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Delhi NCR News: अवैध ऑनलाइन हेल्थ एग्रीगेटर्स पर कार्रवाई न होने पर हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस
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याचिकाकर्ता ने कहा, 6 अगस्त 2020 को दिए गए हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद ऑनलाइन हेल्थ प्लेटफॉर्म्स पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
हाईकोर्ट ने शहर में काम कर रहे अवैध ऑनलाइन हेल्थ सर्विस एग्रीगेटर्स के खिलाफ कार्रवाई न करने को लेकर दायर अवमानना याचिका पर नोटिस जारी किया है। याचिका में आरोप लगाया कि अधिकारियों ने कोर्ट के पुराने आदेशों का पालन नहीं किया। न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने डॉ. रोहित जैन द्वारा दायर इस याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता ने कहा कि 6 अगस्त 2020 को दिए गए हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद अवैध रूप से काम कर रहे ऑनलाइन हेल्थ प्लेटफॉर्म्स पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। याचिका में कहा कि कई ऑनलाइन हेल्थ सर्विस एग्रीगेटर्स क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट (रजिस्ट्रेशन और रेगुलेशन) एक्ट, 2010 का उल्लंघन करते हुए दिल्ली में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन सरकारी एजेंसियां इस पर आंखें मूंदे बैठी हैं। हाईकोर्ट ने अपने 2020 के फैसले में निर्देश दिए थे कि किसी भी अवैध ऑनलाइन हेल्थ एग्रीगेटर को पहले सुनवाई का मौका देकर, कानून के तहत तुरंत कार्रवाई की जाए। अवमानना याचिका पर नोटिस जारी करते हुए कोर्ट ने प्रतिवादियों को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जवाब में यह साफ करें कि अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और भविष्य में नियमन के लिए क्या योजना है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई में यह भी स्पष्ट किया जाए कि प्रस्तावित कानून ऑनलाइन हेल्थ एग्रीगेटर्स पर लागू होगा या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई 2026 को होगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
हाईकोर्ट ने शहर में काम कर रहे अवैध ऑनलाइन हेल्थ सर्विस एग्रीगेटर्स के खिलाफ कार्रवाई न करने को लेकर दायर अवमानना याचिका पर नोटिस जारी किया है। याचिका में आरोप लगाया कि अधिकारियों ने कोर्ट के पुराने आदेशों का पालन नहीं किया। न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने डॉ. रोहित जैन द्वारा दायर इस याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता ने कहा कि 6 अगस्त 2020 को दिए गए हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद अवैध रूप से काम कर रहे ऑनलाइन हेल्थ प्लेटफॉर्म्स पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। याचिका में कहा कि कई ऑनलाइन हेल्थ सर्विस एग्रीगेटर्स क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट (रजिस्ट्रेशन और रेगुलेशन) एक्ट, 2010 का उल्लंघन करते हुए दिल्ली में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन सरकारी एजेंसियां इस पर आंखें मूंदे बैठी हैं। हाईकोर्ट ने अपने 2020 के फैसले में निर्देश दिए थे कि किसी भी अवैध ऑनलाइन हेल्थ एग्रीगेटर को पहले सुनवाई का मौका देकर, कानून के तहत तुरंत कार्रवाई की जाए। अवमानना याचिका पर नोटिस जारी करते हुए कोर्ट ने प्रतिवादियों को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जवाब में यह साफ करें कि अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और भविष्य में नियमन के लिए क्या योजना है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई में यह भी स्पष्ट किया जाए कि प्रस्तावित कानून ऑनलाइन हेल्थ एग्रीगेटर्स पर लागू होगा या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई 2026 को होगी।