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Delhi NCR News: बायोमेडिकल कचरे के निपटान में लापरवाही पर एनजीटी सख्त
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17 राज्यों में अपनाई जा रही डीप बरीअल प्रक्रिया, मानकों के उल्लंघन पर कार्रवाई के निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने बायोमेडिकल कचरे के वैज्ञानिक निपटान में लापरवाही पर सख्त रुख अपनाते हुए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और राज्यों को डीप बरीअल (गहरी दफन) प्रक्रिया के निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। अधिकरण ने कहा कि बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 का उल्लंघन पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
प्रधान पीठ में न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने सुनवाई के दौरान सीपीसीबी की अनुपालन रिपोर्ट का अवलोकन किया। रिपोर्ट के अनुसार देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 17 में बायोमेडिकल कचरे के निपटान के लिए डीप बरीअल पद्धति अपनाई जा रही है।
एनजीटी ने पाया कि कई स्वास्थ्य संस्थानों में तय मानकों का पालन नहीं हो रहा है। गड्ढों की निर्धारित गहराई, कचरे को ढकने, पशुओं की पहुंच रोकने, भूजल संरक्षण और उचित स्थान चयन जैसे नियमों की अनदेखी की जा रही है। अनुमति और रिकॉर्ड रखरखाव में भी खामियां सामने आई हैं। सीपीसीबी ने बताया कि संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और समितियों को निर्देश जारी किए गए हैं। उल्लंघन पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा-5 के तहत कार्रवाई होगी। अगली सुनवाई 28 अक्तूबर 2026 को होगी।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने बायोमेडिकल कचरे के वैज्ञानिक निपटान में लापरवाही पर सख्त रुख अपनाते हुए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और राज्यों को डीप बरीअल (गहरी दफन) प्रक्रिया के निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। अधिकरण ने कहा कि बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 का उल्लंघन पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
प्रधान पीठ में न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने सुनवाई के दौरान सीपीसीबी की अनुपालन रिपोर्ट का अवलोकन किया। रिपोर्ट के अनुसार देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 17 में बायोमेडिकल कचरे के निपटान के लिए डीप बरीअल पद्धति अपनाई जा रही है।
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एनजीटी ने पाया कि कई स्वास्थ्य संस्थानों में तय मानकों का पालन नहीं हो रहा है। गड्ढों की निर्धारित गहराई, कचरे को ढकने, पशुओं की पहुंच रोकने, भूजल संरक्षण और उचित स्थान चयन जैसे नियमों की अनदेखी की जा रही है। अनुमति और रिकॉर्ड रखरखाव में भी खामियां सामने आई हैं। सीपीसीबी ने बताया कि संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और समितियों को निर्देश जारी किए गए हैं। उल्लंघन पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा-5 के तहत कार्रवाई होगी। अगली सुनवाई 28 अक्तूबर 2026 को होगी।
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