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Delhi: निजामुद्दीन से डीएनडी तक बदलेगी यमुना नदी की तस्वीर, डीडीए ने उठाई जिम्मेदारी... निविदा जारी

शनि पाथौली, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 01 Feb 2026 05:47 AM IST
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सार

दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) यमुना के बाढ़ मैदानों को उनके प्राकृतिक स्वरूप में लौटाने के लिए इसके पुनर्स्थापित और पुनर्जीवन का कार्य कराएगा। डीडीए के उद्यान सिविल खंड-9 की ओर से परियोजना के लिए निविदा जारी कर दी गई है।

Yamuna river will change from Nizamuddin to DND in Delhi
दिल्ली बॉर्डर के पास बहती यमुना नदी। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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दिल्ली की पहचान और जीवनरेखा कही जाने वाली यमुना नदी को स्वच्छ, हरित और जीवंत बनाने के लिए अहम कदम उठाया गया है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) यमुना के बाढ़ मैदानों को उनके प्राकृतिक स्वरूप में लौटाने के लिए इसके पुनर्स्थापित और पुनर्जीवन का कार्य कराएगा। डीडीए के उद्यान सिविल खंड-9 की ओर से परियोजना के लिए निविदा जारी कर दी गई है।

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अधिकारियों के अनुसार, वर्षों से अतिक्रमण, अवैध निर्माण और प्रदूषण के कारण बाढ़ मैदानों की पारिस्थितिकी को भारी नुकसान पहुंचा है। पुनर्स्थापित कार्य के तहत देशी पौधों और घास प्रजातियों का रोपण, नमभूमि का विकास, मिट्टी संरक्षण और जल प्रवाह को प्राकृतिक बनाने जैसे कार्य किए जाएंगे।
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28.35 करोड़ से प्राकृतिक स्वरूप में लौटेंगे बाढ़ मैदान
पर्यावरणीय सुधार के लिए करीब 28.35 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत तय की गई है और 18 माह में पूरा करने का लक्ष्य है। डीडीए में पंजीकृत सिविल श्रेणी के ठेकेदारों के अलावा सीपीडब्ल्यूडी, एमईएस, बीएसएनएल, रेलवे और अन्य केंद्रीय व राज्य सरकारी विभागों में सूचीबद्ध ठेकेदार इसमें भाग ले सकेंगे। ठेकेदारों के लिए पिछले सात वर्षों में समान प्रकृति के कार्यों का अनुभव अनिवार्य किया गया है।

163 हेक्टेयर क्षेत्र में किया जाएगा पुनर्स्थापन कार्य
यह कार्य निजामुद्दीन ब्रिज से डीएनडी फ्लाईवे तक पश्चिमी तट पर फैले करीब 163 हेक्टेयर क्षेत्र में किया जाएगा। इससे जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा और राजधानी में पर्यावरणीय संतुलन भी मजबूत होगा। इससे पक्षियों, तितलियों, मछलियों और अन्य जीव-जंतुओं के लिए प्राकृतिक आवास विकसित होंगे। बाढ़ मैदान भूजल रिचार्ज करते हैं और प्रदूषकों को प्राकृतिक रूप से फिल्टर करते हैं।

बाढ़ की आशंका घटाने में सहायक होगी योजना
यमुना के किनारे हरियाली बढ़ने से स्थानीय तापमान में कमी आएगी और शहरी हीट आइलैंड प्रभाव कम होगा। नदी के प्रदूषण को कम करने और भविष्य में बाढ़ की आशंका को घटाने में भी परियोजना सहायक होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, बाढ़ मैदान नदी के किनारे खाली जमीन नहीं होते, बल्कि वे जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा होते हैं। ये क्षेत्र बाढ़ के समय अतिरिक्त पानी को समाहित कर बाढ़ नियंत्रण में मदद करते हैं।

यमुना जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में होगी विकसित
यह परियोजना केंद्र और दिल्ली सरकार के उस व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है, जिसके तहत यमुना को केवल एक नदी नहीं, बल्कि एक जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित करने की कोशिश की जा रही है। पर्यावरणविदों के अनुसार, यदि बाढ़ मैदानों को सही ढंग से संरक्षित और विकसित किया जाए, तो यमुना को फिर से जीवंत बनाया जा सकता है।

यमुना पुनर्जीवन के चल रही अन्य प्रमुख परियोजनाएं
दिल्ली में यमुना के बाढ़ मैदानों के पुनर्स्थापित करने के लिए पहले से कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं चल रही हैं। यमुना जैव विविधता पार्क (वजीराबाद) और असिता ईस्ट जैव विविधता पार्क प्रमुख उदाहरण हैं। यहां बाढ़ मैदानों को प्राकृतिक वनस्पति और नमभूमि में बदला गया है। इसके अलावा, ओखला और कालिंदी कुंज क्षेत्र में भी बाढ़ मैदानों के संरक्षण और हरित विकास से जुड़ी योजनाएं लागू की गई हैं। दिल्ली सरकार व डीडीए की कोशिश है कि यमुना के पूरे प्रवाह क्षेत्र को चरणबद्ध तरीके से पुनर्जीवित किया जाए।

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