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'मुल्क' में मुस्लिमों का पक्ष नहीं, स्पेशल इंटरव्यू में डायरेक्टर ने खोले फिल्म के सीक्रेट

Sun, 29 Jul 2018 12:20 PM IST
रवि बुले
रवि बुले Updated Sun, 29 Jul 2018 12:20 PM IST
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interview of mulk director anubhav sinha
ऋषि कपूर और तापसी पन्नू अभिनीत फिल्म 'मुल्क' इन दिनों सुर्खियों में छाई हुई है। यह फिल्म 3 अगस्त को रिलीज होने वाली है। रिलीज से पहले अमर उजाला ने 'मुल्क' के निर्देशक अनुभव सिन्हा से उनकी इस फिल्म को लेकर ढेर सारी बातें की। एक झलक उनके बीच हुआ सवाल-जवाब की...


मुल्क के टीजर/ट्रेलर लॉन्च होने के बाद सोशल मीडिया में विरोध है कि आपने मुस्लिमों का पक्ष लिया, क्या फिल्म हिंदू विरोधी है?
ट्रोल करने वालों को मैं गंभीरता नहीं लेता। वे पैसे लेकर काम करने वाले मुट्ठी भर लोग हैं। राय देने वालों में इनकी संख्या बस 10-15 फीसदी है। वे जनता की आवाज नहीं हैं।
 
interview of mulk director anubhav sinha
मुल्क मुस्लिमों की आवाज की तरह है और ट्रेलर लॉन्च पर आप रामनामी वस्त्र गले में डाले मंच पर थे, ऐसा क्यों?
मैं जानता था, मुझे हिंदू-विरोधी कहा जाएगा। आज बहुतों के लिए अगर आप मुस्लिम-विरोधी नहीं हैं, तो हिंदू-विरोधी हैं। उनका हिंदुत्व क्या है, मुझे पता नहीं। रामनामी का मैसेज यही था कि मैं हिंदू हूं। मुझे हिंदू-विरोधी मत कहना।

मुल्क की जड़ें कहां है? आपके जेहन में इसकी शुरुआत कब हुई?
फिल्म की जड़ें बनारस और अलीगढ़ के बैकग्राउंड में हैं शायद। 1978-79, जब मैं बड़ा हो रहा था। पहले मैं बनारस में पढ़ा-लिखा। फिर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में गया। उस दौर में अलग-अलग शहरों में सालाना दंगे होते थे। बनारस में मैं हिंदू बहुसंख्यकों का हिस्सा था, तो अलीगढ़ मैं अल्पसंख्यक। वहां मुस्लिम बहुसंख्यक थे। मैं देखता था कि दंगों का बहुसंख्यकों से कोई रिश्ता नहीं। दंगे अलग स्तर पर होते हैं, ये मुझे दिखता था। फिर हाल के वर्षों में कुछ घटनाएं हुईं, जिन्हें पढ़ते हुए एक कहानी दिमाग में पकी।
interview of mulk director anubhav sinha
माना जा रहा है कि यह कहानी लखनऊ में मार्च 2017 में हुए सैफुल्ला एनकाउंटर पर आधारित है?
मुल्क किसी एक घटना पर आधारित नहीं है, इसमें कई घटनाएं शामिल हैं। इनके अंश फिल्म में दिखेंगे।

जो दूरियां दिखती हैं या वाकई हैं, वे कैसे मिटेंगी?
सिर्फ बातों से हल निकल सकता है। बातें न हों, तो कई बार हमें अपनी गलतियों का एहसास नहीं होता। बातों से गांठें खुलती हैं।
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interview of mulk director anubhav sinha
मुल्क के हालात आपको आज कैसे दिख रहे हैं?
वैसे ही जैसे आपको दिख रहे हैं। मुल्क के हालात अच्छे नहीं हैं।

मुल्क या समाज के हालात सुधारने में सिनेमा क्या कोई भूमिका निभा सकता है?
बिल्कुल नहीं। सिनेमा सिर्फ सवाल खड़े कर सकता है, जवाब नहीं दे सकता।
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