वरुण धवन के दिल की डायरी, बोले- 'उस दिन पापा ने मुझसे कहा, शाबाश...'
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वरुण धवन अपने पिता डेविड धवन के बारे में बताते हैं कि वह अपने लिए भले ही लापरवाह हों लेकिन अपने परिवार के लिए कोई लापरवाही नहीं बरतते हैं। इस उम्र में भी वह काम करते रहते हैं। वह तो हम लोग हैं, जिन्होंने उन्हें थोड़ा रोक लिया है, वरना वह आज भी ज्यादा से ज्यादा फिल्में करते रहना चाहते हैं।
मैं लगभग छह-सात साल का था। पूरे परिवार के साथ एक शादी में दिल्ली गया था। मैंने तब वहां खूब डांस किया। डांस फ्लोर पर सब मुझे देखते रह गए। मेरा बड़ा भाई रोहित मुझे देख रहा था और झेंप रहा था, लेकिन मैंने नाचना बंद नहीं किया। कुछ ही देर में सभी लोगों ने मुझे घेर लिया और मैं उनके साथ नाचने लगा। बस तभी मुझे लगा कि मैं यह कर सकता हूं।
जब पहली फिल्म 'स्टूडेंट ऑफ द ईयर' के लिए ऑडिशन दिया, तब लगा नहीं था कि कर पाऊंगा, लेकिन परिवार के सहयोग से मुझे आत्मविश्वास मिला और फिल्म चल निकली। मैं बहुत भावनात्मक हूं, लेकिन दिखा नहीं पाता। खासकर, परिवार के मामले में तो कुछ ज्यादा ही। मैं बहुत कम लोगों से ही अपनी बातें साझा कर पाता हूं।
मेरा भाई और मेरा बेस्ट फ्रेंड ऐसे दो ही लोग हैं, जो मेरे बारे में सब कुछ जानते हैं। एक समय था जब मुझे लगता था कि मैं अपनी मां के ज्यादा करीब हूं और उनसे प्यार भी ज्यादा करता हूं। पापा शुरू से ही फिल्मों की शूटिंग में व्यस्त रहते थे इसलिए हमारे साथ ज्यादा समय नहीं बिता पाते थे। इसी वजह से मुझे यही लगता था कि मैं उनके करीब कम हूं, लेकिन फिल्म 'मैं तेरा हीरो' के दौरान मुझे यह अहसास हुआ कि मैं उनसे कितना प्यार करता हूं।
फिल्म की शूटिंग के लिए हम सब बैंकॉक गए थे। जब पापा के साथ एक हादसा हुआ तो हम सबके दिमाग में बस यही था कि हम उन्हें खो चुके हैं। उस दिन मुझे लगा कि मैं उनके बिना नहीं रह सकता। शूटिंग के दौरान वह एक सीन के लिए जिम की लोकेशन देखने के लिए गए थे कि अचानक वह गिर पड़े। उनके गले और घुटने में बहुत दर्द था। हमें लगा था, शायद उनका घुटना टूट गया है। हम सब उन्हें लेकर डॉक्टर के पास गए। डॉक्टर ने उन्हें आराम करने की सलाह दी। सब वापस आ गए। मैंने जब उनसे पूछा, तो वह बोले कि वह एकदम ठीक हैं। मैंने भी यह मान लिया।
लंच के बाद वह सेट पर आए। वह अपने करीबी सहायक निर्देशक उमेश के साथ एक कोने में बैठे और कुछ दवाई ली। उमेश जी उनके पैरों पर मालिश कर रहे थे। मैं उनके पास गया और पूछा, “पापा, क्या हुआ आपको?” उन्होंने मेरी तरफ देखा और बस इतना बोले कि मैं जा रहा हूं और नीचे गिर पड़े। हम सब एकदम स्तब्ध थे। हमें लगा वह नहीं रहे। उस दस सेकंड में मुझे लगा कि मैं क्या खो रहा हूं और मैंने अपनी उंगलियों को उनके मुंह में डाला। उन्होंने तुरंत उल्टी की और होश में आए। मैंने झुंझलाहट में सब पर चिल्लाना शुरू कर दिया और फिर उन्हें उनके कमरे में ले गए।
