{"_id":"6a7874d2c9de4b145e0180a4","slug":"the-caravan-of-kanwariyas-is-moving-forward-with-faith-and-enthusiasm-gurgaon-news-c-24-1-gur1002-97242-2026-08-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gurugram News: आस्था और उमंग के साथ चल रहा कांवड़ियों का कारवां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gurugram News: आस्था और उमंग के साथ चल रहा कांवड़ियों का कारवां
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले में जगह-जगह सजे शिविर, जलाभिषेक के लिए प्रमुख शिवालयों के कपाट 24 घंटे के लिए खुलेंगे
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। सावन के पावन महीने में मिलेनियम सिटी गुरुग्राम पूरी तरह शिवभक्ति के रंग में रंग गई है, जहां कांवड़ियों की भारी भीड़ से पूरा इलाका भगवामय हो गया है। जगह-जगह गूंजते जयकारों और सजे शिविरों के बीच मंगलवार को होने वाले महा-जलाभिषेक के लिए प्रमुख शिवालयों के कपाट 24 घंटे के लिए खोल दिए गए हैं। घंटेश्वर मंदिर, कादीपुर, भूतेश्वर मंदिर, सेक्टर 31, सरहौल, बाबा प्रकाशपुरी मंदिर में कांवड़िया शिविरों में विश्राम के लिए कांवड़ियों की टोली भजन कीर्तन करती नजर आई।
कंधे पर बिठाकर चल रहे हैं शिव की मूर्ति
फर्रुखनगर जा रहे कांवडिया रोहित भगवान शिव की मूर्ति कंधे पर बिठाकर घंटेश्वर मंदिर स्थित कांवड़िया शिविर विश्राम के लिए पहुंचे। रोहित ने बताया कि वे देश की सेना में हैं, उनकी पोस्टिंग कश्मीर में है। पिछले 13 साल से भगवान शंकर की मूर्ति को कंधों पर बिठाकर लाते है। मूर्ति के साथ हरिद्वार का गंगाजल होता है। अगले साल पूरे परिवार के साथ कांवड़ यात्रा करेंगे। भोले के प्रति आस्था और भक्ति का असर है कि वे इस कठिन सफर को पूरा करते हैं।
भगवान शिव की कृपा से सब मिला
यह मेरी 16वीं कांवड़ यात्रा है। गोमुख से गंगाजल लेकर आ रहा हूं। वर्ष 2008 में शुरुआत की थी, भगवान शिव के प्रति भक्ति हर बार यह यात्रा सफल करती है। -महेंद्र यादव, धनकोट
विज्ञापन
यह मेरी 30वीं कांवड़ है। बेरोजगारी के कारण डिप्रेशन में चला गया था। तब पहली बार कांवड़ उठाई। भगवान शिव की कृपा से काम भी मिला। ताउम्र कांवड़ उठाने का संकल्प लिया है। -अशोक कुमार, सेक्टर-10ए
यह मेरी पहली कांवड़ यात्रा है। अपने 19 वर्षीय बेटे निव्यांश के साथ यात्रा पर निकली हूं। हर कांवड़िया शिविर शिवालय जैसा लग रहा है। -मीनू तंचर, गढ़ी हरसरु, सेक्टर-95
मैं 70 साल की हो गई हूं। गांव के समूह के साथ हर साल कांवड़ यात्रा करती हूं। इस यात्रा में पूरे परिवार की सुख समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हूं। -रामरति, पटौदी
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। सावन के पावन महीने में मिलेनियम सिटी गुरुग्राम पूरी तरह शिवभक्ति के रंग में रंग गई है, जहां कांवड़ियों की भारी भीड़ से पूरा इलाका भगवामय हो गया है। जगह-जगह गूंजते जयकारों और सजे शिविरों के बीच मंगलवार को होने वाले महा-जलाभिषेक के लिए प्रमुख शिवालयों के कपाट 24 घंटे के लिए खोल दिए गए हैं। घंटेश्वर मंदिर, कादीपुर, भूतेश्वर मंदिर, सेक्टर 31, सरहौल, बाबा प्रकाशपुरी मंदिर में कांवड़िया शिविरों में विश्राम के लिए कांवड़ियों की टोली भजन कीर्तन करती नजर आई।
कंधे पर बिठाकर चल रहे हैं शिव की मूर्ति
फर्रुखनगर जा रहे कांवडिया रोहित भगवान शिव की मूर्ति कंधे पर बिठाकर घंटेश्वर मंदिर स्थित कांवड़िया शिविर विश्राम के लिए पहुंचे। रोहित ने बताया कि वे देश की सेना में हैं, उनकी पोस्टिंग कश्मीर में है। पिछले 13 साल से भगवान शंकर की मूर्ति को कंधों पर बिठाकर लाते है। मूर्ति के साथ हरिद्वार का गंगाजल होता है। अगले साल पूरे परिवार के साथ कांवड़ यात्रा करेंगे। भोले के प्रति आस्था और भक्ति का असर है कि वे इस कठिन सफर को पूरा करते हैं।
विज्ञापन
भगवान शिव की कृपा से सब मिला
यह मेरी 16वीं कांवड़ यात्रा है। गोमुख से गंगाजल लेकर आ रहा हूं। वर्ष 2008 में शुरुआत की थी, भगवान शिव के प्रति भक्ति हर बार यह यात्रा सफल करती है। -महेंद्र यादव, धनकोट
विज्ञापन
यह मेरी 30वीं कांवड़ है। बेरोजगारी के कारण डिप्रेशन में चला गया था। तब पहली बार कांवड़ उठाई। भगवान शिव की कृपा से काम भी मिला। ताउम्र कांवड़ उठाने का संकल्प लिया है। -अशोक कुमार, सेक्टर-10ए
यह मेरी पहली कांवड़ यात्रा है। अपने 19 वर्षीय बेटे निव्यांश के साथ यात्रा पर निकली हूं। हर कांवड़िया शिविर शिवालय जैसा लग रहा है। -मीनू तंचर, गढ़ी हरसरु, सेक्टर-95
मैं 70 साल की हो गई हूं। गांव के समूह के साथ हर साल कांवड़ यात्रा करती हूं। इस यात्रा में पूरे परिवार की सुख समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हूं। -रामरति, पटौदी