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मलबे में दबे सवाल: कुछ दिन में जिम्मेदार हो जाएंगे बहाल, कार्रवाई का दायरा सीमित; जारी रहता है अवैध निर्माण
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Digvijay Singh
Updated Tue, 02 Jun 2026 06:31 AM IST
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सार
सैदुल्लाजाब इमारत हादसे में कई लोगों की मौत के बाद एक बार फिर दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की जवाबदेही पर सवाल खड़े हो गए हैं। हर बड़े भवन हादसे के बाद अधिकारियों के निलंबन और जांच के आदेश तो दिए जाते हैं, लेकिन जिम्मेदारी तय होने और स्थायी कार्रवाई के उदाहरण बेहद कम दिखाई देते हैं।
Delhi Building Collapse
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सैदुल्लाजाब इमारत हादसे में कई लोगों की मौत के बाद एक बार फिर दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की जवाबदेही पर सवाल खड़े हो गए हैं। हर बड़े भवन हादसे के बाद अधिकारियों के निलंबन और जांच के आदेश तो दिए जाते हैं, लेकिन जिम्मेदारी तय होने और स्थायी कार्रवाई के उदाहरण बेहद कम दिखाई देते हैं।
हालिया हादसे के बाद एमसीडी ने दो इंजीनियरों को निलंबित कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि दिल्ली में भवन ढहने की पिछली घटनाओं का रिकॉर्ड बताता है कि ऐसी कार्रवाई अक्सर प्रारंभिक प्रतिक्रिया तक सीमित रह जाती है। विभागीय जांच लंबी खिंचती है और अधिकांश मामलों में अधिकारी बाद में सेवा में बहाल हो जाते हैं।
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नवंबर 2010 में पूर्वी दिल्ली के ललिता पार्क में पांच मंजिला इमारत ढहने से करीब 70 लोगों की मौत हुई थी और दर्जनों लोग घायल हुए थे। जांच में सामने आया था कि भवन में वर्षों से अवैध रूप से अतिरिक्त मंजिलें जोड़ी जा रही थीं और उसकी संरचना कमजोर हो चुकी थी। इसके बावजूद संबंधित विभागों ने समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। हादसे के बाद एमसीडी ने सहायक अभियंता, कनिष्ठ अभियंता, लाइसेंसिंग निरीक्षक और हाउस टैक्स निरीक्षक समेत कई अधिकारियों को निलंबित किया था।
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ललिता पार्क हादसे की जांच के लिए गठित आयोग ने अपनी रिपोर्ट में एमसीडी को संस्थागत विफलता का जिम्मेदार ठहराया था। रिपोर्ट में भवन विभाग, संपत्ति कर विभाग और लाइसेंसिंग इकाइयों के बीच समन्वय की कमी को हादसे की बड़ी वजह बताया गया। आयोग ने माना था कि समय रहते निगरानी और प्रवर्तन होता तो त्रासदी टाली जा सकती थी। उल्लेखनीय है कि वर्षों बाद संबंधित जूनियर इंजीनियर पर केवल 21 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
मानवाधिकार आयोग ने भी तलब की थी रिपोर्ट
मानवाधिकार आयोग ने भी उस समय सवाल उठाया था कि अवैध निर्माण को बढ़ावा देने या उस पर आंखें मूंदने वाले अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। आयोग ने असुरक्षित इमारतों की पहचान और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी।
कार्रवाई का दायरा सीमित जारी रहता है अवैध निर्माण
पूर्व अधिकारियों ने कहा कि दिल्ली में आज भी बड़ी संख्या में इमारतें बिना स्वीकृत नक्शों, कमजोर नींव और अतिरिक्त मंजिलों के साथ खड़ी हैं। ऐसे में सैदुल्लाजाब हादसा केवल एक इमारत के ढहने की घटना नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है जिसमें हादसों के बाद जवाबदेही अक्सर निलंबन तक सीमित रह जाती है।