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Gurugram News: बच्चों पर भारी पड़ रही अपनों की रोक-टोक

Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 10 Mar 2026 06:51 PM IST
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The restrictions imposed by loved ones are taking a toll on children
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नागरिक अस्पताल में ओसीडी के रोजाना पहुंच रहे चार से पांच मामले
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। सेक्टर-10 स्थित नागरिक अस्पताल में रोजाना करीब 100 मरीज मनोचिकित्सक विभाग में पहुंचते हैं। इसमें से चार से पांच मामले ओसीडी के मिल रहे हैं। किशोरों में होने वाली ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) की गंभीरता को बढ़ाने में पारिवारिक माहौल की बड़ी भूमिका सामने आ रही है। परिवार का नकारात्मक व्यवहार, रोक-टोक और बच्चों की बार-बार की जाने वाली आलोचना उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकती है।
पारिवारिक माहौल ओसीडी के लिए जिम्मेदार

मनोचिकित्सकों का कहना है कि किशोरों में ओसीडी की गंभीरता को बढ़ाने में पारिवारिक माहौल एक बड़ी भूमिका निभा रहा है। आमतौर पर माना जाता है कि ओसीडी केवल दिमागी रसायनों के असंतुलन से होता है लेकिन नए मामलों में माता-पिता का व्यवहार एक बड़ा कारक बनकर उभरा है। घर में लगातार होने वाली टोका-टाकी और आलोचना के कारण बच्चों में गुस्से और चिड़चिड़ेपन जैसी शिकायतें बढ़ रही हैं, जो आगे चलकर ओसीडी का रूप ले लेती है।
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क्या है ओसीडी
एक गंभीर मानसिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति को अनियंत्रित, बार-बार आने वाले विचार और दोहराव वाले व्यवहार परेशान करते हैं। इसमें सफाई, संदेह या संतुलन की चिंता के कारण व्यक्ति एक ही काम बार-बार करता है, जो दैनिक जीवन में बाधा डालता है। परिवार के माहौल के आधार पर जब घर में मरीज के प्रति झुंझलाहट या बहुत ज्यादा टोक-टाक होती है, तो किशोरों का मानसिक संतुलन बिगड़ने लगता है।
माता-पिता की काउंसलिंग बेहद जरूरी
चिकित्सक बताते हैं कि इस दौरान सिर्फ बच्चों की ही नहीं माता-पिता की काउंसलिंग बेहद जरूरी हो जाती है। ऐसे में कई बार बच्चे में गुस्से जैसी समस्या तो है ही तमाम तरह की समस्याओं का भी सामना करना पड़ता हैभारत जैसे देश में जहां मानसिक बीमारियों का इलाज कई बार केवल दवाओं तक सीमित रह जाता है, वहां बच्चों के साथ सही व्यवहार सिखाने के लिए परिवार की काउंसलिंग अनिवार्य है। माता-पिता यह समझें कि बार-बार बच्चे को गलत ठहराने के बजाय सहयोगात्मक व्यवहार करें।
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रोजाना हमारे विभाग में लगभग 100 मरीज आते हैं, जिनमें चार से पांच मरीज ओसीडी से पीड़ित होते हैं। माता-पिता को सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि यह समस्या बच्चे के मानसिक संतुलन को प्रभावित कर सकती है और उनमें चिड़चिड़ापन व गुस्सा बढ़ा सकती है। - डाॅ. अजीत दीवान, मनोचिकित्सक, नागरिक अस्पताल
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