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Ghaziabad News: फ्लैटों की सजावट बन रही आग में घी
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गाजियाबाद। लोग अपने घर को दूसरों से अलग बनाने के लिए हजारों-लाखों रुपये खर्च कर लकड़ी, पीवीसी (पॉलीविनाइल क्लोराइड) समेत अन्य संसाधनों से सजाते हैं। फ्लैट की बालकनी से धूल अंदर न आए, इसके लिए प्लास्टिक का प्रयोग करते हैं। आग जैसी त्रासदी में यही चकाचौंध घी का कार्य करती है।
गौर ग्रीन एवेन्यू सोसायटी में लगी आग की जांच में भी 9वीं मंजिल के फ्लैट में किए गए लकड़ी के कार्य और उसके ऊपर के कुछ फ्लैटों की बालकनी में लगी पीवीसी शीट आग के बेकाबू होने का कारण बनी।
इस मामले में जांच करने गए विद्युत सुरक्षा के सहायक निदेशक सौरभ सिंह ने बताया कि जिस फ्लैट से आग शुरू हुई, वहां आग के लिए पर्याप्त मात्रा में ईंधन था। इसी कारण आग तेजी से फैली। उन्होंने बताया कि घर में बिजली का लोड ज्यादा नहीं था। जांच में सामने आया कि घर में रोज एक दिया जलाया जाता था। उस दिन भी दिया जलाया गया। संभावना है कि उसी दिए से आग लगी हो और फ्लैट में लकड़ी के साथ अन्य प्रकार की कलाकृतियां थीं, जिन्होंने आग को विकराल बना दिया।
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छोटी-सी जगह पर सब कुछ सजाने की आदत गलत
आर्किटेक्ट हिमांशु गुप्ता ने बताया कि लकड़ी का कार्य और पीवीसी के डिजाइन आज के वक्त में ऐसे हो गए हैं कि हर कोई अपने घर को इससे सजाना चाहता है। खासकर फ्लैट मालिकों में यह इच्छा ज्यादा होती है। उन्होंने बताया कि दोनों ही आग के लिए ईंधन हैं। साथ ही चारकोल शीट का प्रयोग बढ़ गया है। इसमें एक बार आग लगने पर उसे रोकना मुश्किल होता है। लोग कम खर्च में अच्छा दिखाने के चक्कर में घर की दीवारों तक पर इनका प्रयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि फ्लैट छोटे होते हैं। आग लगने पर उसे बुझाने के लिए जरूरी जगह भी कई बार नहीं मिल पाती है। पीवीसी की आग को काबू करने के लिए कुछ सेकंड में ही उसे बुझाना होता है, वरना वह बड़े क्षेत्र में फैल जाती है।
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पत्थर आकर्षक और सुरक्षित भी
आर्किटेक्ट हिमांशु गुप्ता ने बताया कि घर को अच्छा दिखाने के लिए स्टोन और ईंट की कलाकृतियां भी आती हैं। ये दिखने में भी अच्छी लगती हैं। आग लगने पर सुरक्षा देने का कार्य भी करती हैं। उन्होंने बताया कि अब सीमेंट ईंटों में आकर्षक डिजाइन मिल जाते हैं। लोग इनका प्रयोग कर घर को सुंदर दिखाने के साथ सुरक्षित भी बना सकते हैं।
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पीवीसी ने आग को ऊपर तक पहुंचाने में की मदद
सीएफओ राहुल पाल ने बताया कि गौर ग्रीन सोसायटी के जिन फ्लैटों में आग लगी, उनमें से कई की बालकनी में धूल और धूप रोकने के लिए पीवीसी शीट लगी हुई थी। आग इनके माध्यम से ही ऊपर की मंजिल तक पहुंची और अन्य घरों को चपेट में ले लिया। सीएफओ ने बताया कि इस प्रकार की शीट नहीं लगाने के लिए लोगों को कहा जाता है, क्योंकि यह आग के लिए सीढ़ी का कार्य करती है। नियमों के अनुसार राहत कार्य के लिए बालकनी को ब्लॉक नहीं किया जा सकता। इस संबंध में आर्किटेक्ट हिमांशु ने बताया कि पीवीसी के स्थान पर एल्युमिनियम या लोहे के फ्रेम में सीमेंट शीट भी लगाई जा सकती है। यह बहुत कीमती भी नहीं है। इससे आग भी नहीं फैलेगी।
