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वजीराबाद नमभूमि विवाद: एनजीटी में डीडीए और एमसीडी ने कचरा डंपिंग के आरोपों से किया इन्कार
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हलफनामों में दोनों एजेंसियों ने कहा-न कचरा डाला, न किसी को अनुमति दी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। वजीराबाद स्थित नमभूमि के कचरे के ढेर के नीचे दबने के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में सुनवाई के दौरान दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने अपने-अपने हलफनामे दाखिल कर कचरा डंपिंग के आरोपों से साफ इन्कार किया है। दोनों एजेंसियों ने कहा कि विवादित क्षेत्र में न तो उन्होंने कचरा डाला और न ही किसी व्यक्ति या एजेंसी को ऐसा करने की अनुमति दी।
एनजीटी के निर्देश पर दाखिल हलफनामे में डीडीए ने बताया कि झाड़ोदा माजरा मेट्रो स्टेशन के पास उसके दो भूमि खंड हैं। इनमें एक मास्टर प्लान दिल्ली-2021 के जोन ‘पी-II’ और दूसरा जोन ‘ओ’ में स्थित है। अधिकरण के समक्ष विचाराधीन तालाब एवं नमभूमि क्षेत्र जोन ‘ओ’ का हिस्सा है। डीडीए ने कहा कि इस क्षेत्र में उसकी ओर से किसी प्रकार का निष्क्रिय कचरा या अन्य सामग्री नहीं डाली जा रही है। साथ ही, किसी व्यक्ति, ठेकेदार या एजेंसी को भी तालाब क्षेत्र में भराव या कचरा डालने की अनुमति नहीं दी गई। प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्ष 2023 में एमसीडी के साथ हुआ पत्राचार केवल जोन ‘पी-II’ की भूमि से संबंधित था और उसका मौजूदा विवादित नमभूमि क्षेत्र से कोई संबंध नहीं है।
मौजूदा विवादित नमभूमि क्षेत्र से हमारा कोई संबंध नहीं :डीडीए
एमसीडी ने भी एनजीटी के समक्ष विस्तृत हलफनामा दाखिल कर आरोपों का खंडन किया। निगम ने 10 मार्च को लगाए गए आरोपों के जवाब में विवादित स्थल की वास्तविक तस्वीरें, जीपीएस लोकेशन और सैटेलाइट आधारित रिकॉर्ड प्रस्तुत किए। एमसीडी के अनुसार, 30 जून को कार्यकारी अभियंता, सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता सहित अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण किया तथा विभिन्न दिशाओं से तस्वीरें लेकर वास्तविक स्थिति दर्ज की। निगम का दावा है कि ये तकनीकी साक्ष्य उसके पक्ष को स्पष्ट करते हैं।
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ऐसे सामने आया था मामला
यह मामला 16 जुलाई 2025 को प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट के बाद सामने आया था, जिसमें दावा किया गया था कि वजीराबाद के पास स्थित एक नमभूमि निष्क्रिय कचरे के नीचे दबकर लगभग समाप्त हो गई है। इसके बाद एनजीटी ने स्वतः संज्ञान लेकर डीडीए, एमसीडी, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) समेत संबंधित विभागों से जवाब तलब किया था।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। वजीराबाद स्थित नमभूमि के कचरे के ढेर के नीचे दबने के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में सुनवाई के दौरान दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने अपने-अपने हलफनामे दाखिल कर कचरा डंपिंग के आरोपों से साफ इन्कार किया है। दोनों एजेंसियों ने कहा कि विवादित क्षेत्र में न तो उन्होंने कचरा डाला और न ही किसी व्यक्ति या एजेंसी को ऐसा करने की अनुमति दी।
एनजीटी के निर्देश पर दाखिल हलफनामे में डीडीए ने बताया कि झाड़ोदा माजरा मेट्रो स्टेशन के पास उसके दो भूमि खंड हैं। इनमें एक मास्टर प्लान दिल्ली-2021 के जोन ‘पी-II’ और दूसरा जोन ‘ओ’ में स्थित है। अधिकरण के समक्ष विचाराधीन तालाब एवं नमभूमि क्षेत्र जोन ‘ओ’ का हिस्सा है। डीडीए ने कहा कि इस क्षेत्र में उसकी ओर से किसी प्रकार का निष्क्रिय कचरा या अन्य सामग्री नहीं डाली जा रही है। साथ ही, किसी व्यक्ति, ठेकेदार या एजेंसी को भी तालाब क्षेत्र में भराव या कचरा डालने की अनुमति नहीं दी गई। प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्ष 2023 में एमसीडी के साथ हुआ पत्राचार केवल जोन ‘पी-II’ की भूमि से संबंधित था और उसका मौजूदा विवादित नमभूमि क्षेत्र से कोई संबंध नहीं है।
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मौजूदा विवादित नमभूमि क्षेत्र से हमारा कोई संबंध नहीं :डीडीए
एमसीडी ने भी एनजीटी के समक्ष विस्तृत हलफनामा दाखिल कर आरोपों का खंडन किया। निगम ने 10 मार्च को लगाए गए आरोपों के जवाब में विवादित स्थल की वास्तविक तस्वीरें, जीपीएस लोकेशन और सैटेलाइट आधारित रिकॉर्ड प्रस्तुत किए। एमसीडी के अनुसार, 30 जून को कार्यकारी अभियंता, सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता सहित अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण किया तथा विभिन्न दिशाओं से तस्वीरें लेकर वास्तविक स्थिति दर्ज की। निगम का दावा है कि ये तकनीकी साक्ष्य उसके पक्ष को स्पष्ट करते हैं।
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ऐसे सामने आया था मामला
यह मामला 16 जुलाई 2025 को प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट के बाद सामने आया था, जिसमें दावा किया गया था कि वजीराबाद के पास स्थित एक नमभूमि निष्क्रिय कचरे के नीचे दबकर लगभग समाप्त हो गई है। इसके बाद एनजीटी ने स्वतः संज्ञान लेकर डीडीए, एमसीडी, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) समेत संबंधित विभागों से जवाब तलब किया था।