उस दिन उन्हें 'डायबिटिक कोमा' का अटैक आया था। जब मुझे यह पता लगा, मैं इसे कंट्रोल नहीं कर पाया और तुरंत मां को फोन लगाया और रो-रोकर सब बताया। अगले ही दिन मां और भाई बैंकॉक आ गए। इस घटना के बाद मैं उनके और करीब आ गया। मैं उनके स्वास्थ्य को लेकर अब ज्यादा सतर्क हो गया हूं।
मेरे पिता अपने स्वास्थ्य को लेकर बहुत लापरवाह रहे हैं। इसकी एक वजह यह भी रही कि मां उनके साथ हमेशा होती है, तो वह जानते हैं कि ध्यान रखने के लिए मां है। मेरे पापा बहुत सीधे और मासूम हैं। वह अपने परिवार के लिए एक अच्छे पिता और पति की तरह हमेशा खड़े रहते हैं। मेरी मां न हो तो उनका गुजारा नहीं होता। वह मां के प्रति बहुत सहज और संवेदनशील हैं। उनका सेंस ऑफ ह्यूमर हमेशा कमाल का रहता है, इसलिए वही अपेक्षा लोग मुझसे भी रखते हैं।
जब मेरी पहली फिल्म आ रही थी, उससे पहले करण जौहर ने उन्हें बताया था कि वह मुझे लॉन्च कर रहे हैं। तब पापा ने मुझे कहा था कि करण तुम्हें फिल्मों में ला रहा है, इससे बड़ी बात क्या होगी? तुम करण जौहर के निर्देशन में काम कर रहे हो। यह तुम्हारे करियर के लिए अच्छा है। उसके लिए उन्होंने मेरा बहुत उत्साहवर्धन किया था।
मुझे याद है, जब मैं पापा के साथ पहली फिल्म कर रहा था, तब बहुत घबरा रहा था। उन्होंने मुझे स्टार किड होने का कोई खास ट्रीटमेंट नहीं दिया, बल्कि उनके साथ पहली फिल्म ‘मैं तेरा हीरो’ के दौरान मैं ज्यादा नर्वस था। उनका रवैया एकदम अलग होता था। मुझे याद है शूटिंग के दूसरे ही दिन मैं अपनी वैन में गया और खूब रोया था।
मेरे बड़े भाई ने जब मुझे देखा तो वह खूब हंसा और बोला कि तुम्हें याद रखना चाहिए कि उन्होंने कितने बड़े अभिनेताओं के साथ काम किया है। तुम भी अभी उनके लिए एक अभिनेता हो बस, इसलिए यह मत सोचो कि वह तुम्हें कोई छूट देंगे। ऐसा कम ही होता था, जब मैं डांट नहीं खाता था, लेकिन जब फिल्म बनी और लोगों को पसंद आई, उस दिन उन्होंने मुझे शाबाशी दी। वह मेरे लिए एक उपलब्धि थी।
वह घर में बिल्कुल हमारी तरह हो जाते हैं। मैं क्योंकि घर में छोटा हूं, इसलिए सबका चहेता हूं। आज भी वह मुझे छोटे बच्चे की तरह ट्रीट करते हैं। जब कहीं बाहर जाता हूं, तो थोड़ी-थोड़ी देर में फोन करके पूछते रहते हैं। जब मैं उनके फोन से चिढ़ जाता हूं, तो वह मेरे ड्राइवर को फोन करके पूछते रहते हैं। वह अपने लिए भले ही लापरवाह हों, लेकिन अपने परिवार के लिए कोई लापरवाही नहीं बरतते हैं। इस उम्र में भी वह काम करते रहते हैं। वह तो हम लोग हैं, जिन्होंने उन्हें थोड़ा रोक लिया है, वरना वह आज भी ज्यादा से ज्यादा फिल्में करते रहना चाहते हैं।