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Ghaziabad News: जिप नेट पर जानकारी फिर भी 13 दिन तक ओमकार को नहीं खोज पाई पुलिस
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साहिबाबाद। लोनी के गनौली गांव निवासी डेयरी संचालक ओमकार उर्फ ओमान (45) का शव अपहरण होने के 13 दिन बाद मिलना पुलिस की कार्य प्रणाली और सक्रियता पर सवाल खड़ा कर रहा है। संसाधन और तकनीकि होने के बावजूद शव तलाशने में 13 दिन लग गए। पुलिस के जिप नेट पोर्टल पर जानकारी मौजूद होने के बाद भी यह स्थिति सामने आई है। लोनी पुलिस ने पोर्टल पर ओमकार की जानकारी अपलोड करने और मथुरा पुलिस ने आसपास के सभी जिलों में अज्ञात शव मिलने की जानकारी सर्कुलेट करने का दावा किया है।
30 मई को ओमकार उर्फ ओमान की गांव के ही कुछ लोगों ने रंजिश के चलते गोली मारकर हत्या कर दी थी। शव के कपड़े उतारकर उसे गंगनहर में फेंक दिया था। लोनी पुलिस ने तलाश शुरू की और तय प्रक्रिया के तहत ओमकार की पूरी जानकारी यूपी पुलिस के जिपनेट पोर्टल पर अपलोड की। यह पोर्टल जानकारी मिलते ही राज्य के सभी जिलों के पुलिस कंट्रोल रूम में संबंधित मामले को भेजता है और वहां से सभी थानों को सूचना जारी होती है। अगर ऐसा था तो मथुरा पुलिस को जानकारी क्यों नहीं मिली और मिली तो मांट थाना पुलिस ने शव मिलते ही जानकारी लोनी पुलिस से साझा क्यों नहीं की। इस तरह के कई सवाल पुलिस कार्रवाई पर खड़े हो रहे हैं। वहीं लोनी पुलिस भी केवल गंगनहर का नाम सुनकर जिले की सीमा में ही सर्च अभियान चलाती रही। कमी किस जिला पुलिस की तरफ से रही यह तो जांच का विषय है, लेकिन कई कारणों में से यह भी एक कारण है कि एक बेटा अपने पिता का अंतिम संस्कार तक नहीं कर पाया और पत्नी आखिरी बार पति का चेहरा तक न देख सकी।
ओमकार के शव की तलाश में जगह-जगह सर्च अभियान चल रहा था, लेकिन शव बहकर मथुरा तक पहुंचेगा इसकी उम्मीद लोनी पुलिस को भी नहीं थी। दूसरे जिलों से ओमकारी की जानकारी से मिलते किसी अज्ञात शव के मिलने की सूचना नहीं थी। पुलिस जिले के अंदर ही शव की तलाश कर रही थी। वहीं लोनी में तैनात एक सिपाही के मथुरा पुलिस में तैनात बैचमेट से बड़ी लीड मिली। जानकारी के अनुसार लोनी पुलिस के सिपाही ने अपने बैचमेट से बातचीत की तब उसने कुछ दिन पहले मुरादनगर स्थित गंगनहर में डूबे युवक का शव मथुरा में मिलने की बात कही। तब पुलिस का मथुरा की तरफ ध्यान गया। इसके बाद ओमकार की जानकारी साझा की गई, तब उसने मांट थानाक्षेत्र में एक अज्ञात नग्न शव मिलने की बात बताई। लोनी पुलिस ने खुद मांट थाना प्रभारी से संपर्क किया तब वहां की पुलिस ने शव के बारे में बताया। इसके बाद लोनी पुलिस वहां पहुंची।
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किसी भी जिले में अज्ञात शव मिलने पर उसे 72 घंटे तक संरक्षण में रखने का नियम होता है। इस दौरान अगर उसकी शिनाख्त हो जाती है तब परिजनों के सुपुर्द कर दिया जाता है नहीं तो पुलिस ही उसका अंतिम संस्कार करती है। मांट पुलिस के अनुसार ओमकार का शव 5 जून की शाम को बहता हुआ मिला था। गंगनहर के पास मौजूद लोगों ने देखकर उसे रोका और पुलिस को सूचना दी थी। मोर्चरी में ओमकार का शव 9 जून तक रखा रहा, लेकिन शिनाख्त नहीं हुई। मथुरा पुलिस के अनुसार उन्होंने शव की फोटो व जानकारी का कंट्रोल रूम को देने के साथ-साथ सभी थानों और आसपास के जिलों को भेजी थी।
एसीपी लोनी सिद्धार्थ गौतम ने बताया कि ओमकार की पूरी जानकारी फोटो के साथ जिप नेट पोर्टल पर अपलोड की गई थी। लोनी पुलिस अपने प्रयासों से ही शव तक पहुंची और जानकारी एकत्र की। पहचान होने के बाद परिजनों को ले जाया गया था। मथुरा पुलिस से हमारे पास कोई सूचना नहीं आई थी। नग्न शव मिलने की जानकारी पता चलने पर खुद हमने मांट थाना पुलिस से संपर्क किया था।
