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Hindi News ›   Delhi NCR ›   Nuh News ›   Urea worth 266 selling for 500, DAP also at double the price... helpless farmers await action.

Nuh News: 266 का यूरिया 500 में, डीएपी भी दोगुने दाम पर...बेबस किसान, कार्रवाई का इंतजार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 01 Jul 2026 01:05 AM IST
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खाद की कालाबाजारी से कराह उठा किसान : खरीफ सीजन के दौरान जिले में खाद की कालाबाजारी चरम पर
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रिजवान खान
नूंह। खरीफ सीजन के दौरान जिले में खाद की कालाबाजारी चरम पर पहुंच गई है। सरकार द्वारा निर्धारित कीमतों पर खाद उपलब्ध कराने के दावे धरातल पर पूरी तरह फेल साबित हो रहे हैं। मंगलवार को जिले के विभिन्न क्षेत्रों में की गई पड़ताल में सामने आया कि यूरिया और डीएपी खुलेआम निर्धारित मूल्य से कहीं अधिक कीमत पर बेचे जा रहे हैं। मजबूर किसान फसल बचाने के लिए महंगे दामों पर खाद खरीदने को विवश हैं, जबकि प्रशासन अब तक प्रभावी कार्रवाई करने में नाकाम दिखाई दे रहा है।

सरकारी दर के अनुसार यूरिया की एक बोरी 266.50 रुपये में मिलनी चाहिए, लेकिन पुन्हाना, नूंह और पिनगवां सहित कई क्षेत्रों में यही बोरी 350 से 550 रुपये तक में बेची जा रही है। इसी तरह डीएपी, जिसकी कीमत 1350 से 1650 रुपये के बीच निर्धारित है, उसे 1800 से 2400 रुपये तक में किसानों को बेचा जा रहा है। किसानों का आरोप है कि दुकानदार उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर खुलेआम मनमानी वसूली कर रहे हैं।
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पुन्हाना में दुकानदारों की मिलीभगत के आरोप
पुन्हाना में कई खाद विक्रेताओं से बातचीत के दौरान यह बात सामने आई कि अधिकांश दुकानदारों ने आपसी सहमति से खाद बेचने के रेट तय कर रखे हैं। किसानों का आरोप है कि कोई भी दुकानदार निर्धारित सरकारी मूल्य पर खाद देने को तैयार नहीं है और सभी मिलकर ऊंचे दाम वसूल रहे हैं। किसानों ने इस पूरे खेल में संबंधित अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए हैं।
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नकली खाद पकड़ने के बाद भी नहीं टूटी कालाबाजारी
कुछ दिन पहले ही फिरोजपुर झिरका के दोहा गांव में प्रशासन और पुलिस ने कार्रवाई करते हुए नकली खाद के करीब 300 कट्टे बरामद किए थे। इस मामले में आरोपियों पर कार्रवाई भी हुई, लेकिन उसके बावजूद जिले में खाद की कालाबाजारी पर कोई असर दिखाई नहीं दे रहा। किसान सवाल उठा रहे हैं कि जब नकली खाद का इतना बड़ा मामला सामने आ चुका है, तब भी महंगे दामों पर खाद बेचने वाले दुकानदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।


380 पंजीकृत दुकानदार, फिर भी नहीं हो रही निगरानी
कृषि विभाग के अनुसार जिले में खाद एवं बीज के 380 पंजीकृत विक्रेता हैं। इसके बावजूद किसानों का कहना है कि बाजार में निर्धारित दरों पर खाद उपलब्ध नहीं है। किसानों का आरोप है कि यदि नियमित निरीक्षण और छापेमारी हो तो कालाबाजारी पर आसानी से रोक लगाई जा सकती है।


डीसी से विशेष टीम गठित करने की मांग
खाद की बढ़ती कालाबाजारी से परेशान किसानों ने जिला उपायुक्त अखिल पिलानी से विशेष टीम गठित कर जिलेभर में औचक निरीक्षण कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि दुकानों पर स्टॉक और बिक्री रजिस्टर की जांच की जाए तथा सरकारी दर से अधिक कीमत वसूलने वाले दुकानदारों के लाइसेंस रद्द कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।


दुकानदार मनमर्जी से रेट तय कर रहे हैं। किसान की कोई सुनवाई नहीं हो रही। प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
- अरशद चौधरी, सिरौली

खाद समय पर नहीं मिली तो फसल खराब हो जाएगी। इसी मजबूरी का फायदा उठाकर दुकानदार दोगुने दाम वसूल रहे हैं।
- याकूब खान, किसान मेवली

जब नकली खाद के 300 कट्टे पकड़े जा सकते हैं तो कालाबाजारी करने वालों पर भी कार्रवाई हो सकती है। प्रशासन इच्छाशक्ति दिखाए।
- तौसीफ, बिसरु किसान

जिला प्रशासन विशेष टीम बनाकर रोजाना छापेमारी करे तभी किसानों को सरकारी रेट पर खाद मिल पाएगी।
- साजिद, किसान

सरकार द्वारा निर्धारित रेट पर ही किसानों को खाद दी जाए ऐसे दिशा निर्देश सभी खाद बीज भंडार संचालकों को दिए हुए हैं। अगर कोई अधिक रेट में खाद बीज बेच रहा है तो उसकी जांच कराई जाएगी। कोई अधिक दामों में खाद बेचता पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- अखिल पिलानी, जिला उपायुक्त, नूंह
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