू प्रसाद (45) बेहोशी की हालत में मिले। दोनों को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
अन्य फ्लैटों में फंसे लोगों को भी निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। अधिकांश लोग धुएं से प्रभावित हुए थे। सभी की हालत खतरे से बाहर बताई गई है। 10 परिवारों को बचाने के लिए दमकल कर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। इन परिवारों के फ्लैट अंदर से बंद थे और लोग बेहोश होकर जहां-तहां पड़े हुए थे। दमकलकर्मियाें ने हथौड़ों व अन्य उपकरणों से दरवाजे तोड़े। इसके बाद करीब 40 बेसुध लोगों को कंधों पर लादकर बाहर निकाला।
मांगते रहे मदद... पर मां बाप को नहीं बचा पाए
इमारत की पहली मंजिल पर रहने वाले राजेंद्र दर्जी का काम करते थे। परिवार में दो बेटियां अंजली और नीतू के अलावा दो बेटे हैं। घटना के वक्त सभी घर में थे। राजेंद्र का मकान पार्किंग के ठीक ऊपर था, इसलिए सबसे पहले उनके फ्लैट में ही धुआं भरा और अंधेरा हो गया। मदद के लिए बच्चे चीखते रहे। उनके सामने ही माता-पिता की तबीयत बिगड़ती चली गई और वह बेसुध हो गए। एसीपी इंदिरापुरम ने बताया कि फ्लैट में धुआं फैलने पर सभी का दम घुटने लगा। पहले राजेंद्र की तबीयत बिगड़ी।
राजेंद्र की पत्नी और चारों बच्चे उन्हें बोलने लगे कि सब ठीक हो जाएगा। कुछ देर बाद मीना की तबीयत भी खराब होने लगी। चारों बच्चे उन्हें बचाने के लिए मदद के लिए चिल्ला रहे थे। कुछ समय बाद दमकल कर्मी फ्लैट में पहुंचे और सभी को बाहर निकाला। सीएफओ राहुल पाल ने बताया कि फ्लैट से बाहर आने तक दोनों ठीक थे। अस्पताल में भर्ती कराने के बाद दोनों की मौत हो गई। उधर, माता-पिता की मौत के बाद बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना के बाद से फ्लैट बंद हैं।