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Delhi: एचआईवी से बचाव के लिए एआई से खोजी दवा, दुष्प्रभाव से तबीयत बिगड़ी तो मरीज पहुंचा अस्पताल; हालत गंभीर

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 01 Feb 2026 05:47 AM IST
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सार

दवा के दुष्प्रभाव से मरीज की हालत बिगड़ गई, जिसके बाद उसे आनन-फानन में राजधानी के एक नामी सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

drug searched using AI to prevent HIV, patient rushed to the hospital after suffering from adverse effects
demo - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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दिल्ली में एचआईवी संक्रमण से बचाव के लिए एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से दवा लेने का मामला सामने आया है। दवा के दुष्प्रभाव से मरीज की हालत बिगड़ गई, जिसके बाद उसे आनन-फानन में राजधानी के एक नामी सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

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हैरानी की बात यह है कि मरीज ने बिना चिकित्सकीय सलाह के एआई से दवा संबंधी जानकारी जुटाई और एक केमिस्ट से दवा खरीदकर स्वयं उपचार शुरू कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली सरकार का ड्रग कंट्रोल विभाग सक्रिय हो गया है। विभाग ने मरीज से संबंधित केमिस्ट की जानकारी जुटाकर कार्रवाई शुरू कर दी है। इस घटना की पुष्टि विभाग के अधिकारियों ने भी की है।
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मिली जानकारी के अनुसार, मरीज ने हाई-रिस्क यौन संबंध बनाने के बाद एचआईवी से बचाव के लिए एआई की मदद से दवा की जानकारी हासिल की और संक्रमण से बचाव के लिए 28 दिन का कोर्स शुरू कर दिया। कोर्स शुरू करने के करीब एक सप्ताह बाद मरीज में दवा के गंभीर दुष्प्रभाव सामने आने लगे। उसे आंखों और त्वचा से जुड़ी समस्याएं होने लगीं, जिसके बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया।

जांच के दौरान मरीज को स्टीवंस-जॉनसन सिंड्रोम से पीड़ित पाया गया। डॉक्टरों के अनुसार यह एक दुर्लभ लेकिन अत्यंत गंभीर बीमारी है, जो आमतौर पर दवा से होने वाली एलर्जी या संक्रमण के कारण होती है। यह फ्लू जैसे लक्षणों के साथ शुरू होता है। जिसके बाद दर्दनाक दाने, छाले और त्वचा का छिलना शुरू हो जाता है। यह एक आपातकालीन चिकित्सा स्थिति है जिसमें अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता होती है।

एड्स से 80 फीसदी मौतों में आई कमी
देश में एड्स से होने वाली मौतों में करीब 80 फीसदी तक गिरावट आई है। नए मामलों में भी करीब 48 फीसदी तक गिरावट दर्ज हुई है। प्रमुख मेडिकल संस्थानों के अध्ययन में ये बात सामने आई है। देश में 2010 के मुकाबले एड्स से होने वाली मौतों में करीब 80 फीसदी की कमी आई है। नए संक्रमण के मामलों में भी 48 फीसदी तक गिरावट दर्ज की गई है। मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, एम्स और आईसीएमआर के डॉक्टरों द्वारा की गई इस रिसर्च में ये पता चला है। जांच कराओ और तुरंत इलाज शुरू करो नीति ने एड्स को बड़ी हद तक पीछे धकेला है। सही समय पर इलाज मिलने से संक्रमित लोग अब सामान्य जीवन जी पा रहे हैं।

समय पर इलाज से उम्र बढ़ी
समय पर उपलब्ध दवाओं की मदद से एचआईवी संक्रमित व्यक्ति शादी कर सकता है, बच्चे पैदा कर सकता है और लंबी, स्वस्थ जिंदगी जी सकता है। रिसर्च के मुताबिक, अब देश में ऐसे एचआईवी मरीजों की संख्या बढ़ रही है, जिनकी उम्र 50 साल से अधिक है। साल 2000 में जहां ऐसे मरीजों की संख्या 17 फीसदी थी, वहीं अब यह बढ़कर 37 फीसदी हो गई है। मां से बच्चे तक एड्स का खतरा करीब शून्य हो गया है। यह इस बात का संकेत है कि इलाज से मरीजों की उम्र बढ़ रही है।

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