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Ghaziabad News: कहर बरपा रहा था धुआं, पल-पल धुंधली हो रही थी जिंदगी की उम्मीद
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खोड़ा। इमारत में रहने वाले लोग रात में गेट बंद करके होली की तैयारियों के बाद सोने अपने-अपने कमरों में जा रहे थे। कुछ देर बाद अचानक शोर मचा तो गेट खोलकर बाहर जाने का प्रयास किया। लेकिन दरवाजे से बाहर इतना धुआं था कि बाहर गेट खोलते ही तुरंत लोगों को अपने आगोश में लेकर बेहोश कर रहा था। इस तरह एक के बाद एक कई परिवार बेहोश हो गए तो कुछ फ्लैटों में विंडो से धुआं अपना कहर बरपा रहा था। प्रभावित लोगों को खांसते-खांसते कुछ बन नहीं पा रहा था। धुएं से लगातार हाथ-पैर असहाय होते चले गए और बेसुध होकर जो जहां था पड़ा रह गया।
सॉफ्टवेयर इंजीनियर नीरज ने बताया कि वह पहली मंजिल पर फ्लैट संख्या एक में पत्नी खुशी और चार वर्षीय बेटी शानवी और आठ माह की इशिता के साथ रहते है। आग लगते ही फ्लैट में धुआं भरने से सभी की हालत खराब हो गई। वह समझ नहीं पा रहे थे कि क्या करना है। उन्होंने सबसे पहले अपने बच्चों को बचाने के लिए इमारत के सामने की ओर से चादर में बांधकर नीचे मौजूद लोगों को पकड़ाया। इसी तरह पत्नी को भी चादर के सहारे नीचे उतारा। इसके बाद वह फ्लैट से अलमारी में रखा कैश लेकर नीचे कूद गए। पुष्पा ने बताया कि वह इमारत में पांचवीं मंजिल पर अपनी मां और भाई के साथ रहती है। जबकि दूसरी मंजिल पर उनके बड़े भाई गौतम अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रहते हैं। वह रस्सी के सहारे नीचे उतरे थे।
जबकि उनका छोटा भाई कन्हैया तीसरी मंजिल पर परिवार समेत रहता है। वह भी बचने के लिए पत्नी और बच्चों समेत बाथरूम में छिप गए थे। वह भी अपनी मां और भाई के साथ खुद भी बाथरूम में छिप गई थीं। उन्होंने आस छोड़ दी थी कि वह सब लोग जिंदा बच सकेंगे।
प्रमिला ने बताया कि वह दूसरी मंजिल पर पति और तीन बच्चों के साथ रहती है। शोर सुनकर उन्होंने दरवाजा खोला तो बाहर से धुआं और तपिश आ रही थी। इसके कारण उन्हें फ्लैट का दरवाजा बंद करना पड़ा। उनके फ्लैट के दरवाजे पर अफरोज की बिल्ली बैठी थी, जिसे उन्होंने किसी तरह से अंदर लिया।
44 फ्लैटों की इमारत में कोचिंग सेंटर भी चलता है। हालांकि उसका रास्ता अलग से भी है। एक फ्लैट को बिल्डर ने अपने पास रखा है और उसे किराये पर दे रखा है। भूतल पर पीछे की ओर पार्किंग और सामने की तरफ चार दुकानें हैं। दुकानों के बराबर में से ही इमारत में जाने के लिए सीढि़यां बनी हैं। सीढि़यां जहां से शुरू होती हैं, वहां पर पार्किंग है।
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सॉफ्टवेयर इंजीनियर नीरज ने बताया कि वह पहली मंजिल पर फ्लैट संख्या एक में पत्नी खुशी और चार वर्षीय बेटी शानवी और आठ माह की इशिता के साथ रहते है। आग लगते ही फ्लैट में धुआं भरने से सभी की हालत खराब हो गई। वह समझ नहीं पा रहे थे कि क्या करना है। उन्होंने सबसे पहले अपने बच्चों को बचाने के लिए इमारत के सामने की ओर से चादर में बांधकर नीचे मौजूद लोगों को पकड़ाया। इसी तरह पत्नी को भी चादर के सहारे नीचे उतारा। इसके बाद वह फ्लैट से अलमारी में रखा कैश लेकर नीचे कूद गए। पुष्पा ने बताया कि वह इमारत में पांचवीं मंजिल पर अपनी मां और भाई के साथ रहती है। जबकि दूसरी मंजिल पर उनके बड़े भाई गौतम अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रहते हैं। वह रस्सी के सहारे नीचे उतरे थे।
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जबकि उनका छोटा भाई कन्हैया तीसरी मंजिल पर परिवार समेत रहता है। वह भी बचने के लिए पत्नी और बच्चों समेत बाथरूम में छिप गए थे। वह भी अपनी मां और भाई के साथ खुद भी बाथरूम में छिप गई थीं। उन्होंने आस छोड़ दी थी कि वह सब लोग जिंदा बच सकेंगे।
प्रमिला ने बताया कि वह दूसरी मंजिल पर पति और तीन बच्चों के साथ रहती है। शोर सुनकर उन्होंने दरवाजा खोला तो बाहर से धुआं और तपिश आ रही थी। इसके कारण उन्हें फ्लैट का दरवाजा बंद करना पड़ा। उनके फ्लैट के दरवाजे पर अफरोज की बिल्ली बैठी थी, जिसे उन्होंने किसी तरह से अंदर लिया।
44 फ्लैटों की इमारत में कोचिंग सेंटर भी चलता है। हालांकि उसका रास्ता अलग से भी है। एक फ्लैट को बिल्डर ने अपने पास रखा है और उसे किराये पर दे रखा है। भूतल पर पीछे की ओर पार्किंग और सामने की तरफ चार दुकानें हैं। दुकानों के बराबर में से ही इमारत में जाने के लिए सीढि़यां बनी हैं। सीढि़यां जहां से शुरू होती हैं, वहां पर पार्किंग है।