गौर ग्रीन एवेन्यू सोसायटी में लगी आग की जांच में भी 9वीं मंजिल के फ्लैट में किए गए लकड़ी के कार्य और उसके ऊपर के कुछ फ्लैटों की बालकनी में लगी पीवीसी शीट आग के बेकाबू होने का कारण बनी।
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इस मामले में जांच करने गए विद्युत सुरक्षा के सहायक निदेशक सौरभ सिंह ने बताया कि जिस फ्लैट से आग शुरू हुई, वहां आग के लिए पर्याप्त मात्रा में ईंधन था। इसी कारण आग तेजी से फैली। उन्होंने बताया कि घर में बिजली का लोड ज्यादा नहीं था। जांच में सामने आया कि घर में रोज एक दिया जलाया जाता था। उस दिन भी दिया जलाया गया। संभावना है कि उसी दिए से आग लगी हो और फ्लैट में लकड़ी के साथ अन्य प्रकार की कलाकृतियां थीं, जिन्होंने आग को विकराल बना दिया।
छोटी-सी जगह पर सब कुछ सजाने की आदत गलत
आर्किटेक्ट हिमांशु गुप्ता ने बताया कि लकड़ी का कार्य और पीवीसी के डिजाइन आज के वक्त में ऐसे हो गए हैं कि हर कोई अपने घर को इससे सजाना चाहता है। खासकर फ्लैट मालिकों में यह इच्छा ज्यादा होती है। उन्होंने बताया कि दोनों ही आग के लिए ईंधन हैं। साथ ही चारकोल शीट का प्रयोग बढ़ गया है। इसमें एक बार आग लगने पर उसे रोकना मुश्किल होता है। लोग कम खर्च में अच्छा दिखाने के चक्कर में घर की दीवारों तक पर इनका प्रयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि फ्लैट छोटे होते हैं। आग लगने पर उसे बुझाने के लिए जरूरी जगह भी कई बार नहीं मिल पाती है। पीवीसी की आग को काबू करने के लिए कुछ सेकंड में ही उसे बुझाना होता है, वरना वह बड़े क्षेत्र में फैल जाती है।
पत्थर आकर्षक और सुरक्षित भी
आर्किटेक्ट हिमांशु गुप्ता ने बताया कि घर को अच्छा दिखाने के लिए स्टोन और ईंट की कलाकृतियां भी आती हैं। ये दिखने में भी अच्छी लगती हैं। आग लगने पर सुरक्षा देने का कार्य भी करती हैं। उन्होंने बताया कि अब सीमेंट ईंटों में आकर्षक डिजाइन मिल जाते हैं। लोग इनका प्रयोग कर घर को सुंदर दिखाने के साथ सुरक्षित भी बना सकते हैं।
पीवीसी ने आग को ऊपर तक पहुंचाने में की मदद
सीएफओ राहुल पाल ने बताया कि गौर ग्रीन सोसायटी के जिन फ्लैटों में आग लगी, उनमें से कई की बालकनी में धूल और धूप रोकने के लिए पीवीसी शीट लगी हुई थी। आग इनके माध्यम से ही ऊपर की मंजिल तक पहुंची और अन्य घरों को चपेट में ले लिया। सीएफओ ने बताया कि इस प्रकार की शीट नहीं लगाने के लिए लोगों को कहा जाता है, क्योंकि यह आग के लिए सीढ़ी का कार्य करती है। नियमों के अनुसार राहत कार्य के लिए बालकनी को ब्लॉक नहीं किया जा सकता। इस संबंध में आर्किटेक्ट हिमांशु ने बताया कि पीवीसी के स्थान पर एल्युमिनियम या लोहे के फ्रेम में सीमेंट शीट भी लगाई जा सकती है। यह बहुत कीमती भी नहीं है। इससे आग भी नहीं फैलेगी।