सीओ मांट, मथुरा संदीप सिंह ने बताया कि नहर में बहकर आने वाले शव के मामलों में प्रमुखता से उन क्षेत्रों या जिलों की पुलिस को सूचना दी जाती है, जिस दिशा से शव बहकर आने की पुष्टि होती है। इस मामले में भी आसपास के सभी जिलों को सूचना सर्कुलेट हुई थी। थाना स्तर से सूचना कंट्रोल रूम को भेजी जाती है और वहां से बाकी जिलों व थानों को। इस मामले में भी पूरी जानकारी सर्कुलेट की गई थी। इसके साथ ही सोशल मीडिया के माध्यम से भी शिनाख्त के प्रयास किए गए थे।
30 मई को ओमकार उर्फ ओमान की गांव के ही कुछ लोगों ने रंजिश के चलते गोली मारकर हत्या कर दी थी। शव के कपड़े उतारकर उसे गंगनहर में फेंक दिया था। लोनी पुलिस ने तलाश शुरू की और तय प्रक्रिया के तहत ओमकार की पूरी जानकारी यूपी पुलिस के जिपनेट पोर्टल पर अपलोड की। यह पोर्टल जानकारी मिलते ही राज्य के सभी जिलों के पुलिस कंट्रोल रूम में संबंधित मामले को भेजता है और वहां से सभी थानों को सूचना जारी होती है। अगर ऐसा था तो मथुरा पुलिस को जानकारी क्यों नहीं मिली और मिली तो मांट थाना पुलिस ने शव मिलते ही जानकारी लोनी पुलिस से साझा क्यों नहीं की। इस तरह के कई सवाल पुलिस कार्रवाई पर खड़े हो रहे हैं। वहीं लोनी पुलिस भी केवल गंगनहर का नाम सुनकर जिले की सीमा में ही सर्च अभियान चलाती रही। कमी किस जिला पुलिस की तरफ से रही यह तो जांच का विषय है, लेकिन कई कारणों में से यह भी एक कारण है कि एक बेटा अपने पिता का अंतिम संस्कार तक नहीं कर पाया और पत्नी आखिरी बार पति का चेहरा तक न देख सकी।
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ओमकार के शव की तलाश में जगह-जगह सर्च अभियान चल रहा था, लेकिन शव बहकर मथुरा तक पहुंचेगा इसकी उम्मीद लोनी पुलिस को भी नहीं थी। दूसरे जिलों से ओमकारी की जानकारी से मिलते किसी अज्ञात शव के मिलने की सूचना नहीं थी। पुलिस जिले के अंदर ही शव की तलाश कर रही थी। वहीं लोनी में तैनात एक सिपाही के मथुरा पुलिस में तैनात बैचमेट से बड़ी लीड मिली। जानकारी के अनुसार लोनी पुलिस के सिपाही ने अपने बैचमेट से बातचीत की तब उसने कुछ दिन पहले मुरादनगर स्थित गंगनहर में डूबे युवक का शव मथुरा में मिलने की बात कही। तब पुलिस का मथुरा की तरफ ध्यान गया। इसके बाद ओमकार की जानकारी साझा की गई, तब उसने मांट थानाक्षेत्र में एक अज्ञात नग्न शव मिलने की बात बताई। लोनी पुलिस ने खुद मांट थाना प्रभारी से संपर्क किया तब वहां की पुलिस ने शव के बारे में बताया। इसके बाद लोनी पुलिस वहां पहुंची।
किसी भी जिले में अज्ञात शव मिलने पर उसे 72 घंटे तक संरक्षण में रखने का नियम होता है। इस दौरान अगर उसकी शिनाख्त हो जाती है तब परिजनों के सुपुर्द कर दिया जाता है नहीं तो पुलिस ही उसका अंतिम संस्कार करती है। मांट पुलिस के अनुसार ओमकार का शव 5 जून की शाम को बहता हुआ मिला था। गंगनहर के पास मौजूद लोगों ने देखकर उसे रोका और पुलिस को सूचना दी थी। मोर्चरी में ओमकार का शव 9 जून तक रखा रहा, लेकिन शिनाख्त नहीं हुई। मथुरा पुलिस के अनुसार उन्होंने शव की फोटो व जानकारी का कंट्रोल रूम को देने के साथ-साथ सभी थानों और आसपास के जिलों को भेजी थी।
एसीपी लोनी सिद्धार्थ गौतम ने बताया कि ओमकार की पूरी जानकारी फोटो के साथ जिप नेट पोर्टल पर अपलोड की गई थी। लोनी पुलिस अपने प्रयासों से ही शव तक पहुंची और जानकारी एकत्र की। पहचान होने के बाद परिजनों को ले जाया गया था। मथुरा पुलिस से हमारे पास कोई सूचना नहीं आई थी। नग्न शव मिलने की जानकारी पता चलने पर खुद हमने मांट थाना पुलिस से संपर्क किया था।
सीओ मांट, मथुरा संदीप सिंह ने बताया कि नहर में बहकर आने वाले शव के मामलों में प्रमुखता से उन क्षेत्रों या जिलों की पुलिस को सूचना दी जाती है, जिस दिशा से शव बहकर आने की पुष्टि होती है। इस मामले में भी आसपास के सभी जिलों को सूचना सर्कुलेट हुई थी। थाना स्तर से सूचना कंट्रोल रूम को भेजी जाती है और वहां से बाकी जिलों व थानों को। इस मामले में भी पूरी जानकारी सर्कुलेट की गई थी। इसके साथ ही सोशल मीडिया के माध्यम से भी शिनाख्त के प्रयास किए गए थे।