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Noida News: आरटीई सत्यापन पर उठे सवाल, स्कूल ने बताया राशन कार्ड फर्जी
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- विभागीय जांच में दस्तावेज मिला था सही, चार महीने बाद भी 500 से अधिक बच्चों का दाखिला अधर में
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। शिक्षा के अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत दाखिला प्रक्रिया में सत्यापन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विभागीय जांच में सही पाए गए एक अभिभावक के राशन कार्ड को स्कूल ने फर्जी बताते हुए बच्चे का प्रवेश रोक दिया। हैरानी की बात यह है कि दो स्तर के सरकारी सत्यापन के बाद स्कूल आवंटित होने के बावजूद चार महीने बीत जाने पर भी बच्चे को प्रवेश नहीं मिल सका। जिले में 500 से अधिक बच्चों का दाखिला अब भी लंबित है।
शुक्रवार को बड़ी संख्या में अभिभावक बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय पहुंचे और बच्चों के प्रवेश की मांग की। अभिभावक जितेंद्र कुमार ने बताया कि आरटीई प्रक्रिया में शामिल होने के लिए उन्होंने 15 हजार रुपये खर्च किए। सत्यापन के बाद उनके बच्चे को स्कूल आवंटित हो गया, लेकिन अब स्कूल राशन कार्ड को फर्जी बताकर दाखिला देने से इनकार कर रहा है। उनका सवाल है कि यदि दस्तावेज फर्जी था तो ब्लॉक और जिला स्तर के सत्यापन में वह सही कैसे पाया गया। अभिभावकों का आरोप है कि कई पात्र आवेदनों को बिना उचित कारण निरस्त कर दिया गया, जबकि अपात्र आवेदन स्वीकृत हो गए। ऐसे कई मामले पहले भी जिलाधिकारी मेधा रूपम तक पहुंचे थे। उन्होंने सूची तलब कर जांच के निर्देश दिए थे, लेकिन प्रभावित अभिभावकों का कहना है कि उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ।
स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग-
आरटीई नियमों के अनुसार दस्तावेजों के सत्यापन की जिम्मेदारी बेसिक शिक्षा विभाग की है, लेकिन कई मामलों में स्कूल स्वयं दस्तावेजों की वैधता पर सवाल उठा रहे हैं। अभिभावकों का आरोप है कि तहसील से जारी आय प्रमाण पत्र तक को फर्जी बताया जा रहा है और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को प्रवेश देने में आनाकानी की जा रही है। अभिभावकों ने मांग की है कि दोषी अधिकारियों और नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि पात्र बच्चों का भविष्य प्रभावित न हो।
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ये स्कूल रहे थे गायब-
उधर, विभाग की ओर से स्कूलों को बैठक के लिए भी बुलाया गया था, लेकिन कई निजी स्कूल अनुपस्थित रहे। जिससे व्यवस्था पर सवाल और गहरे हो गए। इनमें बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, एमिटी इंटरनेशनल स्कूल, दिल्ली पब्लिक स्कूल सेक्टर-122, द मिलेनियम स्कूल सेक्टर- 119, राघव ग्लोबल स्कूल, रामाज्ञा स्कूल सेक्टर-50, संस्कार रोजाजलालपुर, रामाज्ञा स्कूल दादरी, दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल नाॅलेज पार्क पांच, सेंट मैरी स्कूल नाॅलेज पार्क पांच, प्रेजिडियम स्कूल, केआर मंगलम वर्ल्ड स्कूल, रामाज्ञा स्कूल सेक्टर डेल्टा, इंद्रप्रस्थ ग्लोबल स्कूल, ऑक्सफोर्ड ग्रीन पब्लिक स्कूल पिपलका आदि शामिल थे।
कोट-
आरटीई आवेदनों का सत्यापन दो स्तर पर होता है। संबंधित मामले में राशन कार्ड की दोबारा जांच कराई जाएगी। यदि कहीं चूक मिली तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -राहुल पंवार, बेसिक शिक्षा अधिकारी
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। शिक्षा के अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत दाखिला प्रक्रिया में सत्यापन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विभागीय जांच में सही पाए गए एक अभिभावक के राशन कार्ड को स्कूल ने फर्जी बताते हुए बच्चे का प्रवेश रोक दिया। हैरानी की बात यह है कि दो स्तर के सरकारी सत्यापन के बाद स्कूल आवंटित होने के बावजूद चार महीने बीत जाने पर भी बच्चे को प्रवेश नहीं मिल सका। जिले में 500 से अधिक बच्चों का दाखिला अब भी लंबित है।
शुक्रवार को बड़ी संख्या में अभिभावक बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय पहुंचे और बच्चों के प्रवेश की मांग की। अभिभावक जितेंद्र कुमार ने बताया कि आरटीई प्रक्रिया में शामिल होने के लिए उन्होंने 15 हजार रुपये खर्च किए। सत्यापन के बाद उनके बच्चे को स्कूल आवंटित हो गया, लेकिन अब स्कूल राशन कार्ड को फर्जी बताकर दाखिला देने से इनकार कर रहा है। उनका सवाल है कि यदि दस्तावेज फर्जी था तो ब्लॉक और जिला स्तर के सत्यापन में वह सही कैसे पाया गया। अभिभावकों का आरोप है कि कई पात्र आवेदनों को बिना उचित कारण निरस्त कर दिया गया, जबकि अपात्र आवेदन स्वीकृत हो गए। ऐसे कई मामले पहले भी जिलाधिकारी मेधा रूपम तक पहुंचे थे। उन्होंने सूची तलब कर जांच के निर्देश दिए थे, लेकिन प्रभावित अभिभावकों का कहना है कि उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ।
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स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग-
आरटीई नियमों के अनुसार दस्तावेजों के सत्यापन की जिम्मेदारी बेसिक शिक्षा विभाग की है, लेकिन कई मामलों में स्कूल स्वयं दस्तावेजों की वैधता पर सवाल उठा रहे हैं। अभिभावकों का आरोप है कि तहसील से जारी आय प्रमाण पत्र तक को फर्जी बताया जा रहा है और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को प्रवेश देने में आनाकानी की जा रही है। अभिभावकों ने मांग की है कि दोषी अधिकारियों और नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि पात्र बच्चों का भविष्य प्रभावित न हो।
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ये स्कूल रहे थे गायब-
उधर, विभाग की ओर से स्कूलों को बैठक के लिए भी बुलाया गया था, लेकिन कई निजी स्कूल अनुपस्थित रहे। जिससे व्यवस्था पर सवाल और गहरे हो गए। इनमें बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल, एमिटी इंटरनेशनल स्कूल, दिल्ली पब्लिक स्कूल सेक्टर-122, द मिलेनियम स्कूल सेक्टर- 119, राघव ग्लोबल स्कूल, रामाज्ञा स्कूल सेक्टर-50, संस्कार रोजाजलालपुर, रामाज्ञा स्कूल दादरी, दिल्ली वर्ल्ड पब्लिक स्कूल नाॅलेज पार्क पांच, सेंट मैरी स्कूल नाॅलेज पार्क पांच, प्रेजिडियम स्कूल, केआर मंगलम वर्ल्ड स्कूल, रामाज्ञा स्कूल सेक्टर डेल्टा, इंद्रप्रस्थ ग्लोबल स्कूल, ऑक्सफोर्ड ग्रीन पब्लिक स्कूल पिपलका आदि शामिल थे।
कोट-
आरटीई आवेदनों का सत्यापन दो स्तर पर होता है। संबंधित मामले में राशन कार्ड की दोबारा जांच कराई जाएगी। यदि कहीं चूक मिली तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -राहुल पंवार, बेसिक शिक्षा अधिकारी